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अरुणाचल की वान्चो जनजाति की अनोखी परंपरा, डेढ़ महीने तक पहाड़ी पर रखी जाती है लाश, फिर सिर अलग कर होता है अंतिम संस्कार

हैरान कर देगी वान्चो जनजाति की अंतिम संस्कार परंपरा

Wancho Tribe Traditions: अरुणाचल प्रदेश की पटकाई पहाड़ियों में रहने वाला वांचो समुदाय अपनी अनोखी परंपराओं और मान्यताओं के लिए जाना जाता है। यहां जीवन और मृत्यु से जुड़ी कई ऐसी रस्में हैं जो बाकी दुनिया से बिल्कुल अलग हैं। इन पहाड़ियों में आज भी सदियों पुरानी परंपराएं जीवित हैं और लोग उन्हें पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

वान्चो जनजाति में क्यों पहाड़ी पर छोड़ी जाती है लाश

सुबह करीब आठ बजे का समय था। एक पहाड़ी पर एक बुजुर्ग व्यक्ति की लाश पड़ी हुई थी। समय बीतने के कारण उसका शरीर पूरी तरह काला पड़ चुका था। लाश के पास करीब 24-25 साल का एक युवक घुटनों के बल बैठा रो रहा था।कुछ देर बाद वहां कुछ महिलाएं पहुंचीं। वे लाश के पास बैठ गईं और एक खास पेड़ के पत्तों से मृतक का चेहरा साफ करने लगीं। तभी उनमें से एक महिला ने दूर खड़े एक बुजुर्ग को इशारा किया।

हैरान कर देगी वान्चो जनजाति की अंतिम संस्कार परंपरा
हैरान कर देगी वान्चो जनजाति की अंतिम संस्कार परंपरा

बुजुर्ग ने उस युवक की ओर एक छोटी लेकिन तेज धार वाली तलवार बढ़ाई। युवक ने कांपते हाथों से तलवार पकड़ी और धीरे-धीरे लाश का गला काटने लगा। कुछ ही देर में सिर धड़ से अलग हो गया। यह लाश उसी युवक के पिता की थी, जो करीब डेढ़ महीने से उस पहाड़ी पर पड़ी हुई थी। अब बेटा अपने पिता का अंतिम संस्कार कर रहा था।

मिट्टी के बर्तन में रखा जाता है सिर

सिर अलग होने के बाद दो लोग मिट्टी के मटके जैसे बर्तन लेकर आए। उन्होंने कटे हुए सिर को हाथ में उठाकर ध्यान से देखा, जैसे उसका आकार माप रहे हों। फिर मिट्टी के बर्तन को सावधानी से पत्थर से तोड़ा गया ताकि उसमें सिर ठीक से समा सके।इसके बाद सिर को उस बर्तन में रखकर युवक को दे दिया गया, जबकि धड़ उसी जगह पड़ा रहा। सभी लोग सिर को लेकर पहाड़ी के दूसरे हिस्से की ओर चल पड़े।

वहां कई छोटे-छोटे मिट्टी के चबूतरे बने हुए थे और उन पर ऐसे ही मटके रखे थे। युवक एक खाली चबूतरे तक गया और वहां मटका रख दिया। फिर उसके ऊपर एक पत्थर रख दिया गया।भीड़ में से एक व्यक्ति शराब की बोतल और खाना लेकर आया और युवक को दिया। युवक ने कुछ शब्द बुदबुदाते हुए वह शराब और खाना उसी चबूतरे पर चढ़ा दिया। इसके बाद सभी लोग गांव लौट गए, जबकि बिना सिर वाली लाश पहाड़ी पर ही पड़ी रही।

हैरान कर देगी वान्चो जनजाति की अंतिम संस्कार परंपरा
हैरान कर देगी वान्चो जनजाति की अंतिम संस्कार परंपरा

