Bakrid 2026: बकरीद (ईद-उल-अजहा) से पहले देश के कई हिस्सों में पशुओं की कुर्बानी को लेकर विवाद तेज हो गई है। इसी बीच, जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने कहा है कि कुर्बानी इस्लाम की एक महत्वपूर्ण इबादत है। इसलिए हर मुसलमान अपने हिस्से की कुर्बानी अदा करने का हर संभव प्रयास करे। मौलाना महमूद मदनी ने ईद को लेकर कुछ सुझाव दिए हैं। जमीयत उलेमा-ए-हिंद की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है कि कुर्बानी इस्लाम की एक महत्वपूर्ण इबादत है, जो हर साहिबे हैसियत मुसलमान पर वाजिब है।
कुर्बानी के दिन कोई विकल्प नहीं
कुर्बानी के दिनों में इसका कोई विकल्प नहीं है। इसलिए प्रत्येक साहिबे हैसियत मुसलमान अपने हिस्से की कुर्बानी अदा करने का हर संभव प्रयास करे। मौलाना ने अपील की है कि कुर्बानी करने वाले सभी लोग सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों और स्थानीय प्रशासन के नियमों का पूर्णतः पालन करें। कानूनन प्रतिबंधित जानवरों की कुर्बानी से पूर्णतः परहेज किया जाए। उन्होंने कहा कि साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाए। जानवरों के अवशेषों को सड़कों, गलियों या नालियों में हरगिज न फेंका जाए, बल्कि उन्हें प्लास्टिक बैग आदि में सुरक्षित रखकर निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। इस संबंध में नगरपालिका और सफाई कर्मचारियों के साथ पूरा सहयोग किया जाए। साथ ही पूरी कोशिश की जाए कि हमारे किसी कार्य से दूसरों को किसी प्रकार की तकलीफ, असुविधा या परेशानी न पहुंचे।
Bakrid 2026: कानून को अपने हाथों में न ले
मौलाना महमूद मदनी ने अपने बयान में कहा है, जानवरों की खरीद-फरोख्त तथा उनके परिवहन के दौरान सभी कानूनी नियमों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पूर्ण पालन किया जाए। साथ ही कुर्बानी की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर साझा करने से पूरी तरह बचा जाए। अगर किसी स्थान पर सांप्रदायिक तत्वों की ओर से किसी प्रकार की उकसावेबाजी, धमकी या उत्पीड़न का सामना करना पड़े, तो धैर्य, संयम और समझदारी से काम लिया जाए तथा मामले की तत्काल शिकायत संबंधित पुलिस थाना या प्रशासन के पास दर्ज कराई जाए। किसी भी परिस्थिति में कानून को अपने हाथ में न लिया जाए। इसके साथ ही, मुस्लिमों से अपील की गई है कि अगर किसी स्थान पर कुर्बानी में किसी प्रकार की रुकावट या कठिनाई उत्पन्न हो रही हो, तो तत्काल जमीयत उलेमा-ए-हिंद अथवा उसकी स्थानीय इकाइयों से संपर्क किया जाए।








