Vijayadashami Greetings: विजयादशमी के इस पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी देशवासियों के मंगलमय भविष्य और उन्नति की कामना की है। उन्होंने X (ट्विटर) पर प्रभु श्रीराम, मां जानकी और बजरंगबली के चरणों में प्रणाम किया है।
Vijayadashami Greetings: पीएम मोदी ने कहा- “आज भारत का कोना-कोना राममय है”-
विजयादशमी के इस पावन पर्व पर मैं प्रभु श्रीराम, माँ जानकी और बजरंगबली के चरणों में प्रणाम करता हूँ।
इस पवित्र वातावरण में मैं सभी देशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ।
आज भारत का कोना-कोना राममय है।
देशभर में रामलीलाओं का मंचन, प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवंत रखने की परंपरा, अत्याचार और आतंक के अंत का उद्घोष… और असत्य पर सत्य सनातन की विजय का विश्वास… हमारे लिए ये केवल त्योहार नहीं है, ये भारत की प्राण ऊर्जा है।
– पीएम @narendramodi
— BJP (@BJP4India) October 20, 2026
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज भारत का कोना-कोना राममय है। उन्होंने आगे कहा कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक विजयादशमी का यह पावन अवसर प्रभु श्रीराम के आदर्शों को जीवन में उतारने की प्रेरणा देता है। यह हमारे लिए केवल त्योहार नहीं है, बल्कि भारत की ऊर्जा है।
Vijayadashami Greetings: विजयादशमी की शुरुआत कहां से हुई-
विजयादशमी को दशहरा भी कहा जाता है। इस त्योहार की शुरुआत किसी एक स्थान या निश्चित ऐतिहासिक वर्ष से हुई थी, इसका स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध नहीं है। इसकी परंपराएँ प्राचीन भारतीय धार्मिक मान्यताओं, रामायण और देवी दुर्गा से जुड़ी कथाओं में निहित हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम ने आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को रावण का वध किया था। रावण पर श्रीराम की विजय को बुराई पर अच्छाई की जीत के रूप में मनाया जाता है। इसी कारण इस दिन रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन करने की परंपरा प्रचलित हुई। वहीं, देश के कई हिस्सों में विजयादशमी का संबंध देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से भी है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, देवी दुर्गा ने नौ दिनों तक चले युद्ध के बाद दसवें दिन महिषासुर का वध किया था। इसी वजह से यह दिन शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक माना जाता है।
विजयादशमी क्यों मनाई जाती है-
विजयादशमी मनाने के पीछे मुख्य संदेश यह है कि अंततः सत्य और धर्म की जीत होती है। भगवान श्रीराम की विजय की कथा लोगों को अहंकार, अन्याय और बुराई का त्याग करने की प्रेरणा देती है। वहीं, देवी दुर्गा की विजय शक्ति और साहस के महत्व को दर्शाती है। भारत के अलग-अलग राज्यों में इस त्योहार को विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है। उत्तर भारत में रामलीला और रावण दहन प्रमुख आकर्षण होते हैं, जबकि पश्चिम बंगाल में दुर्गा पूजा के समापन पर विजयादशमी मनाई जाती है। कर्नाटक के मैसूर में दशहरा अपने भव्य जुलूसों और ऐतिहासिक उत्सव के लिए प्रसिद्ध है।
कितने साल पुराना है विजयादशमी का त्योहार-
विजयादशमी की शुरुआत का कोई प्रमाणित ऐतिहासिक वर्ष उपलब्ध नहीं है। इसलिए यह निश्चित रूप से बताना संभव नहीं है कि इस त्योहार को पहली बार कब मनाया गया था या इसे शुरू हुए कितने वर्ष हो चुके हैं। हालांकि, इसकी धार्मिक परंपराएँ प्राचीन भारतीय महाकाव्यों और सांस्कृतिक मान्यताओं से जुड़ी हैं। रामायण की कथा और देवी दुर्गा की महिषासुर पर विजय से संबंधित मान्यताओं के कारण यह पर्व हजारों वर्षों की सांस्कृतिक परंपरा से जुड़ा माना जाता है। इसकी ऐतिहासिक शुरुआत और वर्तमान स्वरूप के विकास को एक ही समय से जोड़ना उचित नहीं होगा। आज भी विजयादशमी पूरे देश में उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाई जाती है। यह त्योहार लोगों को बुराई का त्याग करने, सत्य का साथ देने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने का संदेश देता है।
यह भी पढ़े- ‘दिवाली तक कोई प्रदर्शन नहीं’, CJP कार्यकर्ताओं को अभिजीत दीपके का संदेश








