Guru Pradosh Vrat: देवों के देव महादेव और माता पार्वती की पूजा को समर्पित प्रदोष व्रत इस बार 14 मई, गुरुवार को रखा जाएगा। गुरुवार के दिन पड़ने की वजह से इसे गुरु प्रदोष व्रत या बृहस्पति प्रदोष व्रत कहा जाता है। इस बार का प्रदोष व्रत कई शुभ संयोग लेकर आ रहा है, जिससे इसका महत्व और भी बढ़ गया है। पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग रहने वाला है और साथ ही अभिजीत मुहूर्त भी मिलेगा, जिसे किसी भी शुभ काम की शुरुआत के लिए बहुत शुभ माना जाता है। हालांकि इस दिन राहुकाल और पंचक जैसे अशुभ समय का ध्यान रखना जरूरी रहेगा।
गुरु प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर महीने की त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष व्रत रखा जाता है। जब त्रयोदशी तिथि प्रदोष काल में होती है, तब भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। गुरुवार को आने वाले इस प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को धर्म, ज्ञान, शिक्षा, सुख-समृद्धि और आर्थिक लाभ की प्राप्ति होती है। साथ ही भगवान शिव, देवगुरु बृहस्पति और भगवान विष्णु की कृपा भी प्राप्त होती है।

जानिए सूर्योदय, सूर्यास्त और प्रदोष काल का समय
14 मई को सूर्योदय सुबह 5 बजकर 31 मिनट पर होगा, जबकि सूर्यास्त शाम 7 बजकर 4 मिनट पर रहेगा। प्रदोष काल शाम 7 बजकर 4 मिनट से रात 9 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। वहीं त्रयोदशी तिथि 14 मई की सुबह 11 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर 15 मई की सुबह 8 बजकर 31 मिनट तक रहेगी।
Guru Pradosh Vrat: पूरे दिन रहेगा सर्वार्थ सिद्धि योग
इस दिन भक्त अभिजीत मुहूर्त में भगवान शिव की पूजा, रुद्राभिषेक और व्रत कर सकते हैं। पूरे दिन सर्वार्थ सिद्धि योग होने की वजह से पूजा-पाठ, मंत्र जाप और नए शुभ कार्यों के लिए समय बेहद अच्छा माना जा रहा है। हालांकि राहुकाल और पंचक के दौरान किसी नए काम की शुरुआत करने से बचना चाहिए।

शुभ मुहूर्त में करें पूजा और नए कार्य
अगर शुभ मुहूर्त की बात करें तो अभिजीत मुहूर्त सुबह 11 बजकर 51 मिनट से दोपहर 12 बजकर 45 मिनट तक रहेगा। विजय मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 33 मिनट से 3 बजकर 27 मिनट तक रहेगा। अमृत काल रात 8 बजकर 20 मिनट से 9 बजकर 49 मिनट तक रहेगा। वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 7 मिनट से 4 बजकर 49 मिनट तक रहेगा, जिसे पूजा और नए कार्यों के लिए बहुत शुभ माना जाता है।
राहुकाल और पंचक में रखें सावधानी
अशुभ समय की बात करें तो राहुकाल दोपहर 1 बजकर 59 मिनट से 3 बजकर 41 मिनट तक रहेगा। पंचक सुबह 5 बजकर 31 मिनट से रात 10 बजकर 34 मिनट तक प्रभावी रहेगा। यमगंड काल सुबह 5 बजकर 31 मिनट से 7 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। गुलिक काल सुबह 8 बजकर 54 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगा, जबकि दुर्मुहूर्त सुबह 10 बजकर 2 मिनट से 10 बजकर 56 मिनट तक रहेगा।
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