Neville Roy Singham: अमेरिकी टेक कारोबारी नेविल रॉय सिंघम इन दिनों भारत में सत्ता परिवर्तन की कथित कोशिशों को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में विपक्ष के नेता राहुल गांधी, सिंघम, क्रिप्टोकरेंसी, बिटकॉइन और ऑनलाइन जुए से जुड़े लोगों के बीच कथित संबंधों पर सवाल उठाए। उन्होंने इन गतिविधियों को एक बड़े राजनीतिक नेटवर्क से जोड़ने की बात कही। भारत में सत्ता परिवर्तन की कोशिशों से जुड़े आरोपों के बाद सिंघम का नाम चर्चा में आया है।इस मामले ने उस समय राजनीतिक विवाद का रूप ले लिया, जब बीजेपी ने कांग्रेस और विपक्षी नेताओं पर आरोप लगाया कि वे लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों और अंतरराष्ट्रीय कार्यकर्ता संगठनों से कथित संबंधों के जरिए मोदी सरकार को अस्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं।
बीजेपी ने फॉक्स न्यूज की एक रिपोर्ट का भी हवाला दिया। इस रिपोर्ट में फ्रांस में हुए दंगों और दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के खिलाफ हुए विरोध-प्रदर्शनों के बीच कथित संबंध होने की बात कही गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, जांच के दौरान 13 देशों में ऐसे 101 संगठनों की पहचान की गई, जो कथित तौर पर विरोध-प्रदर्शनों के बीच तालमेल बनाने, उन्हें आयोजित करने या उनके प्रचार-प्रसार में भूमिका निभा रहे थे। आइए जानते हैं कि नेविल रॉय सिंघम कौन हैं और उनका नाम इस विवाद में कैसे आया।
Neville Roy Singham: नेविल रॉय सिंघम कौन हैं?
सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के अनुसार, नेविल रॉय सिंघम न्यूयॉर्क स्थित गैर-लाभकारी संगठन ‘पीपल्स फोरम’ को आर्थिक सहायता देने वाले प्रमुख लोगों में शामिल हैं। यह संगठन वामपंथी विचारधारा से जुड़ा है और मजदूर वर्ग तथा समाज के हाशिए पर रहने वाले अन्य समूहों के मुद्दों पर काम करता है।सिंघम आईटी सलाहकार कंपनी ‘थॉटवर्क्स’ के संस्थापक भी हैं। उनकी पत्नी जोडी इवांस युद्ध-विरोधी संगठन ‘कोड पिंक’ की सह-संस्थापक हैं। सिंघम के माता-पिता श्रीलंका से आए प्रवासी थे।रिपोर्ट्स के मुताबिक, साल 2017 में सिंघम ने अपनी कंपनी थॉटवर्क्स को एक निजी निवेश कंपनी को लगभग 785 मिलियन डॉलर में बेच दिया था। इस सौदे से उन्हें बड़ी संपत्ति हासिल हुई और वे वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र के धनी कारोबारियों में शामिल हो गए।इसके बाद उन्होंने अपना कामकाज चीन के शंघाई शहर में स्थानांतरित कर लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने गैर-लाभकारी संगठनों और शोध संस्थानों के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को आर्थिक सहायता देना शुरू किया। इस नेटवर्क को करोड़ों डॉलर की फंडिंग मिलने की बात भी सामने आई।
सत्ता परिवर्तन की कोशिशों से जुड़े आरोप क्या हैं?
इस पूरे विवाद में बीजेपी नेताओं का आरोप है कि विदेशी कार्यकर्ता संगठनों का एक नेटवर्क भारत में राजनीतिक विरोध-प्रदर्शनों को बढ़ावा देकर उन्हें मोदी सरकार के खिलाफ बड़े अभियान का रूप देने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, ये आरोप हैं और इन्हें अपने आप में साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने ‘ग्लोबल केओस इंक ग्रोज टू 101 ग्रुप्स’ नाम की एक रिपोर्ट का हवाला दिया। इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि कई देशों के संगठनों ने विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े संदेशों को फैलाने और उनके बीच समन्वय स्थापित करने का काम किया।

Neville Roy Singham: चीनी सरकार के इशारे पर काम करने का आरोप
भंडारी ने भारत, फ्रांस, स्पेन और अल्बानिया में हुए प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए कार्यकर्ता संगठनों और सिंघम से जुड़े समूहों के बीच कथित संबंधों की बात कही।बीजेपी नेता ने कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने पार्टी के नेतृत्व और विदेशी राजनीतिक संगठन ‘प्रोग्रेसिव इंटरनेशनल’ से जुड़े लोगों के बीच हुई बातचीत पर सवाल उठाए।बीजेपी नेताओं ने मतदाता सूची में बदलाव और उसकी समीक्षा से जुड़े विरोध-प्रदर्शनों का भी इस विवाद में जिक्र किया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों से अधिक जवाबदेही की मांग के बीच हो रही इन गतिविधियों को सरकार को अस्थिर करने की कथित व्यापक कोशिश से जोड़कर देखा।
निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी से क्या पूछा?
