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टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, 19 सांसदों ने अलग गुट की मान्यता मांगी

TMC: टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह, सांसदों ने की अलग गुट की मांग

TMC: पश्चिम बंगाल में हालिया चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर राजनीतिक संकट गहराता नजर आ रहा है। पार्टी में पहले विधायकों की बगावत के बाद अब लोकसभा सांसदों के एक बड़े समूह ने भी नेतृत्व के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। टीएमसी के 19 सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अलग संसदीय गुट के रूप में मान्यता देने की मांग की है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और पार्टी नेतृत्व की चुनौतियां बढ़ा दी हैं।

दसवीं अनुसूची के तहत अलग गुट की मांग

बागी सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को भेजे गए पत्र में संविधान की दसवीं अनुसूची के पैरा 4 और पैरा 4(2) का हवाला देते हुए अलग गुट के रूप में मान्यता देने का अनुरोध किया है। सांसदों का दावा है कि वे लोकसभा में टीएमसी के कुल सांसदों की संख्या के दो-तिहाई से अधिक हैं। ऐसे में दल-बदल विरोधी कानून के तहत उनकी सदस्यता पर कोई खतरा नहीं होगा। इसके साथ ही उन्होंने सदन में अलग बैठने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की भी मांग की है।

TMC: काकोली घोष के नेतृत्व में बगावत

इस बागी गुट का नेतृत्व पूर्व मुख्य सचेतक काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं। उनके साथ शताब्दी रॉय, युसूफ पठान, सायोनी घोष, माला रॉय, दीपक अधिकारी, जून मालिया, प्रसून बनर्जी और रचना बनर्जी समेत कुल 19 सांसद शामिल बताए जा रहे हैं। इन नेताओं में कई ऐसे चेहरे भी हैं जिन्हें कभी पार्टी नेतृत्व का करीबी माना जाता था।

पहले विधायकों में भी हो चुकी है टूट

सांसदों की बगावत से पहले टीएमसी विधायक दल में भी बड़ा विभाजन देखने को मिला था। ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में 58 विधायकों ने अलग गुट बनाया था, जिसे विधानसभा अध्यक्ष से मान्यता भी मिल चुकी है। इस फैसले को चुनौती देते हुए टीएमसी ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन राहत नहीं मिल सकी। अब सांसदों की बगावत ने पार्टी के सामने नया राजनीतिक संकट खड़ा कर दिया है।

 

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