Home » ग्राउंड रिपोर्ट » राजकुमार भाटी के देवी-देवताओं की पूजा को लेकर दिए बयान पर दादरी में नाराजगी, अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी उठे सवाल

राजकुमार भाटी के देवी-देवताओं की पूजा को लेकर दिए बयान पर दादरी में नाराजगी, अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी उठे सवाल

दादरी में राजकुमार भाटी के बयान पर विवाद
दादरी में राजकुमार भाटी के बयान पर विवाद

Rajkumar Bhati Statement: समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजकुमार भाटी का हिंदू देवी-देवताओं की पूजा न करने और उनका विरोध करने से जुड़ा बयान इन दिनों चर्चा में है। इस मुद्दे को लेकर उत्तर प्रदेश की दादरी विधानसभा में लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कई लोगों ने उनके बयान को गलत बताते हुए कहा कि किसी भी धर्म और उसकी मान्यताओं का अपमान नहीं किया जाना चाहिए। वहीं, कुछ लोगों ने इस मामले में समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी सवाल उठाए। ख़बर इंडिया के पत्रकार रोहित अत्री ने दादरी पहुंचकर स्थानीय लोगों से इस मुद्दे पर उनकी राय जानी। दादरी गुर्जर बहुल क्षेत्र है और राजकुमार भाटी का भी इस इलाके से संबंध रहा है। फिलहाल यहां से भारतीय जनता पार्टी के तेजपाल नागर विधायक हैं।

Rajkumar Bhati Statement: राजकुमार भाटी के बयान पर लोगों ने जताई आपत्ति

ख़बर इंडिया से बातचीत में स्थानीय निवासी अजीत सिंह ने कहा कि राजकुमार भाटी को हिंदू देवी-देवताओं के बारे में इस तरह की बात नहीं कहनी चाहिए। देवी-देवता सभी के लिए आस्था का विषय हैं और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस बयान से समाजवादी पार्टी की छवि पर असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, अखिलेश यादव को भी अपने नेता के बयान पर प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी।वहीं, मोहम्मद सलीम ने कहा कि देवी-देवता हिंदुओं के हों या किसी अन्य धर्म से जुड़े हों, सभी की मान्यताओं का सम्मान होना चाहिए। किसी भी पार्टी का नेता अगर गलत बयान देता है, तो उसे उसका राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि नेताओं को अपनी भाषा पर ध्यान देना चाहिए और किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली बात नहीं कहनी चाहिए।मोहम्मद खलील ने भी किसी धर्म के खिलाफ गलत टिप्पणी करने को उचित नहीं माना। वहीं, इरशाद खान ने कहा कि हर व्यक्ति की अपनी सोच होती है, लेकिन किसी को गलत कहने से बचना चाहिए। उनके अनुसार, हर धर्म के लोगों को एक-दूसरे की मान्यताओं का सम्मान करना चाहिए।

गुर्जर समाज की आस्था का भी किया जिक्र

दादरी के रहने वाले मोनू ने राजकुमार भाटी के बयान को गलत बताते हुए कहा कि हिंदू देवी-देवताओं का विरोध नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि राजकुमार भाटी हिंदू देवी-देवताओं को नहीं मानते, तो उन्हें अपनी धार्मिक पहचान के बारे में भी स्पष्ट रुख रखना चाहिए।मोनू ने कहा कि अखिलेश यादव को इस मामले की जानकारी होने पर अपने नेता से जवाब मांगना चाहिए। अगर पार्टी नेतृत्व को इस बयान की जानकारी है, तो उसे उचित कदम उठाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव में इस मुद्दे का असर देखने को मिल सकता है।जब उनसे पूछा गया कि क्या राजकुमार भाटी भविष्य में इसी गुर्जर समाज से वोट मांगेंगे, तो उन्होंने कहा कि ऐसे बयानों के बाद उन्हें लोगों का समर्थन मिलना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने दादरी में समाजवादी पार्टी की राजनीतिक स्थिति को लेकर भी नकारात्मक राय जताई।

Rajkumar Bhati Statement: राजवीर नागर ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर उठाए सवाल

