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वल्लभभाई पटेल कौन थे, उन्होंने कैसे बनाया एकजुट भारत? जयंती पर PM मोदी से अमित शाह तक किसने किया याद

Sardar Patel Jayanti 2026: भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर देश उन्हें याद कर रहा है। आजादी के बाद 500 से अधिक रियासतों को भारत में मिलाकर एकजुट राष्ट्र बनाने में उनकी अहम भूमिका रही। इसी योगदान के कारण उन्हें ‘लौह पुरुष’ कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, गृह मंत्री अमित शाह और उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन समेत कई नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। आइए जानते हैं कि सरदार पटेल कौन थे, उन्होंने देश के लिए क्या किया और आज नेताओं ने उन्हें किस तरह याद किया।

31 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाते 

भारत की आजादी के बाद देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक अलग-अलग रियासतों को एक राजनीतिक व्यवस्था के तहत लाना था। उस समय देश में 500 से अधिक रियासतें थीं। इनके भारत में विलय का काम आसान नहीं था। ऐसे समय में सरदार वल्लभभाई पटेल ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ, दृढ़ इच्छाशक्ति और कूटनीति से देश के एकीकरण में निर्णायक भूमिका निभाई।

31 अक्टूबर को उनकी जयंती के मौके पर देशभर में राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर कई बड़े नेताओं ने उनके योगदान को याद किया। लेकिन सवाल है कि आखिर सरदार पटेल कौन थे और उन्होंने ऐसा क्या किया, जिसकी वजह से आज भी उन्हें आधुनिक भारत के निर्माण का प्रमुख शिल्पकार माना जाता है?

Sardar Patel Jayanti 2026:  कौन थे सरदार वल्लभभाई पटेल?

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद में हुआ था। वह देश के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, वकील और राजनेता थे। महात्मा गांधी के नेतृत्व में उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय भूमिका निभाई।

पटेल ने किसानों के अधिकारों के लिए भी कई महत्वपूर्ण आंदोलन किए। 1918 में खेड़ा सत्याग्रह और 1928 में बारडोली सत्याग्रह के दौरान उनके नेतृत्व ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। बारडोली आंदोलन की सफलता के बाद उन्हें ‘सरदार’ की उपाधि से जाना जाने लगा। आजादी के बाद वह स्वतंत्र भारत के पहले उप प्रधानमंत्री और गृह मंत्री बने। देश की रियासतों को एकजुट करने में उनके योगदान के कारण उन्हें ‘लौह पुरुष’ और ‘भारत का बिस्मार्क’ भी कहा जाता है। 15 दिसंबर 1950 को उनका निधन हो गया।

सरदार पटेल ने कैसे बनाया एकजुट भारत?

15 अगस्त 1947 को जब भारत आजाद हुआ, तब देश की राजनीतिक स्थिति काफी जटिल थी। ब्रिटिश शासन के अंत के साथ ही रियासतों के सामने भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा अलग रहने का विकल्प था। ऐसे में देश के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन रियासतों को एकजुट करना था।

सरदार पटेल ने तत्कालीन रियासतों के शासकों से बातचीत और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए उन्हें भारत में शामिल करने का अभियान चलाया। इस काम में वीपी मेनन ने भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पटेल की कोशिशों से 500 से अधिक रियासतों का भारतीय संघ में विलय संभव हुआ। हैदराबाद और जूनागढ़ जैसी रियासतों के मामले में विशेष राजनीतिक और प्रशासनिक कदम उठाने पड़े। कश्मीर का मामला अलग परिस्थितियों के कारण जटिल बना रहा। इस तरह सरदार पटेल ने आजादी के बाद भारत की राजनीतिक एकता को मजबूत करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। यही वजह है कि उन्हें आधुनिक भारत के एकीकरण का प्रमुख शिल्पकार कहा जाता है।

