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हेल्थ-हब बनेगा भारत: दिल्ली में होगा पारंपरिक चिकित्सा का अंतरराष्ट्रीय शिखर सम्मेलन

दिल्ली में होने वाला WHO Summit 2025 पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को वैश्विक स्तर पर नई दिशा देने वाला है। इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 100 से अधिक देश Traditional Medicine के वैज्ञानिक, आर्थिक और नीतिगत पहलुओं पर चर्चा करेंगे। भारत, अपनी प्राचीन आयुष प्रणाली और बढ़ती वैश्विक स्वीकृति के साथ, दुनिया के पारंपरिक स्वास्थ्य क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभाने की ओर बढ़ रहा है।
Traditional Medicine सम्मेलन में 100+ देशों की बड़ी भागीदारी

Traditional Medicine: भारत दिसंबर 2025 में एक बार फिर विश्व स्वास्थ्य मंच पर नेतृत्व करने जा रहा है। भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की साझेदारी से 17–19 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में दूसरा WHO Global Summit on Traditional Medicine आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में दुनिया के 100 से अधिक देश शामिल होंगे, जो इसे पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली पर दुनिया का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन बनाता है।

Traditional Medicine को वैज्ञानिक रूप से मजबूत करने पर जोर

इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर की पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों जैसे आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध, होम्योपैथी, हर्बल मेडिसिन, पारंपरिक चीनी चिकित्सा, अफ्रीकन इंडिजिनस मेडिसिन को वैज्ञानिक रूप से मजबूत करना, आधुनिक चिकित्सा के साथ एकीकृत करना और वैश्विक स्वास्थ्य नीति में उनकी भूमिका को बढ़ाना है।

Traditional Medicine सम्मेलन में 100+ देशों की बड़ी भागीदारी
Traditional Medicine सम्मेलन में 100+ देशों की बड़ी भागीदारी

भारत में यह सम्मेलन ऐसे समय हो रहा है जब दुनिया प्राकृतिक चिकित्सा, हर्बल ट्रीटमेंट और इंटीग्रेटेड हेल्थ सिस्टम की ओर तेजी से बढ़ रही है। WHO के अनुसार, दुनिया की 80% आबादी किसी न किसी रूप में पारंपरिक दवाओं का उपयोग करती है। ऐसे में यह सम्मेलन विश्व स्वास्थ्य नीति के लिए नया रोडमैप तैयार करेगा।

भारत क्यों है इस आयोजन का केंद्र?

Traditional Medicine: भारत विशेषकर आयुर्वेद की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली दुनिया भर में लोकप्रिय हो रही है। 2023 में पहले सम्मेलन के बाद आयुर्वेदिक निर्यात में 40% की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसके अलावा भारत ने हाल के वर्षों में AYUSH मंत्रालय, AYUSH डिजिटल मिशन, वैश्विक आयुर्वेद संस्थान जैसे बड़े कदम उठाए हैं।

3 दिनों तक यह सम्मेलन निम्न विषयों पर केंद्रित रहेगा:

पारंपरिक दवाओं के वैज्ञानिक शोध
आधुनिक चिकित्सा में समन्वय (Integrative Healthcare)
हर्बल मेडिसिन की गुणवत्ता और सुरक्षा
डिजिटल हेल्थ और पारंपरिक चिकित्सा
वैश्विक व्यापार और निवेश अवसर
अंतरराष्ट्रीय मानकों का निर्धारण

Traditional Medicine: भारत को क्या फायदे होंगे?

Traditional Medicine: भारत Traditional Medicine Capital of the World बनने की ओर बढ़ेगा, आयुर्वेद, यूनानी और सिद्ध उपचारों की वैश्विक वैल्यू बढ़ेगी, हर्बल और प्राकृतिक औषधि उद्योग को नई अंतरराष्ट्रीय मार्केट मिलेगी। साथ ही स्वास्थ्य-पर्यटन (Medical Tourism) में तेज़ी आएगी, जिससे ग्लोबल हेल्थ डिप्लोमेसी में भारत की स्थिति और मजबूत होगी। कुल मिलाकर, WHO Summit 2025 भारत की पारंपरिक चिकित्सा प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान और बड़ी आर्थिक संभावनाएँ देगा।

Written By- Anurag Vishwakarma

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