दादरी के अधिवक्ता राजवीर नागर ने कहा कि गुर्जर समाज की हिंदू देवी-देवताओं में आस्था रही है और लोग उनका सम्मान करते हैं। ऐसे में किसी नेता द्वारा धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली टिप्पणी करना उचित नहीं है।उन्होंने कहा कि यदि कोई नेता सत्ता पाने के उद्देश्य से धर्म का अपमान करता है, तो लोग उसे सम्मान क्यों देंगे या उसे वोट क्यों देंगे? उनके अनुसार, राजकुमार भाटी पहले भी विवादित बयान दे चुके हैं। उन्होंने ब्राह्मणों को लेकर दिए गए उनके पुराने बयान का भी जिक्र किया और कहा कि ऐसे मामलों में अखिलेश यादव की चुप्पी से ऐसा लग सकता है कि वह अपने नेता को महत्व दे रहे हैं।राजवीर नागर ने कहा कि किसी एक समाज को अपने पक्ष में करने के लिए दूसरे समाज की भावनाओं को आहत करना सही तरीका नहीं है। उन्होंने दावा किया कि गुर्जर समाज इस तरह के बयानों को स्वीकार नहीं करेगा और आगामी चुनाव में इसका असर पड़ सकता है। उनके मुताबिक, धार्मिक भावनाओं का अपमान करने वाले नेताओं का विरोध किया जाना चाहिए।

रामकेश नागर ने कहा- हर व्यक्ति को अपनी राय रखने का अधिकार

अधिवक्ता रामकेश नागर ने कहा कि हर व्यक्ति स्वतंत्र है और उसे अपने विचार रखने का अधिकार है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि किसी के विचारों से दूसरे व्यक्ति या समुदाय को ठेस पहुंचती है, तो इस पहलू पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए।अखिलेश यादव की चुप्पी को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि किसी पार्टी के अंदर क्या निर्णय लिया जाता है, यह उसका अपना मामला है। उन्होंने इस संभावना से भी इनकार नहीं किया कि पार्टी नेतृत्व को ऐसे बयानों की जानकारी हो सकती है, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि इस बारे में निश्चित रूप से कुछ नहीं कहा जा सकता।उन्होंने कहा कि व्यक्ति अपनी पसंद के धर्म और मान्यताओं को मानने के लिए स्वतंत्र है, लेकिन उसे दूसरे धर्म या समुदाय का अपमान नहीं करना चाहिए। अपनी आस्था रखना और दूसरों की आस्था का सम्मान करना, दोनों जरूरी हैं।

Rajkumar Bhati Statement: कुछ लोगों ने अखिलेश यादव का समर्थन भी किया

दादरी में सभी लोगों की राय एक जैसी नहीं थी। कुछ लोगों ने अखिलेश यादव के प्रति अपनी राजनीतिक और सामाजिक नजदीकी भी जाहिर की। एक महिला ने कहा कि अखिलेश यादव उनकी बिरादरी से हैं, इसलिए वह उन्हें अपना मानती हैं, लेकिन उनके नेताओं के कुछ बयान गलत होते हैं।महिला ने कहा कि वह भगवान राम और अन्य हिंदू देवी-देवताओं में आस्था रखती हैं और उनकी पूजा करती हैं। उनके अनुसार, किसी नेता को इस तरह के बयान देने से बचना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि बिरादरी के कारण समर्थन करने के बावजूद नेताओं को अपने व्यवहार और बयानों में सुधार करना चाहिए।

एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हर किसी को अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पूजा करने का अधिकार है। वहीं, ऋषिपाल सिंह ने भी हिंदू देवी-देवताओं में अपनी आस्था जाहिर करते हुए कहा कि इस तरह का विरोध करना गलत है। उन्होंने माना कि पार्टी नेतृत्व को अपने नेताओं के बयानों पर ध्यान देना चाहिए।कुछ लोगों ने यह भी कहा कि वे अखिलेश यादव को अपनी बिरादरी का नेता मानते हैं, लेकिन इससे उनके हर बयान या फैसले का समर्थन करना जरूरी नहीं हो जाता। उनके मुताबिक, नेताओं को समाज में बोलते समय सभी समुदायों की भावनाओं का ध्यान रखना चाहिए।

