Anti Paper Leak Bill: लोकसभा के बाद अब राज्यसभा ने भी सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से पारित कर दिया है। विपक्ष के हंगामे और वॉकआउट के बीच केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विधेयक सदन में पेश किया। अब यह विधेयक राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। राष्ट्रपति की स्वीकृति मिलने के बाद यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा। सरकार का दावा है कि नए प्रावधानों से पेपर लीक और परीक्षा संबंधी संगठित अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।
राज्यसभा में चर्चा के बाद विधेयक को मिली मंजूरी
राज्यसभा में विधेयक पेश करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस कानून पर लोकसभा में करीब 10 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई थी। उन्होंने बताया कि व्यवधानों के बावजूद सरकार ने विधेयक को पारित कराया और अब इसे उच्च सदन की भी मंजूरी मिल गई है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं की पारदर्शिता तथा विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए लगातार सुधार कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की अवधारणा वर्षों पहले सामने आई थी, लेकिन इसे लागू करने का कार्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने किया। उन्होंने उम्मीद जताई कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के इस प्रयास को सभी दलों का समर्थन मिलेगा।
Anti Paper Leak Bill: विपक्ष ने कानून की प्रभावशीलता पर उठाए सवाल
विधेयक पर चर्चा के दौरान राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि केवल सजा और जुर्माना बढ़ा देने से पेपर लीक जैसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। उनके अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए, लेकिन दोषियों को प्रभावी सजा नहीं मिली। खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के लगातार विरोध और बढ़ते जनदबाव के बाद यह संशोधन विधेयक लेकर आई है। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
पेपर लीक पर कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान
संशोधन विधेयक में पेपर लीक और सार्वजनिक परीक्षाओं से जुड़े अपराधों के लिए सख्त दंड का प्रावधान किया गया है। कानून के तहत पेपर लीक के दोषियों को अधिकतम 10 वर्ष तक की कैद और 50 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है। वहीं, यदि संगठित गिरोह परीक्षा में धांधली या पेपर लीक में शामिल पाए जाते हैं तो उनके लिए कम से कम 7 वर्ष की सजा और अधिकतम 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी कार्रवाई संभव होगी।
Anti Paper Leak Bill: स्पेशल टास्क फोर्स और फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था
विधेयक में केंद्र सरकार को परीक्षा संबंधी अपराधों की जांच के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (STF) गठित करने का अधिकार भी दिया गया है। साथ ही नई धारा 12ए के तहत ऐसे मामलों की जांच दो महीने के भीतर पूरी करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, इन मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें नामित की जाएंगी। आरोपपत्र दाखिल होने के बाद तीन महीने के भीतर मुकदमे का निपटारा करने का प्रावधान रखा गया है। प्रत्येक फास्ट ट्रैक कोर्ट में विशेष लोक अभियोजकों की नियुक्ति भी की जाएगी। अब राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून पूरे देश में लागू होगा और सार्वजनिक परीक्षाओं में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








