Israel US Iran War: मिडिल-ईस्ट में ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमलों की वजह से अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा है। इस बात का खुलासा अमेरिकी अखबार की एक रिपोर्ट में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी हमलों के बाद मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिका के १३ सैन्य ठिकाने अब लगभग रहने लायक नहीं बचे हैं।
28 फरवरी को ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद हालात तेजी से बदल गए। इस घटना के बाद ईरानी सेना ने मध्य-पूर्व में मौजूद अमेरिका और उसके सहयोगियों के सैन्य तथा ऊर्जा ठिकानों को लगातार निशाना बनाना शुरू कर दिया।

ईरान को कम आंकना पड़ा भारी
ईरान पर कार्रवाई करने के बाद अमेरिका और इजरायल को शायद इतने बड़े और खतरनाक जवाबी हमले की उम्मीद नहीं थी। लेकिन ईरान ने मिसाइल और ड्रोन हमलों के जरिए अमेरिका और इजरायल के कई सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया।
इन हमलों के कारण अमेरिकी सेना को लंबे संघर्ष की स्थिति में उतरना पड़ा। लगातार हो रहे हमलों के चलते मध्य-पूर्व में कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने लगभग खाली हो गए हैं। हालात ऐसे बन गए कि कई सैनिकों को होटल, दफ्तरों और अस्थायी इमारतों में रहकर काम करना पड़ रहा है।
Israel US Iran War: मुश्किल में फंसा अमेरिका
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान के तेज पलटवार ने अमेरिकी सेना के कुछ हिस्सों को दूर से संचालित युद्ध जैसी स्थिति में पहुंचा दिया है। यानी कई स्थानों पर जमीनी सैनिक अस्थायी ठिकानों से काम कर रहे हैं, जबकि हवाई अभियान अब भी सक्रिय सैन्य अड्डों से जारी हैं।
रिपोर्ट के अनुसार मध्य-पूर्व में मौजूद १३ अमेरिकी सैन्य अड्डों में से कई को गंभीर नुकसान पहुंचा है। इनमें कुवैत के ठिकानों को सबसे ज्यादा क्षति हुई है, क्योंकि वे ईरान के काफी नजदीक हैं।अमेरिकी अधिकारियों और सैन्य कर्मियों ने बताया कि कुवैत में स्थित पोर्ट शुएबा, अली अल सलेम एयर बेस और कैंप ब्यूहरिंग जैसे ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हमले किए गए।

कई सैन्य ठिकाने पूरी तरह प्रभावित
रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरानी हमलों के कारण कई अमेरिकी सैन्य अड्डों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। इन हमलों से हवाई संचालन व्यवस्था, विमान से जुड़ा ढांचा और ईंधन आपूर्ति प्रणाली को भी नुकसान पहुंचा है।
इस स्थिति के कारण न केवल सैन्य रसद व्यवस्था प्रभावित हुई है, बल्कि वहां तैनात सैनिकों की सुरक्षा और लंबे समय तक चलने वाले सैन्य अभियानों की स्थिरता को लेकर भी गंभीर चिंताएं सामने आई हैं।
ईरान की यह कार्रवाई अमेरिका और इजरायल की सैन्य गतिविधियों के जवाब के रूप में देखी जा रही है। जवाबी हमलों में ईरान पूरे क्षेत्र में सैन्य ठिकानों, दूतावासों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बना रहा है।
इन हमलों के दौरान कतर, बहरीन और सऊदी अरब जैसे देशों में मौजूद अमेरिका से जुड़े ठिकानों पर भी मिसाइल और ड्रोन से हमले किए गए।







