Merrut Victim Justice: एक तरफ उत्तर प्रदेश पुलिस महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़े-बड़े दावे करती है, मिशन शक्ति जैसे अभियानों का प्रचार किया जाता है और बेटियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताई जाती है। लेकिन दूसरी तरफ कुछ ऐसे मामले भी सामने आते हैं, जो इन दावों की हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर देते हैं। ऐसा ही एक मामला मेरठ के मवाना क्षेत्र की रहने वाली एक पीड़िता का है।आरोप है कि पीड़िता के साथ रेप जैसी जघन्य वारदात हुई, जिसने उसकी जिंदगी को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पीड़िता का आरोप है कि इस मामले में कृष्णा कुमार, अनुज भड़ाना और वीरेंद्र नाम के तीन लोगों ने उसके साथ दरिंदगी की। इतना ही नहीं, पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद भी आरोपी लगातार उसे परेशान कर रहे हैं और मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।घटना के बाद जहां उसे त्वरित न्याय और सुरक्षा मिलने की उम्मीद थी, वहीं आज वह न्याय के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।
घटना के बाद शुरू हुआ न्याय का लंबा इंतजार
पीड़िता का कहना है कि उसके साथ हुई इस भयावह घटना ने उसे मानसिक, सामाजिक और भावनात्मक रूप से झकझोर कर रख दिया। लेकिन घटना से भी ज्यादा दर्द उसे इस बात का है कि इतने समय बाद भी उसे इंसाफ नहीं मिल सका।पीड़िता का आरोप है कि वह लगातार अधिकारियों के कार्यालयों, पुलिस थानों और संबंधित विभागों के चक्कर काट रही है, लेकिन उसकी फरियाद को गंभीरता से नहीं सुना जा रहा। कभी जांच का हवाला दिया जाता है, कभी कार्रवाई का आश्वासन दिया जाता है और कभी प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने को कहा जाता है। पीड़िता का आरोप है कि उसे सिर्फ भरोसे मिले, लेकिन न्याय अब भी दूर दिखाई दे रहा है।
Merrut Victim Justice: परिवार की जिम्मेदारियों के बीच लड़ रही है न्याय की लड़ाई
पीड़िता बताती है कि वह अपने परिवार की जिम्मेदारियों को भी निभाती है। घर की जरूरतों को पूरा करने और परिवार को संभालने के साथ-साथ वह न्याय की लड़ाई भी लड़ रही है। लेकिन लगातार हो रही देरी और अधिकारियों के चक्कर लगाते-लगाते अब उसका हौसला टूटने लगा है।उसका कहना है कि हर बार वह उम्मीद लेकर संबंधित अधिकारियों के पास जाती है, लेकिन वापस लौटते समय उसके हाथ सिर्फ आश्वासन ही लगते हैं। ऐसे में उसके मन में यह सवाल लगातार उठता है कि आखिर उसे न्याय कब मिलेगा।
Merrut Victim Justice: आरोपियों पर लगातार परेशान करने का आरोप
पीड़िता का यह भी आरोप है कि जिन लोगों पर उसने गंभीर आरोप लगाए हैं, वे आज भी उसे परेशान कर रहे हैं। पीड़िता का कहना है कि घटना के बाद उसे सुरक्षा और न्याय मिलने के बजाय डर और दबाव का सामना करना पड़ रहा है। इससे उसका और उसके परिवार का मानसिक तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है।यदि पीड़िता के आरोप सही हैं, तो यह सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि कानून व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़ा बेहद गंभीर विषय है।
महिलाओं की सुरक्षा के दावों पर उठ रहे सवाल
यह मामला महिलाओं की सुरक्षा और न्याय व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े करता है। जब एक रेप पीड़िता को अपनी शिकायत पर कार्रवाई के लिए महीनों तक भटकना पड़े, तो स्वाभाविक रूप से व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं।महिलाओं की सुरक्षा के दावे तभी सार्थक साबित होंगे, जब पीड़िताओं को समय पर सुनवाई और निष्पक्ष न्याय मिलेगा। समाज के लोगों का भी मानना है कि ऐसे मामलों में प्रशासन को संवेदनशीलता दिखाते हुए त्वरित कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि पीड़िता को बार-बार अपने दर्द को दोहराने और न्याय के लिए संघर्ष करने के लिए मजबूर न होना पड़े।पीड़िता की मांग सिर्फ इतनी है कि उसके मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जाए। उसका कहना है कि वह किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रही, बल्कि सिर्फ अपने लिए न्याय चाहती है।आज पीड़िता की कहानी सिर्फ उसकी व्यक्तिगत लड़ाई नहीं रह गई है, बल्कि यह उन तमाम पीड़िताओं की आवाज बन गई है जो न्याय की उम्मीद में सिस्टम के दरवाजे खटखटाती हैं।अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर एक रेप पीड़िता को इंसाफ के लिए और कितनी लंबी लड़ाई लड़नी पड़ेगी? क्या उसकी पुकार जिम्मेदार अधिकारियों तक पहुंचेगी या फिर वह यूं ही न्याय की आस में भटकती रहेगी? इसका जवाब आने वाला समय ही देगा।
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