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वंदे मातरम के 150 वर्ष: अमेरिका के ह्यूस्टन में संगीत और संस्कृति के साथ भव्य आयोजन

ह्यूस्टन में राष्ट्रीय गीत के 150 वर्ष पर भव्य कार्यक्रम
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Vande Mataram: अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया। यह गीत महान साहित्यकार बंकिमचंद्र चटर्जी द्वारा लिखा गया था और भारत के स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान लोगों में देशभक्ति की भावना जगाने में इसकी अहम भूमिका रही है।

800 लोगों संग भव्य सांस्कृतिक संध्या

इस सांस्कृतिक संध्या का आयोजन ह्यूस्टन के भारतीय शास्त्रीय संगीत केंद्र (CICMH), वल्लभ प्रीति सेवा समाज (VPSS) और कई इंडो-अमेरिकी सांस्कृतिक संगठनों के सहयोग से किया गया। कार्यक्रम में भारतीय मूल के लोगों के साथ-साथ भारत के मित्रों सहित 800 से अधिक लोग शामिल हुए।

कार्यक्रम की शुरुआत मोरया ढोल ताशा पाथक की जोशीली प्रस्तुति से हुई। उनके ढोल-ताशे की ताल ने पूरे माहौल को ऊर्जा से भर दिया और शाम की शुरुआत को बेहद उत्साहपूर्ण बना दिया।

Vande Mataram: वीणा वादन से सजी संगीत शुरुआत

औपचारिक संगीत कार्यक्रम की शुरुआत मेट्रोप्लेक्स तमिल संघम के कलाकारों द्वारा वीणा वादन से हुई। इस प्रस्तुति ने वातावरण को भक्तिमय बना दिया और भारतीय शास्त्रीय संगीत की समृद्ध परंपरा को दर्शाया।

इसके बाद राजराजेश्वरी भट्ट की एक शिष्या ने कर्नाटक शास्त्रीय संगीत शैली में “वंदे मातरम” प्रस्तुत किया। इस प्रस्तुति में दक्षिण भारतीय शास्त्रीय संगीत की सुंदर झलक दिखाई दी।

सावरकर की कविता से गूंजा मंच

सुमन घोष के विद्यार्थियों ने मराठी देशभक्ति गीत गाए। उनकी प्रस्तुति में प्रसिद्ध देशभक्ति कविता “सागर प्राण तलमला” भी शामिल थी, जिसे स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर ने लिखा था।

इसके बाद कार्यक्रम बंगाल की संगीत परंपरा की ओर बढ़ा। ह्यूस्टन की टैगोर सोसायटी के कलाकारों ने ऐसी प्रस्तुतियां दीं, जिनमें बंगाल की साहित्यिक और संगीत विरासत दिखाई दी। यह वही क्षेत्र है जहां से “वंदे मातरम” की रचना हुई थी।

देशभक्ति सुरों संग कार्यक्रम समापन

कार्यक्रम का समापन भारतीय शास्त्रीय संगीत केंद्र (CICMH) के कलाकारों की हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत प्रस्तुति से हुआ। यह प्रस्तुति पंडित सुमन घोष के मार्गदर्शन में हुई। कार्यक्रम के अंत में राग देश में “वंदे मातरम” गाया गया, जिसने पूरे माहौल को देशभक्ति से भर दिया।

पूरे कार्यक्रम का संचालन शशिकला घोष ने किया। उन्होंने अपनी टिप्पणी और जानकारी के माध्यम से अलग-अलग प्रस्तुतियों को जोड़ते हुए दर्शकों को भारत की विभिन्न संगीत परंपराओं से परिचित कराया।

मंजूनाथ ने बताया वंदे मातरम महत्व

अपने उद्घाटन भाषण में डीसी मंजूनाथ ने कार्यक्रम में शामिल सभी संगठनों, कलाकारों, स्वयंसेवकों और सामुदायिक नेताओं का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि “वंदे मातरम” ने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में लोगों को एकजुट करने और मातृभूमि के प्रति प्रेम की भावना जगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

कार्यक्रम स्थल पर “वंदे मातरम” से जुड़ी एक विशेष प्रदर्शनी भी लगाई गई थी। इस प्रदर्शनी में इस गीत के इतिहास और भारत की राष्ट्रीय चेतना में इसके महत्व को दर्शाया गया।

प्रवासियों से संवाद, आयोजकों का आभार

इसके अलावा भारतीय वाणिज्य दूतावास ने वहां एक काउंसलर सूचना डेस्क भी स्थापित किया था। यहां अधिकारियों ने लोगों को विभिन्न काउंसलर सेवाओं की जानकारी दी और भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों से बातचीत भी की।

कार्यक्रम के अंत में भारतीय वाणिज्य दूतावास ने इस आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी आयोजकों, सहयोगी संस्थाओं और कलाकारों का आभार व्यक्त किया।

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