Lifestyle: रंगों और खुशियों का त्योहार होली इस साल 4 मार्च को मनाया जाएगा। यह पर्व बसंत के आगमन और फसल कटाई की खुशी का प्रतीक है। लेकिन बाजार में मिलने वाले कई सिंथेटिक रंगों में हानिकारक केमिकल, धातु कण और अन्य तत्व पाए जाते हैं, जो त्वचा पर एलर्जी, जलन और आंखों में इरिटेशन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। ऐसे में बेहतर है कि इस बार होली प्राकृतिक और घर पर बने रंगों के साथ खेली जाए। ये रंग न सिर्फ त्वचा और बच्चों के लिए सुरक्षित होते हैं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी पूरी तरह अनुकूल हैं। खास बात यह है कि इन्हें किचन या बगीचे में मौजूद चीजों से आसानी से तैयार किया जा सकता है।
लाल रंग कैसे बनाएं
चुकंदर सबसे गहरा और सुंदर लाल रंग देता है। 2-3 चुकंदर को छीलकर कद्दूकस करें और पानी में उबाल लें या ब्लेंडर में पीसकर रस निकाल लें। छानकर इसका इस्तेमाल करें। सूखा गुलाल बनाने के लिए इस रस में कॉर्नस्टार्च या आटा मिलाकर धूप में सुखा लें। गुड़हल या लाल गुलाब की पंखुड़ियां उबालकर भी लाल रंग तैयार किया जा सकता है।
Lifestyle: पीला रंग कैसे बनाएं
हल्दी पाउडर को पानी में मिलाकर उबाल लें और छान लें। इसे बेसन, चावल के आटे या कॉर्नस्टार्च में मिलाकर पीला गुलाल तैयार करें। गेंदे के फूलों की पंखुड़ियां उबालने से भी चमकीला पीला रंग मिलता है।
हरा रंग कैसे बनाएं
पालक, धनिया या नीम की पत्तियों को धोकर पानी में उबालें। इन्हें ब्लेंड करके रस निकालें और छान लें। सूखा रंग बनाने के लिए रस को कॉर्नस्टार्च में मिलाकर धूप में सुखा दें। नीम की पत्तियां एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होती हैं, जिससे त्वचा को फायदा भी मिलता है।
Lifestyle: गुलाबी रंग कैसे बनाएं
चुकंदर के रस को थोड़ा पतला करके हल्का गुलाबी शेड पाया जा सकता है। गुलाब की पंखुड़ियां उबालकर भी सुंदर गुलाबी रंग तैयार होता है। प्याज के छिलकों को उबालने से भी हल्का गुलाबी रंग निकलता है।
नीला रंग कैसे बनाएं
बटरफ्लाई पी (अपराजिता) के फूलों को पानी में भिगोकर या उबालकर नीला रंग तैयार किया जा सकता है। इसे छानकर सीधे इस्तेमाल करें या कॉर्नस्टार्च में मिलाकर सूखा गुलाल बना लें।
नारंगी रंग कैसे बनाएं
Lifestyle: पलाश के फूलों को पानी में उबालकर प्राकृतिक नारंगी रंग तैयार होता है। हल्दी और चुकंदर के रस को मिलाकर भी नारंगी शेड पाया जा सकता है। इस बार होली पर केमिकल वाले रंगों से दूरी बनाएं और घर पर बने प्राकृतिक रंगों के साथ त्योहार मनाएं। इससे आपकी त्वचा भी सुरक्षित रहेगी और पर्यावरण भी हरा-भरा रहेगा।
ये भी पढ़ें: बच्चों के डेटा पर बड़ा सवाल, NHRC ने राज्यों और केंद्र सरकार को भेजा नोटिस






