PM Visit to Israel: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और इज़रायल-ईरान के बीच हालिया घटनाक्रम को लेकर भारत में भी कई सवाल उठ रहे थे। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़रायल दौरे के बाद ईरान पर हुए हमले ने इस बहस को और तेज कर दिया था कि क्या भारत को इस सैन्य कार्रवाई की पहले से कोई जानकारी थी। अब केंद्र सरकार ने इस पूरे मामले पर स्पष्ट रुख सामने रखते हुए स्थिति साफ कर दी है।
हमले की पहले से नहीं थी कोई जानकारी
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में स्पष्ट किया कि इज़रायल की ओर से ईरान पर किए गए हमले के बारे में भारत के साथ कोई पूर्व चर्चा नहीं की गई थी। उन्होंने कहा कि इस कार्रवाई की जानकारी भारत सरकार को पहले से नहीं थी। यह बयान इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि पहली बार भारत ने इस मुद्दे पर अपनी स्थिति को स्पष्ट रूप से सार्वजनिक किया है।
PM Visit to Israel: मोदी दौरा और उसके बाद की घटनाएं
फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इज़रायल दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौते हुए थे। इस दौरे को रणनीतिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना गया था। लेकिन इसी के कुछ समय बाद 28 फरवरी को इज़रायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर संयुक्त हमला किए जाने से कई तरह के कयास लगाए जाने लगे थे, जिन पर अब सरकार ने विराम लगा दिया है।
PM Visit to Israel: ईरान में तबाही, ट्रंप के दावे और तेहरान का इनकार
हमलों के बाद ईरान में भारी नुकसान की खबरें सामने आई हैं। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि ईरान की परमाणु क्षमता को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है और युद्ध जल्द समाप्त हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान की ओर से युद्धविराम की मांग की गई है। हालांकि, तेहरान ने इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि वह किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर संकट, बढ़ी वैश्विक चिंता
इस तनाव के बीच ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज़ को बंद किए जाने की खबरों ने वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ा दी है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल इसी मार्ग से गुजरता है, ऐसे में इस रास्ते पर असर पड़ने से ऊर्जा संकट और गहरा सकता है। इसका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर पड़ने की आशंका है।
PM Visit to Israel: नाटो देशों का ठंडा रुख, ट्रंप की नाराजगी
दूसरी ओर, इस संघर्ष में अमेरिका को अपने सहयोगी नाटो देशों का अपेक्षित समर्थन नहीं मिल रहा है। यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस और स्पेन जैसे देशों ने खुलकर समर्थन देने से दूरी बनाई है। इससे नाराज होकर डोनाल्ड ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि वह नाटो से बाहर निकलने पर भी विचार कर सकते हैं। इस बयान ने वैश्विक राजनीति में अनिश्चितता और बढ़ा दी है।
बढ़ते तनाव के बीच भारत का संतुलित रुख
इन सब घटनाक्रमों के बीच भारत ने एक संतुलित और स्पष्ट रुख अपनाने की कोशिश की है। सरकार ने यह साफ कर दिया है कि वह किसी भी सैन्य कार्रवाई में शामिल नहीं है और उसे पहले से इसकी जानकारी भी नहीं थी। ऐसे में भारत की प्राथमिकता क्षेत्र में शांति, स्थिरता और अपने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा बनी हुई है।
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