Cm Yogi Japan Visit: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे का अंतिम चरण बेहद यादगार रहा। यामानाशी प्रांत में मुख्यमंत्री ने दुनिया की सबसे तेज चलने वाली ‘लीनियर मैग्लेव ट्रेन’ की सवारी की। सफर के दौरान जब ट्रेन ने 500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का आंकड़ा पार किया, तो तकनीक के इस चमत्कार को देखकर मुख्यमंत्री का उत्साह देखते ही बनता था। यह ट्रेन अपनी अद्भुत गति और स्थिरता के लिए दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
You can see that I was travelling at 501 km/h.
Experienced Japan’s advanced SCMAGLEV train in Yamanashi, a next-generation high-speed system that reaches speeds of up to 500 km/h and represents the future of clean, efficient and precision mobility.
The ride was smooth and… pic.twitter.com/Xbp8ftEwv8
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) February 26, 2026
Cm Yogi Japan Visit: बुलेट ट्रेन से भी दोगुनी है इसकी ताकत
जापान की मशहूर बुलेट ट्रेनें आमतौर पर 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, लेकिन लीनियर मैग्लेव ने परिवहन के मानकों को पूरी तरह बदल दिया है। यह ट्रेन सामान्यतः 500 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती है और परीक्षण के दौरान इसने 600 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम सीमा को भी छुआ है। यदि इस गति की तुलना भारतीय शहरों के बीच की दूरी से करें, तो दिल्ली से लखनऊ तक का सफर यह ट्रेन महज एक घंटे के भीतर पूरा कर सकती है।
Cm Yogi Japan Visit: चुंबकीय शक्ति से हवा में तैरता है यह जहाज
मैग्लेव ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका पटरी से न सटना है। सेंट्रल जापान रेलवे कंपनी की यह ‘SCMaglev’ तकनीक पूरी तरह से चुंबकीय बल पर आधारित है। ट्रेन और ट्रैक के बीच लगे शक्तिशाली चुंबक इसे सतह से लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर ऊपर उठा देते हैं। इस वजह से ट्रेन पटरियों पर दौड़ने के बजाय हवा में तैरते हुए चलती है। पटरी और पहियों के बीच घर्षण यानी फ्रिक्शन न होने के कारण इसकी गति बेमिसाल हो जाती है और शोर भी न के बराबर होता है।
सुरक्षा और सुविधा का बेजोड़ संगम
हवाई जहाज जैसी रफ्तार के बावजूद इस ट्रेन में यात्रियों को रेल जैसा आरामदायक अनुभव मिलता है। चूंकि यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम पर आधारित है, इसलिए इसमें मानवीय चूक की गुंजाइश नहीं रहती और पटरी से उतरने का खतरा भी लगभग शून्य होता है। पहियों और ट्रैक के बीच रगड़ न होने के कारण इसमें रखरखाव का खर्च काफी कम आता है। साथ ही शत-प्रतिशत बिजली पर निर्भर होने के कारण यह पर्यावरण को भी प्रदूषित नहीं करती है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के जापान दौरे का अंतिम चरण बेहद यादगार रहा। यामानाशी प्रांत में मुख्यमंत्री ने दुनिया की सबसे तेज चलने वाली ‘लीनियर मैग्लेव ट्रेन’ की सवारी की। सफर के दौरान जब ट्रेन ने 500 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का आंकड़ा पार किया, तो तकनीक के इस चमत्कार को देखकर मुख्यमंत्री का उत्साह देखते ही बनता था। यह ट्रेन अपनी अद्भुत गति और स्थिरता के लिए दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी हुई है।
बुलेट ट्रेन से भी दोगुनी है इसकी ताकत
जापान की मशहूर बुलेट ट्रेनें आमतौर पर 300 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं, लेकिन लीनियर मैग्लेव ने परिवहन के मानकों को पूरी तरह बदल दिया है। यह ट्रेन सामान्यतः 500 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से चलती है और परीक्षण के दौरान इसने 600 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम सीमा को भी छुआ है। यदि इस गति की तुलना भारतीय शहरों के बीच की दूरी से करें, तो दिल्ली से लखनऊ तक का सफर यह ट्रेन महज एक घंटे के भीतर पूरा कर सकती है।
चुंबकीय शक्ति से हवा में तैरता है यह जहाज
मैग्लेव ट्रेन की सबसे बड़ी विशेषता इसका पटरी से न सटना है। सेंट्रल जापान रेलवे कंपनी की यह ‘SCMaglev’ तकनीक पूरी तरह से चुंबकीय बल पर आधारित है। ट्रेन और ट्रैक के बीच लगे शक्तिशाली चुंबक इसे सतह से लगभग 8 से 10 सेंटीमीटर ऊपर उठा देते हैं। इस वजह से ट्रेन पटरियों पर दौड़ने के बजाय हवा में तैरते हुए चलती है। पटरी और पहियों के बीच घर्षण यानी फ्रिक्शन न होने के कारण इसकी गति बेमिसाल हो जाती है और शोर भी न के बराबर होता है।
सुरक्षा और सुविधा का बेजोड़ संगम
हवाई जहाज जैसी रफ्तार के बावजूद इस ट्रेन में यात्रियों को रेल जैसा आरामदायक अनुभव मिलता है। चूंकि यह पूरी तरह से ऑटोमैटिक कंट्रोल सिस्टम पर आधारित है, इसलिए इसमें मानवीय चूक की गुंजाइश नहीं रहती और पटरी से उतरने का खतरा भी लगभग शून्य होता है। पहियों और ट्रैक के बीच रगड़ न होने के कारण इसमें रखरखाव का खर्च काफी कम आता है। साथ ही शत-प्रतिशत बिजली पर निर्भर होने के कारण यह पर्यावरण को भी प्रदूषित नहीं करती है।
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