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जांच के लिए CBI की जरूरत नहीं… तरुण हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच याचिका पर सुनवाई से क्यों किया इनकार?

तरुण हत्याकांड

Uttam Nagar: दिल्ली के उत्तम नगर में होली के दौरान पानी के गुब्बारे को लेकर हुए विवाद में 27 वर्षीय तरुण खटीक की हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले की जांच क्राइम ब्रांच की स्पेशल यूनिट से कराने की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हुई। याचिका सुप्रीम कोर्ट के वकील हरिशंकर जैन द्वारा दाखिल की गई थी। इसमें तरुण खटीक के परिवार को सुरक्षा देने, 5 करोड़ रुपये का मुआवजा देने और इस घटना को मॉब लिंचिंग घोषित करते हुए तहसीन पूनावाला मामले के दिशा-निर्देश लागू करने की मांग की गई थी।

जांच करने के लिए दिल्ली पुलिस सक्षम

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली भी शामिल थे, ने कहा कि दिल्ली पुलिस इस मामले की जांच करने में पूरी तरह सक्षम है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस स्तर पर जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता नहीं है। पीठ ने याचिकाकर्ता को सलाह दी कि यदि उन्हें जांच या पीड़ित परिवार की सुरक्षा को लेकर कोई शिकायत है, तो वे पहले दिल्ली पुलिस आयुक्त के समक्ष अपनी बात रखें। यदि वहां से संतोषजनक कार्रवाई नहीं होती, तो वे दिल्ली हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।

Uttam Nagar: हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं

सुनवाई के दौरान वकील विष्णु शंकर जैन ने अदालत को बताया कि होली के दौरान पानी के गुब्बारे के विवाद के बाद भीड़ द्वारा हमला किया गया, जिसमें तरुण की जान चली गई। उन्होंने अदालत से तहसीन पूनावाला फैसले के तहत राहत देने की अपील की। इस पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि केंद्रीय एजेंसियां पहले से ही कई मामलों में व्यस्त हैं और हर मामले में जांच ट्रांसफर करना उचित नहीं है। अदालत ने यह भी दोहराया कि दिल्ली पुलिस एक पेशेवर बल है और उसे अपना काम करने दिया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी नोट किया कि इस मामले से जुड़े कुछ पहलुओं पर दिल्ली हाईकोर्ट पहले से सुनवाई कर रहा है, ऐसे में शीर्ष अदालत के सीधे हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है।

गौरतलब है कि याचिका में इस घटना को साधारण हत्या के बजाय मॉब लिंचिंग करार देते हुए स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराने की मांग की गई थी, साथ ही पीड़ित परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने और मुआवजा देने की अपील भी की गई थी।

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