Home » राजनीति » महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का दांव उल्टा तो नहीं पड़ गया ? क्या हैं उसकी चुनौतियां….

महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का दांव उल्टा तो नहीं पड़ गया ?  क्या हैं उसकी चुनौतियां…. 

New Delhi: महिला आरक्षण बिल पर विपक्ष का दांव उल्टा तो नहीं पड़ गया ? क्या हैं उसकी चुनौतियां....
Spread the love
New Delhi:  महिला आरक्षण विधेयक के विरोध को भले ही विपक्ष सरकार के खिलाफ अपनी कारगर रणनीति मान रहा हो, लेकिन राजनीतिक पंडितों का मानना है कि विधेयक का पारित न होना भाजपा नहीं, बल्कि विपक्ष के लिए नुकसानदायक हो सकता है।अब भाजपा सदन की लड़ाई को सड़क पर लड़ने का ऐलान कर चुकी है।भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने संसद में बिल के गिर जाने के तुरंत बाद सड़कों पर उतरने का ऐलान किया है।

ये है भाजपा की रणनीति

भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि देशव्यापी आंदोलन के जरिये जनता को बताया जाएगा कि विपक्षी दलों ने किस तरह महिलाओं के हक के रास्ते में रोड़ा अटकाया है।नवीन ने बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की और उन राज्यों की विधानसभाओं में विपक्ष के रवैये के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पास करने की बात कही।
नितिन नवीन ने जिस लड़ाई का ऐलान किया है, उससे साफ है कि भाजपा अब इस मुद्दे को बड़े ही आक्रामक तरीके से जनता के बीच ले जाने की रणनीति में है।ऐसा लगता है कि विपक्ष ने उसे जनता के बीच जाने का एक ऐसा मुद्दा थमा दिया है, जिसकी काट करना विपक्ष के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।

New Delhi: बिल का गिरना बना बड़ा मुद्दा

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक महिला आरक्षण बिल का गिरना बहुत बड़ा सियासी मुद्दा बन चुका है। आगामी लोकसभा चुनाव में यह प्रमुख मुद्दा होगा।विपक्ष के सामने न सिर्फ भविष्य में इस मुद्दे पर चुनौती है, बल्कि उसे मौजूदा समय में भी इससे जूझना पड़ेगा। उसे सोचना होगा कि अभी पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु जैसे राज्यों में विधानसभा के लिए मतदान होना है। जाहिर है कि वहां भाजपा जनता के बीच यह संदेश दे सकती है कि विपक्ष महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने के खिलाफ है। भाजपा को इसमें तर्क देने की भी जरूरत नहीं है, उसके कार्यकर्ता जनता के बीच जाकर सीधे-सीधे बता सकते हैं कि एनडीए सरकार संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण चाहती थी, लेकिन विपक्ष ने इसका पुरजोर विरोध किया। नतीजा यह हुआ कि महिला आरक्षण विधेयक गिर गया।

New Delhi: विपक्ष की बढ़ी चुनौतियां

हालांकि कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल यह संदेश दे रहे हैं कि सरकार की मंशा महिलाओं को उचित प्रतिनिधित्व देने की नहीं, बल्कि जनता को गुमराह करने की है।वह इसकी इसकी आड़ में भेदभावपूर्ण परिसीमन लागू कर दक्षिणी राज्यों के साथ अन्याय करना चाहती है।विपक्षी पार्टियां अपने हिसाब से तर्क देकर जनता के बीच जा सकती हैं, लेकिन उन्हें यह ध्यान भी रखना होगा कि उनके तर्कों को भाजपा खारिज करने की पूरी कोशिश करेगी। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि बिल पर चर्चा के दौरान सपा प्रमुख अखिलेश की मांग थी कि ओबीसी और अल्पसंख्यक महिलाओं को इस बिल में आरक्षण दिया जाए, जबकि गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया कि संविधान में मुस्लिमों के लिए कोई आरक्षण का प्रावधान नहीं है। अखिलेश ने कहा कि सरकार जाति जनगणना से बचना चाहती है, तो अमित शाह ने जवाब दिया कि इस जनगणना में जाति जनगणना भी होगी। सपा के धर्मेंद्र यादव ने कहा कि जनगणना में जाति का कॉलम नहीं है, तो इस पर अमित शाह ने जवाब दिया कि आदमी की जाति होती है, घर की जाति नहीं होती है।अभी घरों की गणना हो रही है, उसके बाद लोगों की गणना होगी, जिसमें जाति भी शामिल रहेगी। जाहिर है कि ऐसे में विपक्ष को जनता तक अपनी बात समझाने के लिए सटीक तर्क खोजने होंगे और भाजपा के रणनीतिकारों के तर्कों को भी काटना होगा। जो भी महिला आरक्षण बिल का विरोध विपक्ष के लिए एक बड़ी सियासी चुनौती बन गया है।राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो विपक्ष ने बिल का विरोध कर अपने लिए आफत मोल ले ली है। उसका यह दांव उल्टा पड़ सकता है।
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest
0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments