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अमेरिका की ईरान पर बड़ी कार्रवाई: चार ड्रोन ढेर, एक और हमले से पहले ही नाकाम

अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा

US Iran Conflict: अमेरिका ने बुधवार को एक बार फिर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की। अमेरिकी सरकार ने इसे “रक्षात्मक कदम” बताया है। इस सप्ताह में यह दूसरी बार है जब अमेरिकी सेना ने ईरान पर हमला किया है।

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, ईरानी सेना की कुछ गतिविधियां आक्रामक दिखाई दे रही थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई की गई। अधिकारियों ने बताया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के चार ड्रोन को मार गिराया। इसके अलावा, उस सैन्य ठिकाने को भी निशाना बनाया गया जहां से पांचवें ड्रोन को लॉन्च करने की तैयारी चल रही थी।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बढ़ा तनाव

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इन ड्रोन से ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ को खतरा था। यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह का तनाव वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर असर डाल सकता है।

US Iran Conflict: अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा
अमेरिका-ईरान तनाव फिर बढ़ा

ट्रंप बोले- कमजोर स्थिति में बातचीत कर रहा है ईरान

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान अब “कमजोर स्थिति” में बातचीत कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव उनकी ईरान नीति को प्रभावित नहीं करेंगे।

कैबिनेट बैठक की शुरुआत में ट्रंप ने भरोसा जताया कि अमेरिका और ईरान के बीच जल्द समझौता हो सकता है। उन्होंने कहा कि पिछले सप्ताह के आखिर में दोनों देशों के बीच बातचीत में काफी प्रगति हुई थी। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि समझौता अभी पूरी तरह अंतिम रूप में नहीं पहुंचा है।

US Iran Conflict: समझौते का मुख्य उद्देश्य

ट्रंप ऐसे समझौते की कोशिश कर रहे हैं जिससे ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ दोबारा सामान्य रूप से खुल सके। साथ ही वह यह दिखाना चाहते हैं कि ईरान की परमाणु क्षमता को काफी कमजोर कर दिया गया है।अगर ऐसा समझौता हो जाता है, तो लगभग तीन महीने से चल रहे तनाव और संघर्ष को खत्म करने का रास्ता खुल सकता है।

कई मुद्दों पर अभी भी असमंजस

हालांकि प्रस्तावित समझौते को लेकर अभी कई सवाल बाकी हैं। कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर फिलहाल फैसला नहीं हुआ है और उन्हें बाद के लिए टाल दिया गया है।

इसी कारण ट्रंप को अपने कुछ समर्थकों और रिपब्लिकन नेताओं की आलोचना भी झेलनी पड़ रही है। आलोचकों का कहना है कि ईरान के कट्टरपंथी नेता इस संघर्ष से कमजोर जरूर होंगे, लेकिन भविष्य में वे और ज्यादा आक्रामक रवैया अपना सकते हैं।

चुनाव से पहले बढ़ी रिपब्लिकन पार्टी की चिंता

यह पूरा मामला ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव करीब हैं। इन चुनावों से यह तय होगा कि कांग्रेस पर किस पार्टी का नियंत्रण रहेगा।

रिपब्लिकन नेताओं को डर है कि बढ़ती महंगाई और ईंधन की ऊंची कीमतों की वजह से जनता में नाराजगी बढ़ रही है। इससे चुनावों में पार्टी को नुकसान हो सकता है।हालांकि ट्रंप ने चुनावी असर की बात को पूरी तरह खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “वे सोच रहे थे कि इस मामले को मध्यावधि चुनाव तक टाल देंगे, लेकिन मुझे चुनावों की कोई परवाह नहीं है।”

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