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संसद में मुस्लिम महिलाओं के आरक्षण को लेकर शाह से भिड़े अखिलेश, पलटवार कर बोले- ‘आप टिकट दो…’

लोकसभा में अखिलेश यादव और अमित शाह

Womens Reservation Bill: संसद के तीन दिवसीय विशेष सत्र के पहले दिन आज गुरुवार को केंद्र सरकार ने महिला आरक्षण से जुड़े तीन महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश कर दिए। जैसे ही विधेयक सदन में रखे गए, वैसे ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस शुरू हो गई। कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, DMK, CPI-M और AIMIM समेत कई विपक्षी दलों ने इन विधेयकों का विरोध किया, जबकि प्रस्ताव के समर्थन में मतदान के बाद सदन में विस्तृत चर्चा जारी रही।

33 प्रतिशत आरक्षण देने का प्रावधान

कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करने का प्रस्ताव रखा। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 को सदन में रखने का प्रस्ताव दिया। साथ ही परिसीमन विधेयक, 2026 भी लोकसभा में पेश किया गया। इन सभी विधेयकों के जरिए लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई (33 प्रतिशत) आरक्षण देने का प्रावधान किया जा रहा है।

Womens Reservation Bill: पक्ष और विपक्ष के बीच नोकझोंक

विपक्षी दलों ने विधेयकों को पेश किए जाने की प्रक्रिया पर आपत्ति जताई। कांग्रेस सांसद के.सी. वेणुगोपाल के विरोध पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष विधेयकों की मेरिट पर चर्चा करने के बजाय केवल तकनीकी आपत्तियां उठा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है और चर्चा के लिए पर्याप्त समय दिया गया है। लोकसभा में मत विभाजन के दौरान विधेयक पेश करने के पक्ष में 207 सांसदों ने वोट किया, जबकि 126 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। इसके बाद विधेयक सदन में चर्चा के लिए आगे बढ़े, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार तीखी नोकझोंक देखने को मिली।

क्या मुस्लिम महिलाएं भी आरक्षण का हिस्सा?

चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार पूरी तरह से चर्चा और जवाब देने के लिए तैयार है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि इन विधेयकों पर कुल 12 घंटे की चर्चा तय की गई है और मतदान कल शाम 4 बजे कराया जाएगा। जबकि सदन में चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण का समर्थन करते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा महिलाओं के सशक्तिकरण के पक्ष में रही है, लेकिन उन्होंने सरकार की मंशा और प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि क्या मुस्लिम महिलाएं भी इस आरक्षण का हिस्सा होंगी। उन्होंने यह भी कहा कि महिला आरक्षण को लेकर सरकार को किसी तरह की देरी नहीं करनी चाहिए।

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर प्रक्रिया को जटिल बना रही है और इसे परिसीमन से जोड़कर इसके लागू होने में देरी की जा रही है। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने पहले सही निर्णय लिया होता, तो यह कानून पहले ही लागू हो चुका होता। वहीं भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने इसे ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में वर्षों से लंबित महिला आरक्षण बिल को आगे बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि यह निर्णय संसद में महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाने और लोकतंत्र को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है।

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