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वो 14 साल पुराना एक गलती… जानिए क्यों जमींदोज होगा मेरठ का सबसे बड़ा बाजार?

Meerut Central Market
Meerut Central Market

Meerut Central Market: मेरठ का ऐतिहासिक सेंट्रल मार्केट, जो दशकों से शहर के व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है, अब अवैध निर्माण के खिलाफ चल रही कार्रवाई की वजह से सुर्खियों में है। प्रशासन ने बिना अनुमति चल रही दुकानों, स्कूलों और अन्य संस्थानों को सील करना शुरू कर दिया है। हालात ऐसे हो गए कि एक इमारत पर बुलडोजर चलते ही कई व्यापारी अपनी दुकानों को खुद ही तोड़ने लगे।

पूरे मामले की जड़  क्या है?

इस पूरे मामले की जड़ एक घटना में है। साल 2012 में RTI एक्टिविस्ट लोकेश खुराना की शिकायत पर आवास विकास विभाग की टीम भूखंड संख्या 661/6 पर अवैध निर्माण को रोकने गई थी। इसी दौरान एक व्यापारी ने विभाग के अधिकारी को थप्पड़ मार दिया। इसके बाद खुराना ने सेंट्रल मार्केट से जुड़े दस्तावेज जुटाना शुरू किया। जांच में पता चला कि मार्केट में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण कर व्यवसाय चलाए जा रहे थे। इसके बाद उन्होंने इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की। जांच आगे बढ़ते ही एक-एक कर अवैध निर्माण उजागर होने लगे। स्थिति यह हो गई कि व्यापारी खुद एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत करने लगे और पूरा मामला और गहराता गया।

कार्रवाई का असर

लोकेश खुराना का मकसद भ्रष्टाचार उजागर करना था, लेकिन इस कार्रवाई की चपेट में व्यापारी और अधिकारी दोनों ही आ गए। अब वर्षों से चल रहा व्यापार पूरी तरह ठप हो गया है और लोग अपनी दुकानों को खुद ही गिराने पर मजबूर हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए 44 संपत्तियों को सील करने का आदेश दिया। इनमें 6 अस्पताल, 5 स्कूल और कुछ बैंक भी शामिल हैं। इसके अलावा हाई कोर्ट ने संबंधित विभाग से 9 तारीख तक जवाब मांगा है। वहीं सीलिंग के आदेश के बाद सेंट्रल मार्केट में तनाव का माहौल है। विपक्षी दलों के नेता मौके पर पहुंचकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, जबकि व्यापारी भी सत्ता पक्ष के खिलाफ नाराजगी जाहिर करते दिख रहे हैं।

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