Women Reservation Bill: लोकसभा में महिला आरक्षण संशोधन विधेयक पारित नहीं हो सका, जिसके बाद सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाज़ी तेज हो गई। इस मुद्दे पर कांग्रेस की सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि उनकी पार्टी हमेशा से महिलाओं को आरक्षण देने के समर्थन में रही है।
महिला आरक्षण पर कांग्रेस का स्पष्ट रुख
पत्रकारों से बातचीत में प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि महिला आरक्षण के मुद्दे पर कांग्रेस का रुख बिल्कुल साफ है। उनके अनुसार, विपक्ष ने लोकतंत्र की रक्षा करते हुए सरकार की एक योजना को सफल नहीं होने दिया। उनका आरोप था कि सरकार इस विधेयक के साथ परिसीमन को जोड़कर अपना अलग राजनीतिक उद्देश्य पूरा करना चाहती थी, जिसे विपक्ष ने समझते हुए विरोध किया।

पुराने कानून को लागू करने की मांग
उन्होंने कहा कि वर्ष २०२३ में जो महिला आरक्षण कानून पारित हुआ था, उसी को लागू किया जाना चाहिए। यदि सरकार वास्तव में महिलाओं को आरक्षण देना चाहती है, तो उस कानून को तुरंत लागू करे। कांग्रेस इस कदम में पूरी तरह समर्थन देगी। साथ ही उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि इस विषय पर संसद का विशेष सत्र बुलाया जाए, ताकि स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कौन महिलाओं के अधिकारों के साथ खड़ा है।
Women Reservation Bill: रणजीत रंजन का सरकार पर आरोप
कांग्रेस सांसद रणजीत रंजन ने कहा कि यह महिलाओं का वास्तविक विधेयक नहीं था। उन्होंने बताया कि वर्ष २०२३ में महिला आरक्षण से जुड़ा विधेयक सभी दलों की सहमति से पारित हुआ था। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को तमिलनाडु की महिलाओं से माफी मांगनी चाहिए, क्योंकि जिस कानून को पहले ही पारित किया जा चुका था, उसका नोटिफिकेशन सरकार ने बहुत देर से जारी किया।
विशेष सत्र के उद्देश्य पर सवाल
रणजीत रंजन ने आरोप लगाया कि 16 अप्रैल 2026 से शुरू किया गया विशेष सत्र महिला आरक्षण के लिए नहीं था। उनके अनुसार, सरकार ने इसमें परिसीमन का मुद्दा जोड़कर पूरे प्रस्ताव को कमजोर करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की मंशा सही होती, तो 2023 में ही इसे लागू कर दिया जाता। अब पहले जनगणना, फिर परिसीमन और उसके बाद आरक्षण की बात करना लोगों को भ्रमित करना है।

डिंपल यादव का ओबीसी आरक्षण पर बयान
समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि यह दलित और ओबीसी विरोधी रवैया है। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने ओबीसी महिलाओं को आरक्षण देने की मांग की थी, क्योंकि यह आधी आबादी से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है। लेकिन सरकार ने इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उनका कहना था कि ऐसे फैसले समाज में विभाजन और अविश्वास पैदा करते हैं।
प्रियंका चतुर्वेदी का सरकार पर निशाना
शिवसेना (यूबीटी) की नेता प्रियंका चतुर्वेदी ने कहा कि जनता अब सब समझ रही है। उनके अनुसार, सरकार का असली उद्देश्य महिलाओं को आरक्षण देना नहीं, बल्कि इसे अन्य मुद्दों से जोड़कर टालना है।
Women Reservation Bill: 33 प्रतिशत आरक्षण पर सवाल
प्रियंका चतुर्वेदी ने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में सभी दलों की सहमति से एक कानून पारित हुआ था, जिसका उद्देश्य महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देना था। उस समय भी विपक्ष ने कहा था कि इसे जनगणना और परिसीमन से न जोड़ा जाए, लेकिन सरकार ने उनकी बात नहीं मानी। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के चुनावों में न तो महिलाओं को 33 प्रतिशत टिकट दिए गए और न ही सरकार ने इस दिशा में कोई स्पष्ट इच्छाशक्ति दिखाई।
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