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी की मुलाकातों और उनके संपर्कों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा, “कांग्रेस से मेरा सवाल है- नेविल रॉय सिंघम, ऑनलाइन जुए, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े लोगों के बारे में… पिछले पांच सालों में राहुल गांधी इन क्षेत्रों के किन-किन लोगों से मिले हैं?”दुबे ने आगे सवाल किया, “इनमें से कौन से लोग उनकी ‘भारत जोड़ो यात्रा’ या ऐसी ही अन्य यात्राओं में शामिल हुए हैं? इसके अलावा, जब भी वे विदेश जाते हैं, तो वहां किन लोगों से मिलते हैं, और देश को अस्थिर करने के लिए वे किस तरह की योजनाएं बनाते हैं?”इन सवालों के जरिए दुबे ने राहुल गांधी के संपर्कों और कथित अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क के बीच संबंधों की जांच की मांग उठाई।
Neville Roy Singham: भारत में पहली बार कब सामने आया सिंघम का नाम?
भारत में नेविल रॉय सिंघम का नाम साल 2023 में चर्चा में आया था। उस समय ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक पड़ताल में वामपंथी विचारधारा से जुड़े संगठनों और मीडिया संस्थानों के साथ उनके कथित वित्तीय संबंधों की जानकारी सामने आई थी।अखबार की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सिंघम चीन के सरकारी मीडिया तंत्र के साथ मिलकर काम करते थे। हालांकि, सिंघम ने चीनी सरकार के निर्देश पर काम करने या किसी राजनीतिक दल से आदेश मिलने के आरोपों को खारिज कर दिया था।भारत में उनसे जुड़ा प्रमुख विवाद एक डिजिटल समाचार मंच की फंडिंग को लेकर सामने आया। ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ ने अपनी रिपोर्ट ‘चीनी प्रोपेगैंडा का एक वैश्विक जाल जो एक अमेरिकी टेक कारोबारी तक जाता है’ में दावा किया था कि यह समाचार मंच उस अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का हिस्सा था, जिसे सिंघम से आर्थिक सहायता मिलती थी।इस रिपोर्ट के बाद भारतीय अधिकारियों ने संबंधित समाचार मंच को मिलने वाली रकम के स्रोतों और वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की।
2023 में हुई थी गिरफ्तारी
अक्टूबर 2023 में दिल्ली पुलिस ने कथित अवैध अंतरराष्ट्रीय फंडिंग और चीन के पक्ष में विचारधारा को बढ़ावा देने से जुड़े आरोपों की जांच के दौरान पुरकायस्थ और समाचार मंच के मानव संसाधन प्रमुख अमित चक्रवर्ती को गिरफ्तार किया था।इस मामले में सिंघम ने किसी भी तरह की गड़बड़ी में शामिल होने से इनकार किया है। हालांकि, उनकी राजनीतिक विचारधारा और जिन संगठनों को वे आर्थिक सहायता देते हैं, उनके संबंधों को लेकर सवाल उठते रहे हैं।पूरे विवाद का मुख्य सवाल यह है कि सिंघम की ओर से विभिन्न संगठनों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता का उद्देश्य क्या था और क्या इसका दायरा सामान्य सामाजिक एवं धर्मार्थ गतिविधियों से आगे तक फैला हुआ था। बीजेपी इन कथित संबंधों को राजनीतिक गतिविधियों से जोड़कर सवाल उठा रही है, जबकि सिंघम ने अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।