Wancho Tribe Traditions: प्राकृतिक मौत पर ही होती है यह रस्म

वांचो समुदाय में अगर किसी व्यक्ति की प्राकृतिक मौत होती है तो उसकी लाश को करीब डेढ़ महीने तक पहाड़ी पर ही छोड़ दिया जाता है। इस दौरान लोग बारी-बारी से उसकी रखवाली करते हैं ताकि कोई जंगली जानवर उसे खा न सके।

इसके बाद सिर अलग करके इस तरह अंतिम संस्कार किया जाता है। लेकिन अगर किसी की मौत दुर्घटना या हत्या से होती है, तो लाश को पहाड़ी पर ही छोड़ दिया जाता है और जंगली जानवर उसे खा जाते हैं।

इस समुदाय का मानना है कि आत्मा सिर में रहती है। इसलिए सिर को सुरक्षित रखा जाता है ताकि पूर्वजों की आत्मा का स्मरण बना रहे। वहीं अप्राकृतिक मौत होने पर माना जाता है कि आत्मा उसी समय शरीर छोड़ देती है।

पटकाई पहाड़ियों में बसता है वांचो समुदाय

वांचो समुदाय में इन रस्मों के लिए अलग-अलग नाम हैं। जिस तलवार से लाश का गला काटा जाता है उसे चंग कहा जाता है। जहां लाश का धड़ पड़ा रहता है उसे जुकथो कहते हैं। वहीं जिस जगह मिट्टी का चबूतरा बनाकर सिर रखा जाता है उसे जालो कहा जाता है।

वांचो लोग अरुणाचल प्रदेश की पटकाई पहाड़ियों में रहते हैं। यह इलाका लोंगडिंग जिले में आता है और गुवाहाटी से करीब 350 किलोमीटर दूर है। इस समुदाय के बारे में जानने के लिए मैं इन पहाड़ियों तक पहुंची थी। मेरे साथ लोंगडिंग के एंथ्रोपोलॉजिस्ट नोट्टोई वांगसाहम भी थे, जो इस समुदाय के बारे में अच्छी जानकारी रखते हैं।

दोपहर के करीब 12 बजे हम पहाड़ी से पैदल गांव की ओर जा रहे थे। रास्ते में नोट्टोई ने बताया कि वांचो समाज में आज भी राजा का शासन चलता है और गांव में प्रवेश करने से पहले राजा से अनुमति लेना जरूरी होता है।

राजा की मौत के बाद रानी संभाल रही हैं शासन

जब मैंने पूछा कि यहां का राजा कौन है, तो नोट्टोई ने बताया कि पहले यहां जितवंग वाहम राजा थे, लेकिन चार साल पहले उनकी मौत हो गई। अब उनकी पत्नी ही शासन संभाल रही हैं और लोग उनके बेटे को भी भविष्य का राजा मानने लगे हैं।

करीब पांच किलोमीटर पैदल चलने के बाद हमें बांस से बने घर दिखाई देने लगे। कुछ घरों की छत टीन की थी, जबकि कई घरों की छत स्थानीय पेड़ टोको लीफ से बनी हुई थी। एक बड़ा घर ऐसा था जो आधा सीमेंट और आधा बांस से बना था। नोट्टोई ने बताया कि यही रानी का घर है।

हैरान कर देगी वान्चो जनजाति की अंतिम संस्कार परंपरा
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रानी के घर की दीवारों पर टंगी हैं जानवरों की खाल

घर के अंदर जाने पर दीवारों पर कई जानवरों की खाल और खोपड़ियां टंगी हुई थीं। नोट्टोई ने बताया कि पहले वांचो लोग जंगलों में शिकार करते थे और ये खाल उन्हीं शिकार किए गए जानवरों की हैं।

पहले के समय में वांचो योद्धा अपने दुश्मनों के सिर, हाथ और पैर काटकर भी लाते थे। हर बस्ती में एक जगह होती थी जिसे साउतुंग कहा जाता था। वहां दुश्मनों के कटे हुए सिर सजाकर रखे जाते थे और साल में एक बार उन्हें शराब और भोजन चढ़ाकर पूजा की जाती थी। अब कई लोग ईसाई धर्म को मानने लगे हैं, इसलिए यह परंपरा धीरे-धीरे खत्म हो गई।

