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पवन खेड़ा ने हाईकोर्ट फैसले को सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती

Pawan Khera

Pawan Khera: कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद अब सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है। उन्होंने अपनी याचिका में उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए शीघ्र सुनवाई की मांग की है। इस मामले ने राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा को तेज कर दिया है, क्योंकि यह मामला एक संवेदनशील आरोप और उससे जुड़े दस्तावेजों की वैधता से जुड़ा हुआ है।

उच्च न्यायालय के फैसले को दी चुनौती

पवन खेड़ा ने सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में कहा है कि गुवाहाटी उच्च न्यायालय द्वारा अग्रिम जमानत खारिज करने का निर्णय पुनर्विचार योग्य है। इससे पहले उच्च न्यायालय ने यह कहते हुए उनकी याचिका खारिज कर दी थी कि उनके द्वारा प्रस्तुत दस्तावेज प्रथम दृष्टया संदिग्ध और फर्जी प्रतीत होते हैं। न्यायालय का मानना था कि मामले की जांच के लिए पुलिस को हिरासत में पूछताछ की आवश्यकता हो सकती है।

Pawan Khera: पहले भी नहीं मिली राहत

इससे पहले तेलंगाना उच्च न्यायालय ने उन्हें अस्थायी राहत देते हुए एक सप्ताह की अग्रिम जमानत प्रदान की थी, ताकि वे उचित न्यायालय में याचिका दाखिल कर सकें। हालांकि, इस आदेश को चुनौती दिए जाने के बाद सर्वोच्च न्यायालय ने उस राहत पर रोक लगा दी थी। बाद में सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम सुरक्षा बढ़ाने से भी इनकार कर दिया, जिससे पवन खेड़ा को नई कानूनी रणनीति अपनानी पड़ी।

क्या है पूरा मामला

मामले की शुरुआत उस समय हुई जब पवन खेड़ा ने असम के मुख्यमंत्री की पत्नी से जुड़े कुछ आरोप सार्वजनिक किए थे। उन्होंने दावा किया था कि संबंधित व्यक्ति के पास कई देशों के पासपोर्ट और विदेश में अघोषित संपत्ति है, जिसका विवरण चुनावी हलफनामे में नहीं दिया गया। इन आरोपों के बाद संबंधित पक्ष की ओर से उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई। जांच के दौरान अदालत ने पाया कि जिन दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए, वे पहले ही संदिग्ध घोषित किए जा चुके हैं। इसी आधार पर न्यायालय ने अग्रिम जमानत देने से इनकार किया और पुलिस को आगे की जांच के लिए स्वतंत्रता दी। अब सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पवन खेड़ा को इस मामले में राहत मिलती है या नहीं। फिलहाल, यह मामला न्यायिक प्रक्रिया में है और सभी पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की दिशा तय होगी।

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