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Uttar Pradesh: शाहजहांपुर में जूता मार होली से पहले ढकी गईं मस्जिद मज़ारें, क्यों भड़क उठे मुस्लिम

Uttar Pradesh: शाहजहांपुर में जूता मार होली से पहले ढकी गईं मस्जिद मज़ारें क्यों भड़क उठे मुस्लिम

Uttar Pradesh: प्रदेश के शाहजहांपुर में होली से पहले तैयारियां तेज हो गई हैं। हर साल की तरह इस बार भी यहां की चर्चित और अनोखी परंपरा ‘जूता मार होली’ आयोजित होने वाली है, लेकिन उससे पहले प्रशासन द्वारा उठाए गए कुछ एहतियाती कदम चर्चा का विषय बन गए हैं। शहर में निकलने वाले पारंपरिक जुलूस के मार्ग पर पड़ने वाले कई धार्मिक स्थलों को अस्थायी रूप से ढकने की तैयारी की जा रही है, ताकि रंग और भीड़ के कारण किसी तरह की असुविधा या तनाव की स्थिति न बने।

क्या है ‘जूता मार होली’ की परंपरा

शाहजहांपुर में होली के मौके पर एक विशेष जुलूस निकाला जाता है, जिसे स्थानीय लोग ‘जूता मार होली’ के नाम से जानते हैं। इस जुलूस में ‘लाट साहब’ नाम का एक पात्र पारंपरिक ढंग से सजाकर शहर में घुमाया जाता है। हजारों की संख्या में लोग इसमें शामिल होते हैं और उत्सव का माहौल बनता है। यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है और इसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से भी लोग पहुंचते हैं।प्रशासन का कहना है कि इस आयोजन में भारी भीड़ और रंगों का इस्तेमाल होता है, इसलिए सुरक्षा और व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए इस बार अतिरिक्त इंतजाम किए गए हैं।

Uttar Pradesh: प्रशासन की तैयारी और सुरक्षा व्यवस्था

जिले के अधिकारियों के अनुसार, जुलूस के रास्ते में आने वाले कई धार्मिक स्थलों मस्जिदों और मजारों को एहतियातन तिरपाल से ढकने की योजना बनाई गई है। उद्देश्य यह है कि रंग या भीड़ के कारण किसी भी धार्मिक स्थल पर अनजाने में रंग न पड़े और माहौल शांतिपूर्ण बना रहे।इसके साथ ही शहर में अतिरिक्त पुलिस बल, पीएसी और अन्य सुरक्षा एजेंसियों की तैनाती की जा रही है। प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी बढ़ाई जाएगी और ड्रोन के जरिए भी नजर रखी जाएगी।अधिकारियों का कहना है कि शांति और भाईचारा बनाए रखने के लिए सभी समुदायों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें की गई हैं और सभी से सहयोग की अपील की गई है।

Uttar Pradesh: कुछ संगठनों की नाराजगी

हालांकि प्रशासन के इस कदम पर कुछ स्थानीय संगठनों और समुदाय के लोगों ने आपत्ति भी जताई है। उनका कहना है कि धार्मिक स्थलों को ढकना आवश्यक नहीं है और इससे भावनाएं आहत हो सकती हैं। कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सुरक्षा बल पहले से तैनात रहते हैं, ऐसे में इस तरह के कदम पर पुनर्विचार होना चाहिए।प्रशासन का पक्ष है कि यह व्यवस्था किसी एक समुदाय के लिए नहीं बल्कि शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए की जा रही है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि सभी पक्षों से संवाद जारी है और हर निर्णय में सामंजस्य बनाए रखने की कोशिश की जा रही है।

शांति से त्योहार मनाने पर जोर

जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि इस बार भी होली और जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए विशेष निगरानी रखी जाएगी। शहर को अलग-अलग जोन में बांटकर मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है।अधिकारियों का कहना है कि यह परंपरा शहर की पहचान है और इसे सौहार्दपूर्ण माहौल में आयोजित कराना ही प्रशासन की प्राथमिकता है।बताया जा रहा है कि प्रशासन और विभिन्न धार्मिक संगठनों के बीच लगातार बातचीत चल रही है, ताकि सभी पक्षों की सहमति से समाधान निकाला जा सके। अधिकारियों का मानना है कि आपसी संवाद और सहयोग से ही त्योहारों का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है।शाहजहांपुर की प्रसिद्ध ‘जूता मार होली’ इस बार भी उत्साह के साथ आयोजित होने की तैयारी में है, लेकिन सुरक्षा और संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन ने कुछ अतिरिक्त कदम उठाए हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संवाद और सहयोग के जरिए त्योहार को शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में कैसे संपन्न कराया जाता है।

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