पारंपरिक पोशाक ‘नीथो’ पहनती हैं रानी

कुछ देर बाद रानी सेंगम वांग्चा वांचो कमरे में आईं। उन्होंने सफेद कुर्ती और नीले रंग की लंबी स्कर्ट जैसी पारंपरिक पोशाक पहन रखी थी। गले में चांदी के सिक्कों की माला और माथे पर रंग-बिरंगे मोतियों की पट्टी थी। उन्होंने बताया कि उनकी इस पारंपरिक स्कर्ट को नीथो कहा जाता है।

दीवार पर टंगे जंगली सुअर के सिर के बारे में पूछने पर रानी ने बताया कि अगर बस्ती में कोई जंगली सुअर का शिकार करता है तो उसका सिर और रीढ़ की हड्डी के पास का मांस राजा के घर भेजना जरूरी होता है।बाकी जानवरों के मामले में केवल सिर भेजना होता है। अगर कोई ऐसा नहीं करता तो उसे बस्ती से निकाल भी दिया जाता है।

हैरान कर देगी वान्चो जनजाति की अंतिम संस्कार परंपरा
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Wancho Tribe Traditions: टैटू से पता चलती है महिलाओं की उम्र

गांव में एल जेवंग वांगसु और उनकी पत्नी मंगखाऊ वांगसु से मुलाकात हुई। मंगखाऊ ने बताया कि वांचो महिलाओं के शरीर पर बने टैटू उनकी उम्र और जीवन के अलग-अलग चरणों को दर्शाते हैं।

जब कोई लड़की किशोरावस्था में पहुंचती है तो उसकी नाभि के पास टैटू बनाया जाता है। पैर के निचले हिस्से का टैटू यह बताता है कि वह रजस्वला हो चुकी है। जांघ पर टैटू का मतलब है कि वह अब जीवनसाथी चुन सकती है, जबकि छाती पर बना टैटू यह दर्शाता है कि वह शादीशुदा है।

झुमका देकर किया जाता है शादी का प्रस्ताव

इस समुदाय में अधिकतर शादियां प्रेम विवाह होती हैं। जब किसी लड़की को कोई लड़का पसंद आता है तो वह उसे एक खास झुमका देती है जिसे माएपो कहा जाता है। इसे विवाह का प्रस्ताव माना जाता है।इसके बाद लड़के वाले लड़की के घर जाकर पान, तंबाकू और पेड़ की छाल से बने पदार्थ देते हैं। फिर लड़का और लड़की एक-दूसरे को माला पहनाते हैं। इस रस्म को हिंगहो एलाई कहा जाता है।

गर्भवती होने पर मिलती है बहू की मान्यता

रिश्ता तय होने के बाद दोनों परिवारों में कई रस्में होती हैं। जब लड़की गर्भवती हो जाती है तो तीसरे महीने उसे लड़के के घर ले जाया जाता है। वहां खोकम नाम की रस्म होती है, जिसमें उसके सीने के बीच खाहू नाम का टैटू बनाया जाता है।इसके बाद पूजा होती है और पुजारी घोषणा करता है कि अब यह लड़की उस परिवार की बहू बन गई है।

खेती और शिकार पर आधारित है जीवन

वांचो समुदाय की मुख्य आजीविका खेती है। वे धान के अलावा कई तरह के मिलेट की खेती करते हैं, जैसे मीखा, कामई, पोलोम, कच्चू, मनसा, जोक, विक्वप, विकुअत, बाह और शिनेई।गांव में केवल प्राथमिक स्कूल है। आगे की पढ़ाई के लिए बच्चों को लोंगडिंग जाना पड़ता है। इस समुदाय के कई युवा सरकारी नौकरियों में हैं और कई सेना में भी काम कर रहे हैं।

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