Amaravati: आंध्र प्रदेश की राजधानी को लेकर लंबे समय से चली आ रही असमंजस की स्थिति अब खत्म हो गई है। राज्यसभा ने गुरुवार को आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर अमरावती को राज्य की स्थायी और वैधानिक राजधानी का दर्जा दे दिया। इससे पहले इस विधेयक को लोकसभा की मंजूरी मिल चुकी थी। इस फैसले को राज्य के प्रशासनिक ढांचे और विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विधेयक से खत्म होगी कानूनी अस्पष्टता
चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि संशोधन के जरिए अमरावती को स्पष्ट रूप से राज्य की राजधानी के रूप में मान्यता दी जा रही है। इससे पहले 2014 के अधिनियम में स्थायी राजधानी को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं था, जिससे समय-समय पर भ्रम की स्थिति बनी रही। नया संशोधन इस अस्पष्टता को पूरी तरह समाप्त करेगा।
Amaravati: विकास और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि एक स्थिर और स्पष्ट राजधानी राज्य के विकास के लिए जरूरी होती है। अमरावती को वैधानिक दर्जा मिलने से निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा, बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास होगा और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता आएगी। यह फैसला आंध्र प्रदेश की आर्थिक प्रगति को नई दिशा देगा।
विधानसभा के प्रस्ताव को मिला कानूनी आधार
यह विधेयक आंध्र प्रदेश विधानसभा द्वारा 28 मार्च को पारित प्रस्ताव को भी कानूनी आधार प्रदान करता है। केंद्र सरकार ने राज्य की लोकतांत्रिक इच्छा का सम्मान करते हुए यह कदम उठाया है। सरकार का कहना है कि यह निर्णय ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक अहम पहल है, जिससे राज्य को विकास की मुख्यधारा में और मजबूती मिलेगी।
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