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ड्रग्स तस्करी के इंटरनेशनल नेटवर्क पर NCB का बड़ा एक्शन, 100 करोड़ के हवाला का खुलासा; 1,424 खाते फ्रीज

NCB Operation Trident:

NCB Operation Trident: नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए ऑपरेशन ट्राइडेंट शुरू किया है। 23 अक्टूबर 2026 को शुरू किए गए इस ऑपरेशन के तहत पूर्वोत्तर भारत के तीन राज्यों असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की गई। इस कार्रवाई में NCB के साथ मिजोरम पुलिस, प्रवर्तन निदेशालय (ED) और दूसरी एजेंसियां भी शामिल रहीं। जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस ऑपरेशन के दौरान करीब 100 करोड़ रुपये के संदिग्ध हवाला लेन-देन का खुलासा हुआ है। इसके अलावा, नेटवर्क से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गईं। कार्रवाई के दौरान 500 डेटोनेटर और 12 लाख रुपये नकद भी बरामद किए गए हैं। मामले में अब तक 18 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है।

NCB Operation Trident: 100 करोड़ रुपये के हवाला नेटवर्क का खुलासा

ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान जांच एजेंसियों ने ड्रग्स तस्करी से जुड़े वित्तीय नेटवर्क पर भी कार्रवाई की है। जांच में करीब 100 करोड़ रुपये के संदिग्ध हवाला लेन-देन का पता चला। इसके बाद नेटवर्क से जुड़े 1,424 बैंक खातों को फ्रीज किया गया और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गईं। एजेंसियों का उद्देश्य तस्करी से होने वाली अवैध कमाई के स्रोतों का पता लगाना और इस पैसे का इस्तेमाल करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना है। जांचकर्ता गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर नेटवर्क से जुड़े दूसरे लोगों और पैसों के लेन-देन की जानकारी जुटा रहे हैं।

NCB Operation Trident: भारत, म्यांमार और बांग्लादेश तक फैला ड्रग्स तस्करी का नेटवर्क

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस नेटवर्क के तार भारत, म्यांमार और बांग्लादेश के बीच फैले तस्करी मार्गों से जुड़े हैं। आरोप है कि म्यांमार से मेथामफेटामाइन और हेरोइन जैसे नशीले पदार्थों की तस्करी की जा रही थी। इन नशीले पदार्थों को मिजोरम, मणिपुर और असम के रास्ते भारत के अन्य हिस्सों तक पहुंचाया जाता था। जांच में त्रिपुरा और बांग्लादेश से जुड़े संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है। एजेंसियां अब इस नेटवर्क के उन लोगों की पहचान करने में जुटी हैं, जो नशीले पदार्थों की खेप पहुंचाने, परिवहन की व्यवस्था करने और तस्करी से मिलने वाले पैसों को अलग-अलग माध्यमों से ट्रांसफर करने में मदद करते थे।

‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ से जुड़े तस्करी मार्गों की जांच

जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के तस्करी मार्गों को ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ से जोड़कर देख रही हैं। म्यांमार से सटे सीमावर्ती इलाकों में नशीले पदार्थों की आवाजाही की आशंका के बीच इन रास्तों से जुड़े लोगों और उनके संपर्कों की जांच की जा रही है। एजेंसियों का ध्यान केवल नशीले पदार्थों की खेप पकड़ने तक सीमित नहीं है। वे उन लोगों की पहचान भी कर रही हैं, जो तस्करी के लिए ठिकाने उपलब्ध कराने, खेप को आगे पहुंचाने और अवैध कमाई को छिपाने में मदद करते हैं।

तीन राज्यों में 38 ठिकानों पर छापेमारी

ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत 38 टीमों ने असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ कार्रवाई की। मिजोरम की राजधानी आइजोल, सीमावर्ती शहर चम्फाई और भारत-म्यांमार सीमा के पास स्थित जोखावथार में छापेमारी की गई। इसके अलावा, मणिपुर के चुराचांदपुर और असम के कछार इलाके में भी नेटवर्क से जुड़े संदिग्ध ठिकानों को निशाना बनाया गया। जांच एजेंसियों ने इस कार्रवाई की तैयारी के लिए कई दिनों तक खुफिया सूचनाएं जुटाईं। संदिग्धों की पहचान करने, उनके आपसी संपर्कों का पता लगाने और वित्तीय लेन-देन की जानकारी इकट्ठा करने के बाद एक साथ छापेमारी की गई, ताकि आरोपियों को भागने या सबूत छिपाने का मौका न मिले।

