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ट्रम्प का बड़ा ऐलान: इजराइल–लेबनान सीजफायर 3 हफ्ते और बढ़ा, मिडिल ईस्ट में राहत की उम्मीद

ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख

Middle East Crisis: डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में इजराइल और लेबनान के राजदूत स्तर की दूसरी बातचीत के बाद घोषणा की कि दोनों देशों के बीच चल रहा सीजफायर अब तीन हफ्तों के लिए बढ़ा दिया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि वह जल्द ही इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ आउन को व्हाइट हाउस बुलाने की योजना बना रहे हैं।

ईरान पर ट्रम्प का सख्त लेकिन साफ रुख

ट्रम्प ने ईरान के साथ संभावित समझौते पर कहा कि कोई भी डील तभी होगी जब वह अमेरिका के हित में होगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में कोई तय समय सीमा नहीं है और वह जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लेंगे। साथ ही उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा, क्योंकि उनके अनुसार पारंपरिक हमलों से ही पहले ही काफी नुकसान हो चुका है, इसलिए न्यूक्लियर हथियारों की जरूरत नहीं है।

Middle East Crisis:  ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख
ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख

पिछले 24 घंटे के बड़े अपडेट

पिछले 24 घंटों में कई अहम घटनाएं सामने आई हैं। ट्रम्प ने अमेरिकी सेना को आदेश दिया है कि होर्मुज में जो छोटे जहाज बारूदी सुरंगें बिछा रहे हैं, उन्हें तुरंत नष्ट किया जाए। वहीं भारत सरकार ने अपने नागरिकों को ईरान की यात्रा से बचने की सख्त सलाह दी है और मौजूदा हालात को जोखिमपूर्ण बताया है। इसी दौरान ईरान ने पहली बार होर्मुज जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलना शुरू किया है, जिसे बैंक में जमा भी किया गया है, हालांकि इसकी राशि सार्वजनिक नहीं की गई है। दूसरी ओर, ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी पर बर्लिन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लाल रंग फेंका गया। साथ ही अमेरिकी सीनेट में ट्रम्प की युद्ध शक्तियों को सीमित करने का प्रस्ताव पांचवीं बार खारिज हो गया, जिसमें 51 वोट विरोध में और 46 समर्थन में पड़े।

तेहरान में इराकी मिलिशिया की मौजूदगी का दावा

एक वीडियो सामने आया है जिसमें दावा किया गया है कि तेहरान की सड़कों पर इराकी झंडे के साथ मिलिशिया तैनात हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान पहले भी अपने सहयोगी इराकी मिलिशिया समूहों का इस्तेमाल आंतरिक हालात को संभालने और विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए करता रहा है।

मुजतबा खामेनेई की स्थिति को लेकर रिपोर्ट

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई जीवित हैं और होश में हैं, लेकिन वे सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आ रहे हैं। बताया गया है कि वे गंभीर रूप से घायल हैं और उनकी भूमिका धीरे-धीरे कम की जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया है कि उनका एक पैर तीन बार ऑपरेशन से गुजर चुका है और अब उन्हें कृत्रिम पैर की जरूरत हो सकती है। उनके एक हाथ की भी सर्जरी हुई है, जबकि चेहरे और होंठ गंभीर रूप से झुलस गए हैं, जिससे बोलने में कठिनाई हो रही है और भविष्य में प्लास्टिक सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख
ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख

सत्ता का बदलता ढांचा और गोपनीय सिस्टम

चोटों के कारण अब ईरान की सत्ता प्रणाली भी बदल गई है। मुजतबा खामेनेई ने सार्वजनिक रूप से कोई संदेश नहीं दिया है और उनकी सुरक्षा को देखते हुए उनसे मिलने की प्रक्रिया बेहद गोपनीय हो गई है। संदेश लिफाफों में बंद करके कार और मोटरसाइकिल के जरिए उनके ठिकाने तक पहुंचाए जाते हैं और जवाब भी इसी तरीके से लौटते हैं। सीनियर अधिकारी भी उनसे मिलने से बचते हैं क्योंकि उन्हें इजराइल के हमले का खतरा रहता है। अब सत्ता का केंद्र धीरे-धीरे सेना की ओर खिसक गया है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स के कमांडर युद्ध, कूटनीति और सुरक्षा मामलों में प्रमुख भूमिका निभा रहे हैं।

