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कोलकाता नमाज विवाद पर वारिस पठान का बड़ा बयान, ‘हिंदू करे तो ठीक, नमाज पर क्यों आपत्ति?’

Namaz Controversy: कोलकाता के राजाबाजार इलाके में सड़क पर नमाज पढ़ने को लेकर छिड़े विवाद पर अब वारिस पठान ने प्रतिक्रिया दी है। AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने कहा कि अगर कोई मुसलमान शुक्रवार को 5-10 मिनट सड़क पर नमाज पढ़ता है तो इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुस्लिम समुदाय के धार्मिक कार्यों को लेकर भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है।

मीडिया बातचीत करते हुए कहा 

वारिस पठान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कोई भी व्यक्ति शौक से सड़क पर नमाज नहीं पढ़ता, बल्कि मस्जिदों में जगह कम होने के कारण लोग बाहर नमाज अदा करने को मजबूर होते हैं। उन्होंने कहा, “अगर मुसलमान सड़क पर कुछ मिनट नमाज पढ़ ले तो विवाद खड़ा हो जाता है, लेकिन दूसरे धर्मों के सार्वजनिक आयोजनों पर उतना सवाल नहीं उठाया जाता।”

Namaz Controversy
                                            Namaz Controversy

Namaz Controversy: ‘संविधान सभी को बराबरी का अधिकार देता है’

पठान ने कहा कि देश का संविधान सभी नागरिकों को अपने धर्म का पालन करने की आजादी देता है। उन्होंने दावा किया कि कई बार मुस्लिमों को सड़क पर नमाज पढ़ने पर कार्रवाई का सामना करना पड़ता है, जबकि दूसरे धार्मिक आयोजनों को लेकर इतनी सख्ती नहीं दिखाई जाती।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि ट्रेनों और सार्वजनिक स्थानों पर पूजा-पाठ या गरबा जैसे आयोजन भी होते हैं, लेकिन उन पर विवाद नहीं खड़ा किया जाता। AIMIM प्रवक्ता ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता को बराबरी के आधार पर देखा जाना चाहिए।

क्या है राजाबाजार विवाद?

दरअसल, शुक्रवार को राजाबाजार इलाके में कुछ लोगों द्वारा सड़क पर नमाज अदा करने की कोशिश के बाद तनाव की स्थिति बन गई थी। प्रशासन की ओर से सार्वजनिक सड़कों पर धार्मिक आयोजन और रास्ता जाम करने पर रोक के बावजूद नमाज पढ़े जाने की सूचना के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया। घटना के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच बहस और झड़प की खबरें भी सामने आईं। हालांकि बाद में अतिरिक्त पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती के बाद स्थिति को नियंत्रण में कर लिया गया।

Namaz Controversy: राजनीतिक बयानबाजी तेज

इस मुद्दे को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में बयानबाजी तेज हो गई है। विपक्षी दल कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक स्थलों के उपयोग को मुद्दा बना रहे हैं, जबकि AIMIM और कुछ अन्य नेता इसे धार्मिक स्वतंत्रता और समान अधिकारों से जोड़कर देख रहे हैं।

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