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दिवाली से पहले सोना ₹14,000 सस्ता, चांदी 9 महीने में 50% टूटी; अभी खरीदें या करें इंतजार?

दिवाली से पहले सोने-चांदी में बड़ी गिरावट
दिवाली से पहले सोने-चांदी में बड़ी गिरावट

Gold Silver Price: त्योहारी सीजन के बीच सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट जारी है। सितंबर और अक्टूबर 2026 में अब तक 24 कैरेट सोना करीब 14 हजार रुपये सस्ता हो चुका है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के मुताबिक, 31 अगस्त को 10 ग्राम सोने की कीमत करीब 1.55 लाख रुपये थी, जो 23 अक्टूबर तक घटकर 1.41 लाख रुपये रह गई।चांदी की कीमतों में भी बड़ी गिरावट आई है। पिछले दो महीनों में चांदी करीब 43 हजार रुपये और पिछले नौ महीनों में कुल 1.92 लाख रुपये सस्ती हुई है। 29 जनवरी 2026 को चांदी की कीमत 3.86 लाख रुपये प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई थी, लेकिन 23 अक्टूबर तक इसका भाव गिरकर करीब 1.94 लाख रुपये रह गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या दिवाली तक सोने-चांदी की कीमतें और गिरेंगी या अब खरीदारी करना सही रहेगा? आइए, एक्सपर्ट्स की राय और बाजार के रुझान से समझते हैं।

Gold Silver Price: सोने-चांदी के दामों में कितनी गिरावट आई?

साल 2026 की शुरुआत में सोने और चांदी की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी हुई थी। 31 दिसंबर 2025 को घरेलू बाजार में सोने का भाव 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 29 जनवरी 2026 को बढ़कर 1.76 लाख रुपये तक पहुंच गया। इसके बाद कीमतों में गिरावट शुरू हुई। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, सोना अपने उच्चतम स्तर से करीब 34 हजार रुपये सस्ता हो चुका है।पिछले एक हफ्ते में भी सोने की कीमत करीब 4 हजार रुपये घटी है। 17 अक्टूबर को 10 ग्राम सोने का भाव लगभग 1.46 लाख रुपये था, जो 24 अक्टूबर तक गिरकर 1.42 लाख रुपये रह गया।चांदी की कीमतों में भी इसी तरह का उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को चांदी 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी। 29 जनवरी को इसका भाव बढ़कर 3.86 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। इसके बाद कीमतों में गिरावट आई और चांदी अब तक करीब 1.92 लाख रुपये सस्ती हो चुकी है। पिछले एक हफ्ते में ही इसका भाव लगभग 16,503 रुपये गिरा है। 17 अक्टूबर को चांदी करीब 2.11 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो 24 अक्टूबर तक घटकर 1.94 लाख रुपये रह गई।

सोना-चांदी सस्ता, अभी खरीदें या करें इंतजार?
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सोने की कीमतों में गिरावट की क्या है वजह?

सोने को आमतौर पर सुरक्षित निवेश का विकल्प माना जाता है। हालांकि, इस साल अमेरिका-ईरान युद्ध, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों को प्रभावित किया है। पहले दोनों धातुओं के भाव में तेजी आई और फिर गिरावट शुरू हो गई।फिलहाल अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत करीब 4,000 डॉलर प्रति औंस है, जबकि चांदी लगभग 54 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है। एक औंस में करीब 31.1 ग्राम होते हैं। 1 जनवरी 2026 को सोने की कीमत लगभग 4,321 डॉलर और चांदी की कीमत 71.74 डॉलर प्रति औंस थी। यानी पिछले करीब 10 महीनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना लगभग 7.5% और चांदी करीब 25% सस्ती हुई है। इस गिरावट के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं।

Gold Silver Price: ब्याज दरें बढ़ने से निवेशकों का रुझान बदला

ईरान युद्ध शुरू होने से पहले अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत करीब 70 डॉलर प्रति बैरल थी, जो अक्टूबर 2026 में बढ़कर लगभग 117 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। तेल महंगा होने से सामान की ढुलाई और उत्पादन की लागत बढ़ जाती है। इससे दुनिया भर में महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा होता है।महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं। इससे कर्ज लेना महंगा हो जाता है और लोगों के खर्च में कमी आ सकती है। ऊंची ब्याज दरों के दौरान निवेशक सोने-चांदी के बजाय बैंक जमा और बॉन्ड में पैसा लगाना ज्यादा फायदेमंद समझ सकते हैं, क्योंकि सोने से नियमित ब्याज नहीं मिलता।कनाडा के टीडी बैंक ग्रुप के कमोडिटी रणनीतिकार रयान मैके के मुताबिक, मध्य-पूर्व में तनाव बढ़ने से तेल की कीमतें फिर ऊपर जा रही हैं। वहीं, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई कंपनियों के शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिल रही है। ऐसे में निवेशक अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड की ओर रुख कर रहे हैं। बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न बढ़ने पर सोने की कीमतों पर दबाव पड़ता है।अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने सितंबर 2026 में ब्याज दरों को बढ़ाकर 3.75% से 4.00% के बीच कर दिया था। अक्टूबर में भी दरें इसी स्तर पर रहने की उम्मीद है। महंगे तेल के कारण दिसंबर में ब्याज दरें और बढ़ सकती हैं या उन्हें लंबे समय तक ऊंचा रखा जा सकता है।

