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कौन हैं अब्दुल अल-सईद, जिन्हें ट्रंप ने बताया जिहादी? 9/11 हमले से तुलना कर क्यों मचा सियासी घमासान

Trump’s statement: अमेरिका में मध्यावधि चुनाव से पहले मिशिगन की सीनेट सीट को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद को ‘जिहादी’ और मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य बताते हुए उनकी तुलना 9/11 हमले के अपहरणकर्ताओं से कर दी। अल-सईद ने इन आरोपों को खारिज किया है। आखिर कौन हैं अब्दुल अल-सईद, ट्रंप के निशाने पर क्यों हैं और मिशिगन की यह सीट अमेरिकी राजनीति के लिए इतनी महत्वपूर्ण क्यों है? आइए समझते हैं।

सवाल 1: कौन हैं अब्दुल अल-सईद?

अब्दुल अल-सईद मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेट उम्मीदवार हैं। उनका जन्म 31 अक्टूबर 1984 को मिशिगन के रोचेस्टर हिल्स में हुआ था। उनके माता-पिता मिस्र से अमेरिका आए थे। अल-सईद ने मिशिगन विश्वविद्यालय से पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने कोलंबिया विश्वविद्यालय से मेडिकल डिग्री हासिल की और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से सार्वजनिक स्वास्थ्य में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की।

अल-सईद ने अपना करियर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बनाया। वह डेट्रॉयट के स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख रहे और बाद में वेन काउंटी के स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग का नेतृत्व किया। उन्होंने 2018 में मिशिगन के गवर्नर पद का चुनाव भी लड़ा था, लेकिन डेमोक्रेटिक प्राइमरी में जीत नहीं सके। अब वह अमेरिकी सीनेट पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।

Trump’s statement: सवाल 2: ट्रंप ने अल-सईद को जिहादी क्यों कहा?

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 25 अक्टूबर को मिशिगन के पोर्ट ह्यूरन में चुनावी रैली के दौरान अल-सईद को निशाने पर लिया। उन्होंने आरोप लगाया कि अल-सईद मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े हैं और उन्हें अमेरिकी सीनेट में पहुंचने से रोकना जरूरी है। ट्रंप ने अपने भाषण में 9/11 आतंकी हमले का जिक्र करते हुए अल-सईद की तुलना यूनाइटेड फ्लाइट 93 के अपहरणकर्ताओं से की। उन्होंने मतदाताओं से अपील की कि वे अल-सईद को सीनेटर बनने से रोकने के लिए उसी तरह खड़े हों, जैसे फ्लाइट 93 के यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं का मुकाबला किया था। हालांकि, ट्रंप के इन आरोपों को साबित करने वाला कोई सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है कि अल-सईद मुस्लिम ब्रदरहुड के सदस्य हैं। अल-सईद खुद भी इस संगठन से किसी तरह का संबंध होने से इनकार कर चुके हैं।

सवाल 3: 9/11 हमले और टॉड बीमर का जिक्र क्यों किया गया?

11 सितंबर 2001 को अमेरिका पर हुए आतंकी हमले में अलकायदा के आतंकियों ने चार यात्री विमानों का अपहरण किया था। इनमें से दो विमान न्यूयॉर्क के वर्ल्ड ट्रेड सेंटर और एक विमान पेंटागन से टकराया था। चौथा विमान यूनाइटेड फ्लाइट 93 था। इसके यात्रियों को विमान के अपहरण की जानकारी मिली तो उन्होंने आतंकियों का मुकाबला करने का फैसला किया। इसी दौरान यात्रियों ने अपहरणकर्ताओं को रोकने की कोशिश की और विमान पेंसिल्वेनिया में एक खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

Trump's statement
                                                        Trump’s statement

इस विमान में सवार टॉड बीमर उन यात्रियों में शामिल थे, जिन्होंने अपहरणकर्ताओं के खिलाफ संघर्ष किया था। ट्रंप ने इसी घटना का संदर्भ देते हुए मिशिगन के मतदाताओं से अल-सईद के खिलाफ खड़े होने की अपील की। इस तरह उन्होंने सीनेट चुनाव को राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद से जोड़ने की कोशिश की।

Trump’s statement: सवाल 4: मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है और इस विवाद में इसका नाम क्यों आया?

मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना 1928 में मिस्र में हुई थी। यह एक इस्लामी सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन के रूप में शुरू हुआ था। समय के साथ इससे जुड़े अलग-अलग संगठनों और शाखाओं की गतिविधियों को लेकर कई देशों में विवाद पैदा हुए। इस संगठन से जुड़ी शाखाओं की स्थिति हर देश में एक जैसी नहीं है। कुछ देशों ने इसकी कुछ शाखाओं को आतंकवादी संगठन घोषित किया है। अमेरिकी राजनीति में भी मुस्लिम ब्रदरहुड को लेकर लंबे समय से बहस होती रही है।

अल-सईद के खिलाफ ट्रंप और रिपब्लिकन नेताओं की ओर से इस संगठन से संबंध होने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, अल-सईद ने इन आरोपों से इनकार किया है और उनके संगठन से जुड़े होने का सार्वजनिक प्रमाण सामने नहीं आया है। इसलिए ट्रंप के बयान को स्थापित तथ्य के बजाय राजनीतिक आरोप के रूप में देखना जरूरी है।

सवाल 5: क्या अल-सईद जीतने पर अमेरिका के पहले मुस्लिम सीनेटर बनेंगे?

हां। अगर अब्दुल अल-सईद मिशिगन की सीनेट सीट जीतते हैं, तो वह अमेरिकी सीनेट के लिए चुने जाने वाले पहले मुस्लिम सदस्य बन जाएंगे। यही वजह है कि उनका चुनाव राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। अमेरिकी सीनेट में हर राज्य के दो प्रतिनिधि होते हैं। इस सदन में किस पार्टी का बहुमत होगा, इसका असर राष्ट्रपति के विधायी एजेंडे और कई महत्वपूर्ण नियुक्तियों पर पड़ता है। ऐसे में मिशिगन की सीट दोनों प्रमुख पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण है।

Trump’s statement: सवाल 6: मिशिगन में किसके बीच है मुकाबला और चुनाव क्यों अहम है?

मिशिगन में सीनेट की खाली सीट के लिए डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद और रिपब्लिकन उम्मीदवार माइक रोजर्स के बीच मुकाबला है। माइक रोजर्स अमेरिकी प्रतिनिधि सभा के पूर्व सदस्य रह चुके हैं।

3 नवंबर 2026 को होने वाले मध्यावधि चुनाव में इस सीट का नतीजा सीनेट में रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टी की स्थिति को प्रभावित कर सकता है। यही वजह है कि राष्ट्रपति ट्रंप खुद अल-सईद के खिलाफ प्रचार कर रहे हैं। इस चुनाव में स्वास्थ्य सेवाओं, महंगाई, रोजगार और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे भी अहम हैं। लेकिन चुनाव प्रचार के आखिरी दिनों में अल-सईद की धार्मिक पहचान और मुस्लिम ब्रदरहुड से कथित संबंधों को लेकर विवाद ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

सवाल 7: इस पूरे विवाद का राजनीतिक मतलब क्या है?

मिशिगन का चुनाव अब केवल दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं रह गया है। ट्रंप की बयानबाजी ने इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, धार्मिक पहचान और अमेरिकी राजनीति में मुस्लिम प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दों के साथ जोड़ दिया है।

रिपब्लिकन पक्ष अल-सईद की विचारधारा और कथित संबंधों को चुनावी मुद्दा बना रहा है, जबकि अल-सईद का पक्ष इन आरोपों को उनकी पहचान पर हमला और मतदाताओं का ध्यान असली मुद्दों से भटकाने की कोशिश बताता है। इस विवाद का असर केवल मिशिगन तक सीमित नहीं रह सकता। चुनाव में मतदाता यह तय करेंगे कि उनके लिए उम्मीदवार की नीतियां और स्थानीय मुद्दे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं या राष्ट्रीय सुरक्षा और धार्मिक पहचान से जुड़े आरोप।

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