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चंद्रशेखर ने योगी को बिजनौर से चुनाव लड़ने की चुनौती क्यों दी? इस सीट में ऐसा क्या है खास?

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Yogi: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। नगीना से सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने योगी को बिजनौर जिले की किसी भी विधानसभा सीट से उनके सामने चुनाव लड़ने की चुनौती दी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि वह योगी को हराने में सफल नहीं हुए तो राजनीति छोड़ देंगे। इस बयान के साथ उन्होंने बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग भी उठाई। सवाल है कि चंद्रशेखर ने बिजनौर को ही चुनौती का केंद्र क्यों बनाया और इस जिले का पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में क्या महत्व है?

चंद्रशेखर ने योगी को क्या चुनौती दी?

अमरोहा जिले के हसनपुर में एक जनसभा को संबोधित करते हुए चंद्रशेखर आजाद ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बिजनौर की आठ विधानसभा सीटों में से किसी एक पर उनके खिलाफ चुनाव लड़ने की चुनौती दी। उन्होंने अपने भाषण में 2022 के विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया, जब उन्होंने योगी के गोरखपुर शहर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा था और हार गए थे। चंद्रशेखर ने इस बार बिजनौर में मुकाबले की बात कही और चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग उठाई। यह बयान 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी नेताओं और सत्तारूढ़ दल के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा है।

Yogi: बिजनौर जिले में कितनी विधानसभा सीटें हैं?

बिजनौर जिले में कुल आठ विधानसभा क्षेत्र हैं—बिजनौर, चांदपुर, नगीना, नजीबाबाद, धामपुर, नूरपुर, नहटौर और बढ़ापुर। इनमें नगीना और नहटौर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं। जिले की संसदीय सीमाएं बिजनौर, नगीना और मुरादाबाद लोकसभा क्षेत्रों से जुड़ती हैं। इस कारण जिले के अलग-अलग हिस्सों में राजनीतिक और सामाजिक समीकरणों की भूमिका महत्वपूर्ण रहती है। चंद्रशेखर ने अपनी चुनौती किसी एक विधानसभा क्षेत्र तक सीमित नहीं रखी, बल्कि योगी को जिले की किसी भी सीट से मुकाबला करने की बात कही। <Cite refs={[“turn506139search0”]}/>

नगीना की जीत से चंद्रशेखर को मिली राजनीतिक पहचान

बिजनौर जिले की राजनीति में चंद्रशेखर आजाद की पहचान का एक प्रमुख आधार नगीना लोकसभा सीट है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के टिकट पर नगीना से जीत दर्ज की थी। उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार ओम कुमार को लगभग 1.51 लाख वोटों के अंतर से हराया था। नगीना लोकसभा क्षेत्र में दलित और मुस्लिम मतदाताओं की उल्लेखनीय मौजूदगी है। इस जीत के बाद चंद्रशेखर राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा में आए। <Cite refs={[“turn506139search1″,”turn506139search2”]}/>

Yogi: बिजनौर की राजनीति में सामाजिक समीकरण क्यों अहम हैं?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में दलित, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग सहित विभिन्न सामाजिक समूहों की महत्वपूर्ण मौजूदगी है। यहां चुनावी राजनीति में जातीय समीकरण, स्थानीय नेतृत्व, किसानों के मुद्दे और विकास जैसे विषय भूमिका निभाते हैं। नगीना लोकसभा क्षेत्र का चुनावी इतिहास भी इस क्षेत्र में अलग-अलग दलों और नेताओं के बीच प्रतिस्पर्धा को दिखाता है। हालांकि, किसी एक सामाजिक समूह के आधार पर पूरे जिले के मतदाताओं की राजनीतिक पसंद तय नहीं की जा सकती। चंद्रशेखर की चुनौती को इसी क्षेत्रीय राजनीतिक संदर्भ में देखा जा सकता है।

Yogi: बैलेट पेपर की मांग और 2027 का चुनावी संदर्भ

चंद्रशेखर आजाद ने योगी आदित्यनाथ को चुनौती देने के साथ चुनाव बैलेट पेपर से कराने की मांग भी उठाई। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे का मुद्दा उठाते हुए चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपनी बात रखी। यह उनका राजनीतिक वक्तव्य है; बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग और चुनाव प्रक्रिया पर लगाए गए आरोपों को स्थापित तथ्य से अलग समझना जरूरी है। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले विभिन्न दल अपनी राजनीतिक मांगों और रणनीतियों को सार्वजनिक कर रहे हैं। चंद्रशेखर की बिजनौर वाली चुनौती भी इसी चुनावी माहौल में सामने आई है। फिलहाल यह बयानबाजी है; योगी आदित्यनाथ की ओर से बिजनौर की किसी सीट से चुनाव लड़ने की सहमति की पुष्टि नहीं हुई है।

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