स्थानीय लोगों ने योगी सरकार के कामकाज पर भी रखी राय

पत्रकार रोहित अत्री ने स्थानीय लोगों से उत्तर प्रदेश की योगी सरकार के कामकाज को लेकर भी सवाल किए। इस पर खुर्रम खान ने कहा कि योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गुंडागर्दी में कमी आई है और विकास कार्य हुए हैं। उन्होंने सड़कों की स्थिति का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले सड़कों पर गड्ढे दिखाई देते थे, जबकि अब बेहतर सड़कें बन रही हैं।कुछ अन्य लोगों ने भी योगी आदित्यनाथ के कामकाज की तारीफ की। एक व्यक्ति ने कहा कि मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ का काम अच्छा है। वहीं, कुछ लोगों ने अखिलेश यादव और योगी आदित्यनाथ की तुलना करने के बजाय कहा कि वे अपनी रोजमर्रा की जिंदगी और कामकाज पर ध्यान देते हैं।एक सब्जी विक्रेता ने कहा कि उसके लिए रोजी-रोटी कमाना सबसे महत्वपूर्ण है। इस पर पत्रकार ने सवाल किया कि यदि इलाके में गुंडागर्दी बढ़ती है, तो लोगों के कामकाज पर भी असर पड़ सकता है। स्थानीय व्यक्ति ने जवाब दिया कि क्षेत्र में विकास हुआ है और कामकाज की स्थिति बेहतर हुई है।

Rajkumar Bhati Statement: हनी सिंह चौहान ने धर्म के अपमान को गलत बताया

दादरी निवासी हनी सिंह चौहान ने कहा कि किसी भी देवी-देवता का अपमान करना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति का अपना धर्म और आस्था होती है, इसलिए सभी को अपनी मान्यताओं के अनुसार पूजा करने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।जब उनसे पूछा गया कि अखिलेश यादव अपने नेताओं को ऐसे बयानों के लिए क्यों नहीं टोकते, तो उन्होंने कहा कि यह राजनीतिक मामला है और इस पर वह कुछ नहीं कहना चाहते। उन्होंने यह भी कहा कि नेताओं की राजनीति से अलग आम लोगों को अपने काम और आजीविका पर ध्यान देना पड़ता है।शिव कुमार ने भी राजकुमार भाटी के बयान को गलत बताया। उन्होंने कहा कि देवी-देवताओं के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी नहीं करनी चाहिए और अखिलेश यादव को अपने नेता से इस बारे में सवाल करना चाहिए।

ओमिंदर ने कहा- आस्था का विरोध नहीं होना चाहिए

गुर्जर समाज से आने वाले ओमिंदर ने कहा कि देवी-देवताओं के प्रति श्रद्धा मन से जुड़ी होती है। किसी व्यक्ति को पूजा करनी है या नहीं करनी है, यह उसकी अपनी पसंद हो सकती है, लेकिन उसे विरोध करने या दूसरों की आस्था को ठेस पहुंचाने से बचना चाहिए।उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं का सम्मान करना जरूरी है और इस तरह के बयान लोगों की भावनाओं को आहत कर सकते हैं। उनके अनुसार, किसी भी समुदाय की आस्था और उसकी मर्यादा का ध्यान रखा जाना चाहिए।

Rajkumar Bhati Statement: 2027 के चुनाव में मुद्दा बनने की संभावना

दादरी में लोगों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट हुआ कि राजकुमार भाटी के बयान को लेकर कई स्थानीय लोगों में नाराजगी है। कुछ लोगों ने इसे समाजवादी पार्टी की छवि से जोड़कर देखा, जबकि कुछ ने अखिलेश यादव की चुप्पी पर सवाल उठाए। वहीं, कुछ लोगों ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता और राजनीतिक मामलों में अपनी राय देने से दूरी बनाए रखने की बात कही।ख़बर इंडिया के इस वीडियो में सामने आए विचार स्थानीय लोगों की व्यक्तिगत राय हैं। इन प्रतिक्रियाओं के आधार पर पूरे दादरी या गुर्जर समाज की एक समान राय नहीं मानी जा सकती। हालांकि, लोगों के बयानों से यह जरूर सामने आया कि धार्मिक आस्था, नेताओं की भाषा और राजनीतिक जवाबदेही जैसे मुद्दे आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले चर्चा का विषय बन सकते हैं।