म्यांमार में बैठे कथित सरगना का नाम आया सामने

NCB की जांच में म्यांमार में मौजूद कथित ड्रग्स सरगना थांगचिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा का नाम सामने आया है। सरकारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, वह NCB, चम्फाई पुलिस और मिजोरम एक्साइज से जुड़े 10 से अधिक NDPS मामलों में वांछित था। उस पर म्यांमार से भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी करने वाले नेटवर्क को संचालित करने का आरोप है। जांच एजेंसियां इस नेटवर्क के अन्य सदस्यों और उनके बीच संपर्कों का पता लगाने में जुटी हैं।

कथित सहयोगी भी गिरफ्तार

इस मामले में वुंगखानथावना नाम के एक कथित सहयोगी को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी दी गई है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, वह म्यांमार से आने वाली ड्रग्स की खेप को आगे पहुंचाने और उसकी डिलीवरी की व्यवस्था करने में मदद करता था। बाद में उसे PITNDPS कानून के तहत हिरासत में लिया गया।

हवाला ऑपरेटर और शेल कंपनियों की भी जांच

जांच में ललरामपारी को कथित तौर पर हवाला के जरिए पैसे ट्रांसफर करने वाला प्रमुख ऑपरेटर बताया गया है। NCB ने उसे 8 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया था। उससे जुड़ी जांच के दौरान करीब 100 करोड़ रुपये के संदिग्ध हवाला लेन-देन का पता चला, जिसके बाद वित्तीय नेटवर्क की पड़ताल में ED को भी शामिल किया गया। इसके अलावा, अबू सालेह उर्फ सैफुद्दीन को 20 नवंबर 2025 को असम के कछार इलाके से गिरफ्तार किया गया था। एजेंसियों के मुताबिक, वह असम के रास्ते ड्रग्स की खेप आगे पहुंचाने वाले नेटवर्क में अहम भूमिका निभाता था और कई NDPS मामलों से भी जुड़ा था। आरोपियों से पूछताछ, डिजिटल फॉरेंसिक जांच और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल के दौरान कथित शेल कंपनियों तथा कई बैंक खातों के इस्तेमाल की जानकारी भी सामने आई। एजेंसियां अब इन कड़ियों की जांच कर रही हैं।

ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई में क्यों अहम है ऑपरेशन ट्राइडेंट?

ऑपरेशन ट्राइडेंट के तहत जांच एजेंसियों का फोकस केवल नशीले पदार्थों की खेप जब्त करने पर नहीं, बल्कि पूरे तस्करी नेटवर्क की वित्तीय और लॉजिस्टिक व्यवस्था को निशाना बनाने पर है। इसमें तस्करी करने वाले लोगों, सीमा पार से खेप मंगाने वालों, परिवहन और डिलीवरी में मदद करने वालों, हवाला ऑपरेटरों और अवैध कमाई से संपत्तियां बनाने वालों की पहचान करना शामिल है। बैंक खातों को फ्रीज करने और संपत्तियों को अटैच करने जैसी कार्रवाई का उद्देश्य तस्करी से होने वाली अवैध कमाई पर रोक लगाना है। जांच आगे बढ़ने के साथ एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की भूमिका का भी पता लगा रही हैं।

31 दिसंबर 2029 तक ड्रग्स मुक्त भारत का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को ड्रग्स मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सरकार के नारकोटिक्स नियंत्रण से जुड़े विजन डॉक्यूमेंट 2026-2029 में भी तस्करी के नेटवर्क और उसके वित्तीय लेन-देन के खिलाफ कार्रवाई को महत्व दिया गया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ऑपरेशन ट्राइडेंट की कार्रवाई की जानकारी साझा करते हुए NCB, केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस टीमों को बधाई दी। उन्होंने ड्रग्स के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति को दोहराते हुए नशीले पदार्थों के कार्टेल के खिलाफ कार्रवाई जारी रखने की बात कही। इस तरह, ऑपरेशन ट्राइडेंट के जरिए जांच एजेंसियां अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी के नेटवर्क, उसके वित्तीय स्रोतों और उससे जुड़े लोगों पर कार्रवाई कर रही हैं। हालांकि, पूरे नेटवर्क की वास्तविक सीमा और अन्य आरोपियों की भूमिका का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा।

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