Vikramotsav Varanasi: मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थापित महाकाल की नगरी से जुड़ी प्रसिद्ध विक्रमादित्य वैदिक घड़ी अब काशी पहुंचने वाली है। राज्य के मुख्यमंत्री मोहन यादव शुक्रवार को वाराणसी जाएंगे। वहां वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मौजूदगी में इस विशेष वैदिक घड़ी को सबसे पहले बाबा विश्वनाथ को समर्पित करेंगे।

भारत की पहली वैदिक समय गणना पर आधारित घड़ी
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भारत की पहली ऐसी घड़ी है जो वैदिक काल की समय गणना पद्धति पर आधारित है। इसका उद्घाटन वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था। यह घड़ी सूर्योदय के आधार पर समय बताती है और पंचांग से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां भी प्रदान करती है। इसके माध्यम से वैदिक समय, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति, चंद्रमा की अवस्था और विक्रम संवत से संबंधित जानकारी एक साथ देखी जा सकती है।
भारतीय काल गणना की परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास
भारतीय समय गणना की प्राचीन परंपरा को फिर से जीवित करने के उद्देश्य से इस घड़ी को वाराणसी लाया जा रहा है। सबसे पहले इसे बाबा विश्वनाथ को समर्पित किया जाएगा। इस घड़ी की खास बात केवल इसकी पारंपरिक गणना प्रणाली ही नहीं है, बल्कि इसे डिजिटल रूप में भी विकसित किया गया है।

Vikramotsav Varanasi: सम्राट विक्रमादित्य महानाट्य का भव्य आयोजन
वाराणसी दौरे के बारे में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि भारतीय संस्कृति, शौर्य, नीति और न्याय की अमर कहानियों को दर्शाने वाला भव्य महानाट्य “सम्राट विक्रमादित्य” काशी की पवित्र धरती पर प्रस्तुत किया जाएगा। बाबा विश्वनाथ की नगरी इस गौरवशाली आयोजन की साक्षी बनेगी।
3 से 5 अप्रैल तक होगा ऐतिहासिक मंचन
मुख्यमंत्री मोहन यादव और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मिलकर वाराणसी के बीएलडब्ल्यू परिसर में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित इस महानाट्य का शुभारंभ करेंगे। यह कार्यक्रम 3 से 5 अप्रैल तक आयोजित किया जाएगा। इस महानाट्य का उद्देश्य लोगों को देश के गौरवशाली इतिहास, विक्रम संवत की वैज्ञानिकता और उस समय के महत्वपूर्ण योगदान से परिचित कराना है।

Vikramotsav Varanasi: 175 से अधिक कलाकार दिखाएंगे अपनी प्रतिभा
मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सरकार के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में “सम्राट विक्रमादित्य” महानाट्य का ऐतिहासिक मंचन होगा। कार्यक्रम स्थल पर कई ज्ञानवर्धक प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी। इस महानाट्य की प्रस्तुति लगभग 1 घंटा 45 मिनट की होगी, जिसमें मंच पर 175 से अधिक कलाकार और सहयोगी अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे।
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