डॉलर मजबूत होने से सोने की मांग घटी

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत डॉलर में तय होती है। ऐसे में जब डॉलर मजबूत होता है, तो दूसरी मुद्राओं में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इससे सोने की मांग कम हो सकती है। 28 फरवरी को ईरान युद्ध शुरू होने के बाद डॉलर इंडेक्स में करीब 3% की बढ़ोतरी हुई और यह 97 से बढ़कर लगभग 102 के स्तर पर पहुंच गया। डॉलर की मजबूती ने निवेशकों के लिए डॉलर में पैसा लगाना ज्यादा आकर्षक बना दिया है।भारत सोने का बड़ा आयातक है। डॉलर महंगा होने से विदेश से सोना खरीदने की लागत बढ़ जाती है। इससे भारत में सोने का आयात महंगा हो सकता है और घरेलू बाजार में इसकी मांग प्रभावित हो सकती है।थिंक टैंक ब्रूगल की वरिष्ठ फेलो रेबेका क्रिस्टी के मुताबिक, डॉलर महंगा होने पर वह निवेश के लिहाज से बेहतर विकल्प बन जाता है। अगर तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो महंगाई भी बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में सोने जैसी धातुओं के बजाय डॉलर में निवेश करना ज्यादा आकर्षक हो सकता है।

Gold Silver Price: महंगे सोने में मुनाफा निकाल रहे निवेशक

2025 से लेकर 2026 की शुरुआत तक सोने की कीमतों में करीब 65% की तेजी आई थी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में इसका भाव बढ़कर 5,595 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया था। जब किसी निवेश की कीमत तेजी से बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचती है, तो कई निवेशक मुनाफा सुरक्षित करने के लिए उसे बेचने लगते हैं। इसे प्रॉफिट बुकिंग कहा जाता है।डॉलर की मजबूती और सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ने के बीच कुछ निवेशकों ने मुनाफा निकालने के लिए सोना बेचना शुरू कर दिया। इससे इसकी कीमतों में गिरावट आई।ब्रिटेन के प्रोग्रेसिव इकोनॉमिक फोरम के सदस्य जेम्स मीडवे के मुताबिक, सोने को अब उतना सुरक्षित निवेश नहीं माना जा रहा, जितना दो साल पहले माना जाता था। उनके अनुसार, सोने में सट्टे के आधार पर खरीदारी बढ़ने से यह अधिक जोखिम वाला निवेश बन गया है। इसी वजह से केंद्रीय बैंक और बड़े निवेशक भी इसकी कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव को लेकर सतर्क हैं।हालांकि, लंबी अवधि के निवेश के लिए सोने की मांग पूरी तरह कमजोर नहीं हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में दुनिया भर के गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड यानी ईटीएफ में करीब 10 अरब डॉलर का निवेश बढ़ा। इसके अलावा, केंद्रीय बैंक भी सोना खरीद रहे हैं। डेनमार्क के सैक्सो बैंक में कमोडिटी रणनीति के प्रमुख ओले हैनसेन के अनुसार, कम समय के लिए कारोबार करने वाले निवेशक सोने में अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं, जबकि लंबी अवधि के निवेशकों के बीच इसकी मांग मजबूत बनी हुई है।

क्या दिवाली तक और सस्ता होगा सोना-चांदी?

आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की 27 और 28 अक्टूबर की बैठक बाजार के लिए अहम मानी जा रही है। अगर फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को ऊंचा बनाए रखने का संकेत देता है, तो सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आती है या दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होता है, तो दोनों धातुओं के भाव में सुधार देखने को मिल सकता है।दुनिया के बड़े बैंकों और वित्तीय संस्थानों के अनुमानों के मुताबिक, साल के अंत तक सोने की कीमत में करीब 22% तक बढ़ोतरी हो सकती है। दूसरी ओर, चांदी में उतार-चढ़ाव बने रहने की आशंका है। हालांकि, 2027 में दोनों धातुओं की कीमतें और बढ़ने के अनुमान लगाए जा रहे हैं।

Gold Silver Price: सोने की कीमत 35% तक बढ़ने का अनुमान

अमेरिका के निवेश बैंक गोल्डमैन सैक्स ने 28 अगस्त की अपनी रिपोर्ट में अनुमान लगाया था कि सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है। यह करीब 22.5% की बढ़ोतरी होगी। वहीं, स्विट्जरलैंड के निवेश बैंक यूबीएस ने 20 अक्टूबर की रिपोर्ट में अनुमान लगाया कि सितंबर 2027 तक सोने का भाव 5,400 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकता है। यह करीब 35% की तेजी होगी।घरेलू बाजार में भी इसका असर दिखाई दे सकता है। अगर भारत में सोने की कीमत 25% बढ़ती है, तो 10 ग्राम सोने का भाव करीब 1.78 लाख रुपये हो सकता है। कीमत में 30% की बढ़ोतरी होने पर यह लगभग 1.85 लाख रुपये और 35% की तेजी आने पर करीब 1.92 लाख रुपये तक पहुंच सकता है।

Gold Silver Price: सोना-चांदी सस्ता, दिवाली तक और गिरेंगे दाम?
सोना-चांदी सस्ता, दिवाली तक और गिरेंगे दाम?
चांदी में भी तेजी की उम्मीद

चांदी की कीमतों में आगे उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद कुछ अनुमानों के मुताबिक, अगले कुछ महीनों में चांदी करीब 15% से 30% तक महंगी हो सकती है। जेपी मॉर्गन के अनुमान के मुताबिक, 2027 में चांदी की कीमत लगभग 64 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है, जो करीब 17% की बढ़ोतरी होगी।अगर भारत में चांदी की कीमत 30% बढ़ती है, तो इसका भाव करीब 2.55 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। हालांकि, कमोडिटी और इक्विटी रिसर्च फर्म केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का अनुमान है कि आने वाले कुछ दिनों में घरेलू बाजार में सोने की कीमत घटकर 1.38 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक आ सकती है। चांदी का भाव भी करीब 1.95 लाख रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकता है। उनके मुताबिक, अगले साल दिवाली तक चांदी की कीमत 3 लाख से 3.25 लाख रुपये प्रति किलो तक जाने की संभावना है।

Gold Silver Price: अभी सोना-चांदी खरीदें या इंतजार करें?

मौजूदा हालात में विशेषज्ञ खरीदारों और निवेशकों को जल्दबाजी में फैसला लेने के बजाय सोच-समझकर खरीदारी करने की सलाह दे रहे हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता के मुताबिक, अगर चांदी की कीमत 1.78 लाख से 1.85 लाख रुपये प्रति किलो के बीच रहती है, तो नए और पुराने निवेशक धीरे-धीरे खरीदारी शुरू करने पर विचार कर सकते हैं।केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया का मानना है कि सोने और चांदी में एक साथ पूरा पैसा लगाने के बजाय अलग-अलग किस्तों में खरीदारी करना बेहतर हो सकता है। निवेशक कुछ मात्रा अभी खरीद सकते हैं और बाकी रकम से हर 15 से 20 दिन के अंतराल पर खरीदारी कर सकते हैं। उन्होंने सलाह दी कि निवेश करते समय केवल एक-दो महीने के फायदे पर ध्यान देने के बजाय छह महीने से एक साल तक की अवधि को ध्यान में रखना चाहिए।

गोल्ड-सिल्वर रेश्यो देखकर करें निवेश

स्टॉक ब्रोकिंग कंपनी बोनान्जा पोर्टफोलियो के वरिष्ठ रिसर्च एनालिस्ट नृपेंद्र यादव के मुताबिक, फिलहाल गोल्ड-सिल्वर रेश्यो 70 से ऊपर है। यह अनुपात बताता है कि एक औंस सोना खरीदने के लिए कितने औंस चांदी की जरूरत होगी।अगर यह अनुपात लगातार घटता है और चांदी की मांग बढ़ती है, तो निवेशक चांदी में पैसा लगाने पर विचार कर सकते हैं। वहीं, अगर यह अनुपात बढ़ता रहता है, तो सोने का प्रदर्शन चांदी के मुकाबले बेहतर हो सकता है। ऐसी स्थिति में निवेशक सोने को प्राथमिकता दे सकते हैं।कुल मिलाकर, सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। इसलिए खरीदारी या निवेश करने से पहले अपनी जरूरत, बजट और जोखिम उठाने की क्षमता को ध्यान में रखना जरूरी है। कीमतें बढ़ने या घटने के किसी भी अनुमान को निश्चित न मानें और निवेश का फैसला सोच-समझकर लें।