Shivaji Maharaj Controversy: महाराष्ट्र कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल द्वारा छत्रपति शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान को लेकर दिए गए बयान के बाद राज्य की राजनीति में विवाद गहरा गया है। सपकाल ने बुलढाणा में एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि टीपू सुल्तान को शिवाजी महाराज के समकक्ष माना जाना चाहिए और वे एक वीर योद्धा के रूप में उभरे थे। यह बयान मालेगांव नगर निगम के उपमहापौर के कार्यालय से टीपू सुल्तान की तस्वीर हटाने को लेकर चल रहे विवाद के संदर्भ में दिया गया था।
भाजपा का तीखा विरोध
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस बयान को शर्मनाक बताया और कहा कि कांग्रेस नेता को सार्वजनिक रूप से क्षमा मांगनी चाहिए।
भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया और कार्रवाई की मांग की। पुणे सहित कई स्थानों पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया, नारे लगाए और सपकाल के पुतले जलाए। उनके विरुद्ध मामला दर्ज किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
Shivaji Maharaj Controversy: सपकाल की सफाई
विवाद बढ़ने के बाद हर्षवर्धन सपकाल ने स्पष्ट किया कि उनका वक्तव्य विशेष संदर्भ में दिया गया था और उसे तोड़-मरोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि शिवाजी महाराज की तुलना किसी से नहीं की जा सकती और वे चर्चा के लिए तैयार हैं।
Shivaji Maharaj Controversy: ऐतिहासिक संदर्भ
छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 1627 में हुआ था। उन्होंने मराठा साम्राज्य की स्थापना की और 1675 में उनका राज्याभिषेक हुआ। 1680 में उनका निधन हुआ। टीपू सुल्तान का जन्म 1751 में हुआ था। वे मैसूर के शासक बने और 1799 में चौथे आंग्ल-मैसूर युद्ध के दौरान उनका निधन हुआ। बयान को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।
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