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खीरी के विकास का ‘ऐतिहासिक बुधवार’: मिली सुगम आवागमन की तीसरी सबसे बड़ी सौगात, रेलखंड का होगा दोहरीकरण

लखीमपुर खीरी
लखीमपुर खीरी

Lakhimpur Kheri: लखीमपुर खीरी जनपद वासियों के लिए आज का दिन किसी ‘स्वर्णिम दिवस’ से कम नहीं है। सड़क और रेल मार्ग को लेकर सुबह से मिल रही बड़ी खुशखबरी की कड़ी में अब तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। रेल मंत्रालय ने सीतापुर-लखीमपुर-मैलानी-पीलीभीत-बरेली रेल सेक्शन के दोहरीकरण (Doubling) की दिशा में ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) को आधिकारिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। यह खबर लखीमपुर खीरी के उन हजारों यात्रियों के लिए राहत का पैगाम लेकर आई है, जो सिंगल ट्रैक होने के कारण घंटों तक ट्रेनों की ‘क्रॉसिंग’ का इंतजार करते थे। इस परियोजना के धरातल पर उतरने से तराई की रेल कनेक्टिविटी न केवल आधुनिक होगी, बल्कि इसकी रफ्तार भी दोगुनी हो जाएगी।

क्या है फाइनल लोकेशन सर्वे?

किसी भी रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए FLS (Final Location Survey) सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। रेल मंत्रालय की इस स्वीकृति का अर्थ है कि अब रेलवे की तकनीकी टीम जमीन का सीमांकन, मिट्टी की जांच, नए रेल पुलों का निर्माण स्थल और अतिरिक्त ट्रैक बिछाने के लिए आवश्यक भूमि का अंतिम खाका तैयार करेगी। सर्वे पूरा होते ही बजट का प्रावधान कर निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर शुरू किया जाएगा।

Lakhimpur Kheri: लखीमपुर को मिलीं तीन बड़ी सौगातें

संजय कुमार राठौर की रिपोर्ट के अनुसार, आज का दिन लखीमपुर के परिवहन इतिहास में ‘हैट्रिक’ का दिन साबित हुआ है…
पहली सौगात: पानीपत-गोरखपुर हाई-स्पीड एक्सप्रेस-वे को भारत सरकार की हरी झंडी।
दूसरी सौगात: आला हजरत एक्सप्रेस का लखीमपुर के रास्ते दिल्ली और भुज तक विस्तार का प्रस्ताव।
तीसरी सौगात (महा-धमाका): सीतापुर से बरेली तक पूरी रेल लाइन के दोहरीकरण का सर्वे स्वीकृत।

दोहरीकरण से बदल जाएगी लखीमपुर की तस्वीर

1. यात्रा समय में क्रांतिकारी बदलाव: वर्तमान में सिंगल लाइन होने के कारण एक ट्रेन को पास कराने के लिए दूसरी ट्रेन को छोटे स्टेशनों पर घंटों खड़ा रहना पड़ता है। दोहरीकरण के बाद ट्रेनों का आवागमन निर्बाध (Non-stop) होगा, जिससे लखनऊ से बरेली के बीच यात्रा समय में 1.5 से 2 घंटे की कमी आएगी।

2. यात्री सुविधाओं और ट्रेनों की संख्या में वृद्धि: ट्रैक डबल होते ही इस रूट की क्षमता बढ़ जाएगी। इससे भविष्य में वंदे भारत, राजधानी और अन्य सुपरफास्ट ट्रेनों के इस मार्ग से गुजरने का रास्ता साफ हो जाएगा। लखीमपुर सीधे दक्षिण और पूर्वोत्तर भारत से जुड़ सकेगा।

3. माल परिवहन और आर्थिक प्रगति: लखीमपुर खीरी गन्ना और अनाज का कटोरा माना जाता है। रेल लाइन के दोहरीकरण से मालगाड़ियों का संचालन सुगम होगा, जिससे स्थानीय चीनी मिलों और व्यापारियों को अपना उत्पाद देश के कोने-कोने तक भेजने में आसानी होगी। इससे माल ढुलाई की लागत घटेगी और मुनाफा बढ़ेगा।

4. क्षेत्रीय विकास और रोजगार के नए अवसर: रेलवे की इस विशाल परियोजना से स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित होंगे। निर्माण कार्य में लगने वाले श्रमिकों से लेकर तकनीकी विशेषज्ञों तक, स्थानीय युवाओं को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से काम मिलेगा। साथ ही, बेहतर कनेक्टिविटी से जिले में नए उद्योगों की स्थापना होगी।

Lakhimpur Kheri: जनता के बीच उत्साह

रेल मंत्रालय के इस फैसले के बाद तराई क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने खुशी जाहिर की है। लंबे समय से सीतापुर-मैलानी रेलखंड के दोहरीकरण की मांग उठ रही थी। रेल मंत्रालय का यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार इस पिछड़े माने जाने वाले क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा में लाने के लिए संकल्पित है। लखीमपुर खीरी अब विकास की ‘नई पटरी’ पर दौड़ने को तैयार है। सड़क पर एक्सप्रेस-वे और रेल मार्ग पर दोहरीकरण की यह योजनाएं अगले कुछ वर्षों में जिले की तस्वीर और तकदीर दोनों बदल देंगी। सुगम आवागमन की इन तीन बड़ी खबरों ने लखीमपुर खीरी को उत्तर प्रदेश के सबसे महत्वपूर्ण ‘कनेक्टिविटी हब’ के रूप में स्थापित कर दिया है।

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