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EDITORIAL NEWS: इंटरनेट मीडिया कंटेंट नहीं, बच्चे ही भविष्य हैं!

EDITORIAL NEWS: तेज़ी से बदलते डिजिटल युग में हम इंटरनेट, सोशल मीडिया और वायरल कंटेंट को ही आधुनिक दुनिया की शक्ति मान बैठे हैं।

EDITORIAL NEWS: तेज़ी से बदलते डिजिटल युग में हम इंटरनेट, सोशल मीडिया और वायरल कंटेंट को ही आधुनिक दुनिया की शक्ति मान बैठे हैं। हर तरफ कंटेंट की बाढ़ है कहीं ट्रेंडिंग वीडियो, कहीं शॉर्ट फॉर्म रील्स, कहीं लाइवस्ट्रीम का शोर। लेकिन इसी शोर में एक सच्चाई दबती जा रही है, जो किसी भी समाज की असली विरासत है हमारे बच्चे। क्योंकि भविष्य न तो सर्वर रूम में बनता है और न ही डिजिटल प्लेटफॉर्म की लाइक्स में, भविष्य बनता है रूपरेखा में ढलते एक बच्चे के मन और उसकी शिक्षा में।

डिजिटल दुनिया तेज़, बच्चों की दुनिया संवेदनशील

आज इंटरनेट ने सूचना को सुलभ बनाया है, लेकिन बच्चे जानकारी नहीं, दिशा खोजते हैं। वे तकनीक से ज़्यादा मानवीय स्पर्श, मार्गदर्शन और मूल्य चाहते हैं। जहाँ इंटरनेट कंटेंट पलभर में बदल जाता है, बच्चे धीरे-धीरे और गहराई से सीखते हैं। उनके मन में बोया गया हर बीज एक दिन उनकी पहचान बनता है ऐसी पहचान, जिसका असर समाज पर दशकों तक पड़ता है।

EDITORIAL NEWS: बच्चों के मन में भविष्य की रूपरेखा बनती है

हम दुनिया बदलने की बात करते हैं, लेकिन असल बदलाव किसी वीडियो या पोस्ट से नहीं,बल्कि एक बच्चे के भीतर जगाई गई जिज्ञासा, करुणा, अनुशासन, नैतिकता और साहस से आता है।

एक वैज्ञानिक, एक कलाकार, एक सैनिक, एक शिक्षक ये सब पहले
बच्चे ही थे। उनकी नींव पर ही देश की आने वाली तस्वीर खड़ी होगी।

EDITORIAL NEWS: कंटेंट की दौड़ में बचपन को खोने न दें

आज मीडिया के ट्रेंड बच्चों को प्रभावित कर रहे हैं। वे लाइक्स में खुशी और स्क्रीन पर पहचान ढूँढ रहे हैं। लेकिन किसी भी देश के लिए सबसे बड़ा खतरा यही है जब उसकी नई पीढ़ी मूल्यों से ज़्यादा वायरलिटी को महत्व देने लगे।

इसलिए समाज, परिवार और स्कूलों की ज़िम्मेदारी सिर्फ शिक्षा तक सीमित नहीं है। उन्हें डिजिटल शोर में बच्चों के लिए वह शांत, सुरक्षित और प्रेरक वातावरण तैयार करना होगा जहाँ वे खुद को समझ सकें।

बच्चों में निवेश सबसे बड़ा विकास मॉडल

सरकारें उद्योगों में निवेश करती हैं, समाज तकनीक में निवेश करता है,
किंतु सबसे बड़ा और स्थायी निवेश बच्चों के चरित्र निर्माण में होता है।

* अच्छे स्कूल
* सुरक्षित वातावरण
* खेल मैदान
* संस्कार
* सही मार्गदर्शन
* और असफलता को स्वीकार करना सिखाना

ये सब मिलकर एक ऐसी पीढ़ी बनाते हैं जो सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि समाज की दिशा तय करती है।

इंटरनेट कंटेंट बदल जाएगा, बच्चे कल का नेतृत्व करेंगे

वीडियो का ट्रेंड 24 घंटे चलता है, फिर गायब हो जाता है। कंटेंट बनाने वाले आते-जाते रहते हैं। लेकिन बच्चे वे कल की संसद, कल के अनुसंधान केंद्र, कल के स्टार्टअप, कल की सेना, कल का नाटक मंच, कल का खेत और कल की प्रयोगशालाएँ संभालेंगे।

इसलिए इंटरनेट कितना भी विकसित हो जाए,भविष्य का असली ड्राइविंग-फोर्स बच्चे ही हैं, कंटेंट नहीं।

इंटरनेट सहारा है, आधार नहीं बच्चे ही असली पूँजी हैं

डिजिटल दुनिया कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए,एक बच्चा ही सबसे बड़ा प्रोजेक्ट, पोटेंशियल और पावर है।

समाज को समझना होगा फ्यूचर कंटेंट क्रिएशन से नहीं, चाइल्ड क्रिएशन से बनेगा। क्योंकि इंटरनेट कंटेंट सिर्फ आज को प्रभावित करता है,लेकिन बच्चे पूरे भविष्य को आकार देते हैं।

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