होर्मुज जलमार्ग पर ईरान की सख्त शर्त

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने चेतावनी दी है कि जब तक उसकी लगभग 11 ट्रिलियन डॉलर की जमी हुई संपत्ति जारी नहीं की जाती, तब तक होर्मुज जलमार्ग पर स्थिति सामान्य नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अगर 48 घंटे के भीतर कोई ठोस प्रस्ताव नहीं आता, तो सीजफायर टूट सकता है और तनाव और बढ़ सकता है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान की कुल 50 से 100 अरब डॉलर की संपत्ति विदेशों में फंसी हुई है, जो अमेरिका और उसके सहयोगियों के प्रतिबंधों के कारण कई देशों जैसे दक्षिण कोरिया, चीन, इराक और यूरोपीय बैंकों में अटकी है।

एशिया से हथियार हटाने पर अमेरिका में चिंता

अमेरिकी सेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने चिंता जताई है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र से हथियार हटाकर मिडिल ईस्ट भेजने से अन्य क्षेत्रों की सुरक्षा कमजोर हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के साथ संघर्ष शुरू होने के बाद अमेरिका ने करीब 1100 लंबी दूरी की स्टेल्थ क्रूज मिसाइलें इस्तेमाल की हैं, जिनमें टॉमहॉक, पैट्रियट इंटरसेप्टर और अन्य मिसाइलें शामिल हैं। इससे हथियारों का स्टॉक तेजी से घटा है और इसे फिर से भरने में कई साल लग सकते हैं।

ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख
ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख

होर्मुज में ईरान की सीमित लेकिन प्रभावी ताकत

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने हाल ही में दो व्यापारिक जहाजों पर कब्जा किया है, जिसमें तेज छोटी नावों का इस्तेमाल किया गया। हालांकि ईरान की नियमित नौसेना कमजोर मानी जाती है, लेकिन रिवोल्यूशनरी गार्ड के पास अब भी हजारों छोटी तेज नावें और ड्रोन मौजूद हैं, जो समूह में हमला करके बड़ा नुकसान पहुंचा सकती हैं।

ट्रम्प और युद्ध की कानूनी उलझन

अमेरिकी संविधान के अनुसार, किसी भी युद्ध को 60 दिनों के भीतर संसद से मंजूरी लेनी होती है। ट्रम्प ने युद्ध 28 फरवरी को शुरू किया और 2 मार्च को संसद को सूचित किया, जिससे उन्हें 1 मई से पहले मंजूरी लेनी होगी। हालांकि उनके पास पर्याप्त समर्थन नहीं दिख रहा है क्योंकि कुछ रिपब्लिकन सांसद भी विरोध में हैं। इतिहास में कई बार अमेरिकी राष्ट्रपति इस सीमा को चुनौती दे चुके हैं, लेकिन इस बार मामला राजनीतिक रूप से जटिल हो सकता है।

ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख
ईरान पर ट्रम्प का सख्त रुख

शेयर बाजार में तेजी के कारण

तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर होने और युद्ध के तनाव के बावजूद वैश्विक शेयर बाजार बढ़ रहे हैं। इसकी वजह ऊर्जा और हथियार कंपनियों के शेयरों में बढ़त, बड़ी टेक कंपनियों के मजबूत मुनाफे, AI में निवेश, और कंप्यूटर आधारित ऑटोमैटिक निवेश सिस्टम हैं, जो बाजार बढ़ने पर और ज्यादा निवेश करते हैं।

भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और सरकार की भूमिका

भारत सरकार ने कहा है कि ईरान द्वारा कब्जे में लिए गए जहाजों में मौजूद 22 भारतीय क्रू पूरी तरह सुरक्षित हैं। सरकार लगातार ईरान के संपर्क में है और भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने की कोशिश कर रही है।

ट्रम्प के अन्य बयान और वैश्विक घटनाएं

ट्रम्प ने ईरानी जहाज मामले को “टॉप सीक्रेट” बताया और अधिक जानकारी देने से इनकार किया। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया में अब लोग राजनीतिक घटनाओं पर सट्टा लगाने लगे हैं, जिससे दुनिया एक “कैसीनो” जैसी बनती जा रही है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाड़ियों के साथ किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाएगा और वे फीफा वर्ल्ड कप में भाग ले सकते हैं।

कुवैत ने खोला एयरस्पेस

कुवैत ने सुरक्षा कारणों से बंद किए गए अपने एयरस्पेस को दोबारा खोल दिया है और उड़ानों को फिर से शुरू करने की तैयारी कर ली है।ट्रम्प ने स्पष्ट कहा कि ईरान संघर्ष में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा और ऐसे हथियार किसी भी देश को नहीं इस्तेमाल करने चाहिए।

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