Sardar Patel Jayanti 2026: देश की प्रशासनिक व्यवस्था बनाने में भी था बड़ा योगदान

सरदार पटेल का योगदान केवल रियासतों के विलय तक सीमित नहीं था। उन्होंने आजाद भारत की प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने पर भी जोर दिया। वह अखिल भारतीय सेवाओं को देश की एकता और प्रशासनिक मजबूती के लिए महत्वपूर्ण मानते थे। उनके प्रयासों से भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) और भारतीय पुलिस सेवा (IPS) जैसी सेवाओं को मजबूत आधार मिला। पटेल का मानना था कि देश की एकता बनाए रखने के लिए ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था जरूरी है, जो पूरे देश में काम कर सके। इसी कारण उन्हें भारतीय प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने वाले प्रमुख नेताओं में गिना जाता है।

सरदार पटेल की जयंती पर कौन-कौन से नेताओं ने किया याद?

सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती पर देश के शीर्ष नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी। दिल्ली के पटेल चौक पर आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और गृह मंत्री समेत कई नेता मौजूद रहे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पर सरदार पटेल को अखंड भारत का प्रणेता बताते हुए नमन किया। उन्होंने कहा कि पटेल ने एक सशक्त, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। मोदी गुजरात के एकता नगर स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पहुंचकर भी उन्हें श्रद्धांजलि देने वाले हैं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू: राष्ट्रपति ने नई दिल्ली के पटेल चौक पर सरदार पटेल की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और उनके योगदान को याद किया। गृह मंत्री अमित शाह: अमित शाह ने सरदार पटेल को आधुनिक भारत का शिल्पकार और राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि पटेल ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति से रियासतों में बंटे देश को एक सूत्र में पिरोया। शाह ने देशवासियों को राष्ट्रीय एकता दिवस की शुभकामनाएं भी दीं। उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन: उपराष्ट्रपति ने भी पटेल चौक पर पहुंचकर सरदार पटेल को श्रद्धांजलि अर्पित की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता: उन्होंने भी पटेल चौक पर पुष्पांजलि अर्पित कर लौह पुरुष के योगदान को याद किया। इस कार्यक्रम में दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू और सांसद बांसुरी स्वराज भी मौजूद रहीं।

Sardar Patel Jayanti 2026
                                                Sardar Patel Jayanti 2026
Sardar Patel Jayanti 2026:  सरदार पटेल की जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस क्यों मनाया जाता है?

केंद्र सरकार ने वर्ष 2014 से हर साल 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाने की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करना है। इस दिन देशभर में ‘रन फॉर यूनिटी’, एकता मार्च और कई अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इन कार्यक्रमों के जरिए लोगों को देश की एकता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का संदेश दिया जाता है।

 स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्यों है खास?

गुजरात के केवड़िया स्थित स्टैच्यू ऑफ यूनिटी सरदार वल्लभभाई पटेल को समर्पित है। इसका उद्घाटन 31 अक्टूबर 2018 को उनकी 143वीं जयंती पर किया गया था। 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में जानी जाती है। इसे बनाने का उद्देश्य सरदार पटेल के योगदान और देश की एकता के संदेश को यादगार बनाना है। हर साल उनकी जयंती पर यहां राष्ट्रीय एकता दिवस का मुख्य कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस बार भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी केवड़िया में आयोजित कार्यक्रम में शामिल होंगे।

Sardar Patel Jayanti 2026: देश की एकता में आज भी याद किए जाते हैं सरदार पटेल

सरदार वल्लभभाई पटेल का योगदान केवल स्वतंत्रता आंदोलन तक सीमित नहीं रहा। आजादी के बाद देश की रियासतों को एकजुट करने, प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत बनाने और राष्ट्रीय एकता की नींव रखने में उनकी भूमिका ऐतिहासिक रही।

यही वजह है कि उनकी जयंती पर देश के शीर्ष नेता उन्हें याद करते हैं। राष्ट्रीय एकता दिवस के जरिए उनके विचारों और योगदान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश की जाती है। सरदार पटेल का जीवन यह संदेश देता है कि मजबूत इच्छाशक्ति, दूरदर्शिता और दृढ़ नेतृत्व से बड़ी से बड़ी चुनौती का सामना किया जा सकता है।

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