Uttar Pradesh: जिन हाथों में कभी भीख का कटोरा था, वही हाथ अब देशभक्ति की धुनों पर ताल मिलाएंगे। उत्तर प्रदेश के संभल जिले के 30 ऐसे बच्चे, जो कभी सड़कों पर भीख मांगने या छोटे-मोटे काम करने को मजबूर थे, अब 26 जनवरी 2026 को लखनऊ में होने वाली गणतंत्र दिवस परेड में मार्चिंग बैंड का हिस्सा बनेंगे। यह बदलाव किसी चमत्कार से कम नहीं अभाव से आत्मसम्मान और पहचान तक का सफर।
Uttar Pradesh: सड़कों से स्कूल और परेड ग्राउंड तक
संभल जिला प्रशासन और एक गैर-सरकारी संगठन उम्मीद की संयुक्त पहल से यह संभव हो पाया। जिला-व्यापी सर्वे में भीख मांगने वाले 268 बच्चों की पहचान हुई, जिनमें से 30 बच्चों को न सिर्फ सरकारी स्कूलों में दाखिला दिलाया गया, बल्कि परेड के लिए भी चुना गया। इन बच्चों ने भीख मांगना पूरी तरह छोड़ दिया है। आधार कार्ड समेत जरूरी दस्तावेज पूरे किए गए हैं, ताकि वे शिक्षा और सरकारी सुविधाओं से जुड़ सकें।
Uttar Pradesh: कड़ी ट्रेनिंग, नई पहचान
7 से 14 वर्ष की उम्र के ये बच्चे बहजोई पुलिस लाइन में नियमित प्रशिक्षण ले चुके हैं। बैंड के सभी वाद्य यंत्र जिला प्रशासन की ओर से उपलब्ध कराए गए हैं। परेड के दौरान ये बच्चे योगी आदित्यनाथ के समक्ष प्रदर्शन करेंगे—जो इनके जीवन का सबसे गर्व का पल होगा। जिलाधिकारी राजेंद्र पेंसिया के निर्देशन में शुरू की गई ‘भीख से सीख’ पहल का उद्देश्य सिर्फ बच्चों को मंच देना नहीं, बल्कि भीख पर निर्भर परिवारों का स्थायी पुनर्वास करना है। बाकी बच्चों के दस्तावेज पूरे करने और उन्हें औपचारिक शिक्षा से जोड़ने की प्रक्रिया भी तेज़ी से जारी है।
आगे का सपना: दिल्ली की परेड
इन बच्चों का प्रतिनिधित्व यहीं नहीं रुकेगा। चयनित बच्चे इस वर्ष लखनऊ की परेड में संभल का नाम रोशन करेंगे, और अगले साल नई दिल्ली में होने वाली राष्ट्रीय गणतंत्र दिवस परेड के लिए भी उन पर विचार किया जा सकता है। यह सिर्फ खबर नहीं, उम्मीद की कहानी है—जहां भीख मांगने वाले बच्चे अब देशभक्ति की धुनों के साथ कदमताल करेंगे। यह साबित करता है कि सही मार्गदर्शन, संवेदना और अवसर मिले तो हर बच्चा अपने हालात बदल सकता है।
ये भी पढ़े….न्यूजीलैंड से सीरीज हार के बाद गौतम गंभीर पर ‘हाय‑हाय’ के नारे?







