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सात साल की उम्र में हुए हादसे के बाद भी नहीं टूटा हौसला, पायल नागा ने पैरा तीरंदाजी में जीता स्वर्ण पदक

संघर्ष से सफलता तक: पायल नागा की सुनहरी उड़ान
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Payal Naga: बागपत के धनौरा टीकरी गांव से जुड़ी 17 वर्षीय पैरा तीरंदाज पायल नागा ने अपनी मेहनत और हौसले से पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। बैंकॉक में आयोजित वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में पायल ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इस प्रतियोगिता में उन्होंने विश्व चैंपियन और ओलंपिक पदक विजेता शीतल देवी को हराकर यह उपलब्धि हासिल की।

पायल की यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि वह गंभीर हादसे के बाद भी हार नहीं मानी। एक दुर्घटना में उन्होंने अपने हाथ-पैर खो दिए थे, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने तीरंदाजी को अपना लक्ष्य बनाया और लगातार अभ्यास करके सफलता हासिल की।

हादसे ने बदली जिंदगी

पायल नागा के साथ सात साल की उम्र में एक बड़ा हादसा हुआ था। उस समय उनके पिता विजय कुमार छत्तीसगढ़ के रायपुर में एक स्टील प्लांट में काम करते थे। वहीं खेलते समय पायल ट्रेन की चपेट में आ गईं। डॉक्टरों ने उनकी जान तो बचा ली, लेकिन हादसे के कारण उनके हाथ-पैर काटने पड़े।

Payal Naga:  संघर्ष से सफलता तक: पायल नागा की सुनहरी उड़ान
संघर्ष से सफलता तक: पायल नागा की सुनहरी उड़ान

इस घटना के बाद लोगों की सहानुभूति उन्हें हर जगह महसूस होती थी। शुरुआत में यह स्थिति कठिन थी, लेकिन बाद में यही सहानुभूति उनके लिए प्रेरणा बन गई। पायल ने मन में ठान लिया कि वह अपनी अलग पहचान बनाएंगी और जीवन में कुछ बड़ा करेंगी।

Payal Naga: बागपत में शुरू हुआ नया सफर

मूल रूप से ओडिशा के बालांगीर की रहने वाली पायल नागा वर्ष 2023 से बागपत के धनौरा टीकरी गांव स्थित वीरांगना तीरंदाजी अकादमी से जुड़ी हुई हैं। यहां कोच कुलदीप वेदवान के मार्गदर्शन में उन्होंने तीरंदाजी का अभ्यास शुरू किया। कभी दिल्ली तो कभी बागपत में रहकर उन्होंने लगातार प्रशिक्षण लिया।बागपत की धरती पर उन्होंने अपने संघर्ष को ताकत में बदला और आज उसी का परिणाम है कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनका नाम गूंज रहा है।

पायल का तीरंदाजी करने का तरीका भी खास है। वह कृत्रिम पैरों के सहारे खड़ी होकर संतुलन बनाती हैं और कंधों की मदद से धनुष खींचकर निशाना साधती हैं। उनका हर शॉट यह साबित करता है कि अगर हिम्मत हो तो कोई भी मुश्किल रास्ता रोक नहीं सकती।

अब पैरालंपिक पर नजर

वर्ल्ड आर्चरी पैरा सीरीज में स्वर्ण पदक जीतने के बाद अब पायल का अगला लक्ष्य पैरालंपिक में देश के लिए पदक जीतना है। इसके लिए वह लगातार मेहनत कर रही हैं और अपनी कमजोरियों को दूर करने में लगी हैं। पायल का कहना है कि वह अपने गुरुजनों के आशीर्वाद और मेहनत से आगे बढ़ना चाहती हैं।

Payal Naga: उपलब्धियों से भरा सफर

कम समय में ही पायल नागा ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं

  • छठी पैरा नेशनल तीरंदाजी चैंपियनशिप में दो स्वर्ण पदक
  • खेलो इंडिया गेम्स में दो रजत पदक
  • सातवीं पैरा नेशनल चैंपियनशिप में एक रजत और एक कांस्य पदक
  • दुबई पैरा यूथ खेल में भारत का प्रतिनिधित्व

Payal Naga: मेहनत बनी सफलता की वजह

कोच कुलदीप वेदवान ने पायल की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें तीरंदाजी की राह दिखाई। पायल ने भी दिन-रात मेहनत कर अपने कोच के विश्वास को सही साबित किया। आज उनकी सफलता से पूरे क्षेत्र में गर्व और खुशी का माहौल है।

पायल नागा की कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादे और लगातार मेहनत से कोई भी इंसान कठिन परिस्थितियों को पार करके अपने सपनों को सच कर सकता है।

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