Trump-Xi Talks: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच कई अहम वैश्विक मुद्दों पर लंबी और महत्वपूर्ण बातचीत हुई। ट्रंप ने इस चर्चा को “ऐतिहासिक” बताते हुए कहा कि इससे दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच तनाव कम करने में मदद मिल सकती है। बातचीत में ताइवान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), व्यापार, साइबर सुरक्षा, ईरान और परमाणु हथियारों में कमी जैसे मुद्दे शामिल रहे।
ताइवान मुद्दे पर सबसे ज्यादा चर्चा
अलास्का के एंकरेज जाते समय एयरफोर्स वन में पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि दोनों नेताओं के बीच सबसे ज्यादा चर्चा ताइवान को लेकर हुई। उनके मुताबिक, शी जिनपिंग ने स्पष्ट किया कि चीन ताइवान की आजादी की किसी भी कोशिश के खिलाफ है और ऐसा होने पर बड़ा टकराव पैदा हो सकता है।
ट्रंप ने बताया कि शी जिनपिंग ने अमेरिका द्वारा ताइवान को हथियार बेचने पर भी चिंता जताई। साथ ही उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यदि भविष्य में कोई सैन्य संघर्ष होता है तो क्या अमेरिका ताइवान की रक्षा करेगा। इस पर ट्रंप ने कहा कि वह इस विषय पर सार्वजनिक रूप से कुछ नहीं कहना चाहते।
Trump-Xi Talks: एआई और साइबर सुरक्षा पर सहयोग के संकेत
दोनों नेताओं के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को लेकर भी विस्तार से चर्चा हुई। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और चीन एआई के सुरक्षित और जिम्मेदार इस्तेमाल को लेकर मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि एआई स्वास्थ्य, चिकित्सा, सैन्य और तकनीकी क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके साथ साइबर और जैविक खतरों को नियंत्रित करना भी जरूरी होगा।
ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि दोनों देशों के बीच साइबर ऑपरेशन्स और जासूसी के मुद्दों पर खुलकर बातचीत हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका भी चीन की गतिविधियों पर नजर रखता है।
व्यापार और बोइंग सौदे पर चर्चा
व्यापारिक संबंधों को लेकर ट्रंप ने दावा किया कि चीन बोइंग विमानों की बड़ी खरीद करने जा रहा है। उनके अनुसार, यह सौदा 200 से अधिक विमानों का हो सकता है और भविष्य में इसकी संख्या 750 तक पहुंच सकती है। उन्होंने कहा कि इससे अमेरिकी कंपनियों को बड़ा लाभ मिलेगा।
Trump-Xi Talks: ईरान और परमाणु हथियारों पर भी बनी सहमति
ट्रंप ने बताया कि दोनों नेताओं ने परमाणु निरस्त्रीकरण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि शी जिनपिंग इस बात से सहमत हैं कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए। साथ ही अमेरिका, चीन और रूस के बीच परमाणु हथियारों में कमी लाने को लेकर भी बातचीत हुई।
हालांकि दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र को लेकर मतभेद बने हुए हैं, लेकिन इस बातचीत को अमेरिका-चीन संबंधों में संवाद बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
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