Rajya Sabha News: ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लाया गया महाभियोग प्रस्ताव राज्यसभा में खारिज कर दिया गया है। यह प्रस्ताव अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व में विपक्षी दलों द्वारा पेश किया गया था।
गंभीर आरोप लगाए गए थे
विपक्ष की ओर से पेश प्रस्ताव में मुख्य चुनाव आयुक्त पर कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। आरोपों में कहा गया कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग किया और कुछ राजनीतिक दलों के पक्ष में भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया। खासतौर पर बिहार और पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावी धांधली की जांच को प्रभावित करने के आरोप लगाए गए थे।
Rajya Sabha News: राज्यसभा ने क्यों खारिज किया प्रस्ताव
राज्यसभा के सभापति ने 1968 के जजेस इंक्वायरी एक्ट की धारा 3 का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। इस फैसले के साथ ही महाभियोग की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
प्रस्ताव की प्रक्रिया क्या थी
महाभियोग प्रस्ताव 12 मार्च को राज्यसभा में पेश किया गया था, जिस पर 63 सांसदों के हस्ताक्षर थे। इसके अलावा लोकसभा में भी 130 सांसदों ने इसका समर्थन जताया था। हालांकि, संवैधानिक प्रक्रिया के तहत इसे आगे बढ़ाने के लिए जरूरी शर्तें पूरी नहीं हो सकीं।
Rajya Sabha News: CEC को हटाना क्यों है मुश्किल
भारतीय संविधान के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की प्रक्रिया काफी जटिल है। यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के जजों को हटाने जैसी ही होती है। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में विशेष बहुमत यानी उपस्थित सदस्यों के दो-तिहाई समर्थन की आवश्यकता होती है।
सरकार बनाम विपक्ष आमने-सामने
इस फैसले के बाद सरकार और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया है, जबकि सरकार का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह संवैधानिक नियमों के तहत लिया गया है।
Rajya Sabha News: आगे भी जारी रहेगा विवाद
इस घटनाक्रम के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनावी प्रक्रिया को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले चुनावों में भी सियासी बहस का बड़ा केंद्र बन सकता है।
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