MP NEWS: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “महाकाल : द मास्टर ऑफ टाइम” के दूसरे दिन उज्जैन जिले के डोंगला स्थित वराहमिहिर खगोलीय वेधशाला में आयोजित सत्र में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने “भारत में खगोल विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान का वर्तमान और भविष्य” विषय पर विशेषज्ञों के विचार सुने।
अंतरिक्ष उपलब्धियों पर जताया गर्व
मुख्यमंत्री ने भारत की अंतरिक्ष उपलब्धियों को देश की वैज्ञानिक क्षमता और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रयान-3 जैसी सफलताएं युवाओं को विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती हैं।
MP NEWS: चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक सफलता
सत्र में वैज्ञानिकों ने बताया कि चंद्रयान-3 मिशन के तहत “विक्रम लैंडर” की सफल सॉफ्ट लैंडिंग भारत के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि रही। इसके साथ भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला चौथा देश बना, जबकि दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में पहुंचने वाला पहला देश बना। “प्रज्ञान रोवर” ने चंद्र सतह पर महत्वपूर्ण वैज्ञानिक अध्ययन किए और लैंडिंग स्थल को “शिव शक्ति पॉइंट” नाम दिया गया।
भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों की जानकारी
वैज्ञानिकों ने इसरो के आगामी मिशनों की जानकारी देते हुए चंद्रयान-4, चंद्रयान-5 (LUPEX), वीनस ऑर्बिटर मिशन और मंगल लैंडर मिशन जैसी योजनाओं का जिक्र किया। साथ ही वर्ष 2040 तक भारतीय अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर उतारने की महत्वाकांक्षी योजना भी साझा की गई।
MP NEWS: अंतरिक्ष और पृथ्वी के संबंध पर चर्चा
स्पेस फिजिक्स विशेषज्ञों ने बताया कि आयनोस्फियर और ऊपरी वायुमंडल की गतिविधियां पृथ्वी के वातावरण और जलवायु को प्रभावित करती हैं। इनका अध्ययन अंतरिक्ष विज्ञान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
स्पेस टेक्नोलॉजी और राष्ट्रीय सुरक्षा
विशेषज्ञों ने कहा कि अंतरिक्ष तकनीक अब केवल वैज्ञानिक उपलब्धि नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का भी मजबूत आधार बन चुकी है। आधुनिक समय में ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अंतरिक्ष आधारित निगरानी प्रणालियां रक्षा क्षेत्र में अहम भूमिका निभा रही हैं।
MP NEWS: विकसित भारत में स्पेस इकोनॉमी की भूमिका
सम्मेलन में यह भी बताया गया कि स्पेस इकोनॉमी तेजी से उभरता हुआ क्षेत्र है, जिसमें निजी क्षेत्र और स्टार्टअप्स की भागीदारी बढ़ रही है। इससे रोजगार सृजन और आर्थिक विकास को भी गति मिल रही है।

विज्ञान और अध्यात्म का संगम
विशेषज्ञों ने विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय पर जोर देते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं। उज्जैन, जो महाकालेश्वर मंदिर और कर्क रेखा के कारण प्राचीन काल से खगोलीय अध्ययन का केंद्र रहा है, इस सम्मेलन के लिए एक उपयुक्त स्थान है।
MP NEWS: संतुलित विकास की जरूरत
वैज्ञानिकों का मानना है कि विज्ञान और अध्यात्म के संतुलित दृष्टिकोण से ही एक जागरूक, प्रगतिशील और संतुलित समाज का निर्माण संभव है। सम्मेलन में अंतरिक्ष अनुसंधान, राष्ट्रीय सुरक्षा और वैज्ञानिक नवाचार पर व्यापक मंथन किया गया।
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