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भारत ने पाकिस्तान को क्यों कहा ‘फॉर्म 47 की सरकार’? चुनावी धांधली के आरोपों से लेकर UN तक, समझिए पूरा विवाद

INDIA NEWS: संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान पर कश्मीर के मुद्दे को लेकर दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया और उसकी सरकार को ‘फॉर्म 47 की सरकार’ कहा। यह टिप्पणी पाकिस्तान में 2024 के आम चुनावों के बाद उठे धांधली और मतगणना में गड़बड़ी के आरोपों से जुड़ी है। आखिर फॉर्म 47 क्या है, फॉर्म 45 से इसका क्या संबंध है और पाकिस्तान की सरकार के गठन पर विवाद क्यों हुआ था? जानिए इस पूरे मामले की 8 बड़ी बातें।

 संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान को क्या कहा?

24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र में भारत ने पाकिस्तान की ओर से कश्मीर को लेकर लगाए गए आरोपों पर जवाब दिया। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव रघू पुरी ने पाकिस्तान पर भारत की छवि खराब करने के लिए दुष्प्रचार करने का आरोप लगाया। उन्होंने पाकिस्तान की सरकार के लिए ‘फॉर्म 47 की सरकार’ शब्द का इस्तेमाल किया। यह टिप्पणी पाकिस्तान के 2024 के आम चुनावों के बाद सामने आए उन विवादों की ओर इशारा करती है, जिनमें चुनावी नतीजों में कथित हेरफेर के आरोप लगाए गए थे।

INDIA NEWS: पाकिस्तान में फॉर्म 47 क्या है?

पाकिस्तान में चुनाव के दौरान नतीजों का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए अलग-अलग फॉर्म इस्तेमाल किए जाते हैं। इनमें फॉर्म 45 और फॉर्म 47 की अहम भूमिका है। फॉर्म 47 किसी निर्वाचन क्षेत्र के शुरुआती समेकित चुनावी नतीजों का रिकॉर्ड होता है। इसे तैयार करते समय अलग-अलग मतदान केंद्रों से मिले आंकड़ों को एक साथ जोड़ा जाता है। इसमें उम्मीदवारों को मिले वोटों और अमान्य मतों समेत चुनावी नतीजों का ब्योरा दर्ज किया जाता है। फॉर्म 47 अपने आप में किसी चुनाव में धांधली का प्रमाण नहीं है। विवाद तब पैदा होता है, जब इसके आंकड़ों और मतदान केंद्रों पर तैयार किए गए रिकॉर्ड के बीच अंतर होने का आरोप लगाया जाता है।

फॉर्म 45 और फॉर्म 47 में क्या अंतर है?

पाकिस्तान के चुनावी विवाद को समझने के लिए इन दोनों दस्तावेजों का अंतर जानना जरूरी है। फॉर्म 45: मतदान केंद्र पर हुई मतगणना का रिकॉर्ड होता है। इसमें हर उम्मीदवार को मिले वोटों का ब्योरा दर्ज किया जाता है। फॉर्म 47: निर्वाचन क्षेत्र के अलग-अलग मतदान केंद्रों से मिले आंकड़ों को समेकित करके शुरुआती नतीजों का ब्योरा तैयार किया जाता है। फॉर्म 48 और फॉर्म 49: चुनावी प्रक्रिया में क्रमशः मतों के समेकित विवरण और अंतिम परिणाम के रिकॉर्ड के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं।

INDIA NEWS: 2024 के चुनावों में विवाद कैसे शुरू हुआ?

पाकिस्तान में फरवरी 2024 में हुए आम चुनावों के बाद मतगणना और नतीजों को लेकर विवाद खड़ा हो गया था। पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और उसके समर्थकों ने आरोप लगाया कि कई निर्वाचन क्षेत्रों में चुनावी नतीजों में हेरफेर की गई। पीटीआई नेताओं का दावा था कि मतदान केंद्रों से मिले फॉर्म 45 के आंकड़ों और निर्वाचन क्षेत्र के नतीजे बताने वाले फॉर्म 47 के आंकड़ों में अंतर था। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ जगहों पर उसके मतदान प्रतिनिधियों को जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं दिए गए। इन आरोपों के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और नतीजों की विश्वसनीयता को लेकर सवाल उठे। हालांकि, पीटीआई के आरोपों को सभी निर्वाचन क्षेत्रों में साबित हुई धांधली के रूप में पेश करना सही नहीं होगा। हर मामले की स्थिति संबंधित दस्तावेजों और जांच के आधार पर अलग-अलग देखी जानी चाहिए।

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इमरान खान की पार्टी ने क्या दावा किया था?

चुनाव के बाद पीटीआई और उसके नेताओं ने दावा किया कि पार्टी समर्थित उम्मीदवारों को मतदान केंद्रों पर मिले वोटों के आधार पर अधिक सीटें मिलनी चाहिए थीं। इमरान खान ने फॉर्म 45 के आधार पर पीटीआई समर्थित उम्मीदवारों की बड़ी जीत का दावा किया था। दूसरी ओर, आधिकारिक नतीजों में पार्टी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों की सीटों की संख्या अलग थी। इस अंतर को लेकर पीटीआई ने चुनावी जनादेश चोरी किए जाने का आरोप लगाया। पार्टी नेताओं ने कई निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजों को चुनौती भी दी। इन दावों और चुनावी नतीजों के बीच अंतर ने ‘फॉर्म 45 बनाम फॉर्म 47’ को पाकिस्तान की राजनीति में एक चर्चित मुद्दा बना दिया।

INDIA NEWS: पाकिस्तान में सरकार कैसे बनी?

2024 के चुनाव में पीटीआई को अपने चुनाव चिह्न पर चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिली थी। इसके चलते उसके कई समर्थित उम्मीदवार निर्दलीय के रूप में मैदान में उतरे। चुनाव के बाद पीटीआई समर्थित निर्दलीय उम्मीदवारों का समूह महत्वपूर्ण राजनीतिक ताकत बनकर उभरा, लेकिन उसे अपने दम पर स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। इसके बाद पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) और पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (PPP) ने मिलकर गठबंधन सरकार बनाई। शहबाज शरीफ प्रधानमंत्री बने।

पीटीआई और उसके समर्थकों ने सरकार के गठन पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि चुनावी नतीजों ने जनता के वास्तविक जनादेश को प्रतिबिंबित नहीं किया। दूसरी ओर, गठबंधन सरकार ने संवैधानिक और संसदीय प्रक्रिया के तहत सरकार बनाई। इस राजनीतिक विवाद के बीच पाकिस्तान की सेना की भूमिका को लेकर भी सवाल उठते रहे।

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भारत पाकिस्तान को ‘फॉर्म 47 की सरकार’ क्यों कहता है?

भारत की ओर से ‘फॉर्म 47 की सरकार’ शब्द का इस्तेमाल पाकिस्तान के 2024 के चुनावों के बाद उठे विवाद की राजनीतिक याद दिलाने के लिए किया गया। भारत का तर्क है कि पाकिस्तान की सरकार के गठन पर ही जब चुनावी पारदर्शिता और जनादेश को लेकर सवाल उठते रहे हैं, तो उसे भारत के आंतरिक मामलों पर टिप्पणी करने से पहले अपनी राजनीतिक व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।

यह शब्द पाकिस्तान की सरकार पर भारत की ओर से की गई राजनीतिक टिप्पणी है। इसे चुनावी धांधली का स्वतंत्र रूप से स्थापित कानूनी निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। चुनाव में गड़बड़ी के आरोपों और उनके प्रमाणों के बीच अंतर करना जरूरी है।

INDIA NEWS: ‘फॉर्म 47 की सरकार’ विवाद का राजनीतिक महत्व क्या है?

यह विवाद केवल चुनावी दस्तावेजों तक सीमित नहीं है। इसके जरिए पाकिस्तान में चुनावी पारदर्शिता, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और सत्ता गठन की वैधता पर बहस होती रही है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में इस मुद्दे का उल्लेख करके पाकिस्तान के कश्मीर संबंधी आरोपों का राजनीतिक जवाब दिया। वहीं, पाकिस्तान में 2024 के चुनावों को लेकर पीटीआई और अन्य राजनीतिक पक्षों के आरोप-प्रत्यारोप देश की राजनीति में लंबे समय तक चर्चा का विषय बने रहे। इस पूरे मामले में तीन बातों को अलग-अलग समझना जरूरी है: चुनावी दस्तावेजों में अंतर के आरोप, उन आरोपों के समर्थन में पेश किए गए प्रमाण और भारत की ओर से की गई राजनीतिक टिप्पणी। इन तीनों को एक ही बात मान लेना विवाद की वास्तविक प्रकृति को धुंधला कर सकता है।

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