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डेटा भारत का, AI अमेरिका का: आखिर क्यों बढ़ रही है देश के भविष्य को लेकर चिंता?

अमेरिका ने AI मॉडल्स पर लगाया ताला, भारत पर असर

AI Digital Economy: अमेरिका ने एक बड़ा फैसला लिया है। उसने अपनी AI कंपनी ऐंथ्रॉपिक के दो ताकतवर मॉडल, मिथॉस और फेबल 5, को दूसरे देशों को देने पर पूरी तरह रोक लगा दी है। अमेरिकी सरकार के आदेश के बाद ऐंथ्रॉपिक में काम करने वाले विदेशी कर्मचारी भी इन मॉडलों का इस्तेमाल नहीं कर सकते। विवाद से बचने के लिए कंपनी ने दोनों मॉडल पूरी दुनिया में बंद कर दिए हैं।

AI बन चुका है नई महाशक्ति

आज दुनिया की सबसे बड़ी ताकत बंदूक या तेल नहीं, AI है। चैटजीपीटी और क्लॉड जैसे मॉडल डॉक्टर की रिपोर्ट पढ़ लेते हैं, कंप्यूटर कोड लिख देते हैं, ईमेल तैयार कर देते हैं और पूरी फिल्म तक बना देते हैं। महीनों का काम अब मिनटों में हो रहा है। सेनाएं रणनीति बनाने में AI का सहारा ले रही हैं। फैक्ट्रियों में रोबॉट इंसानों की जगह ले रहे हैं। जिसके पास बेहतर AI है, वही रेस में सबसे आगे है।

AI Digital Economy: मिथॉस और फेबल 5 पर रोक क्यों लगी

ऐंथ्रॉपिक का मिथॉस मॉडल किसी भी सॉफ्टवेयर की कमजोरी पकड़ लेता था। उसने बैंक और सेना के सिस्टम तक की खामियां उजागर कर दीं। खतरे को देखते हुए कंपनी ने फेबल 5 बनाया, जिसमें सुरक्षा लिमिट लगाई गई ताकि वह बैंकिंग या डिफेंस सिस्टम में दखल न दे सके। फिर भी अमेरिकी सरकार ने दोनों मॉडलों के एक्सपोर्ट पर बैन लगा दिया। इससे साफ है कि AI अब कच्चे तेल और सोने जैसा कीमती संसाधन बन गया है।

AI Digital Economy:  अमेरिका ने AI मॉडल्स पर लगाया ताला, भारत पर असर
अमेरिका ने AI मॉडल्स पर लगाया ताला, भारत पर असर

दूसरी तरफ डेटा का खेल

AI और रोबॉट को इंसानों जैसा काम सिखाने के लिए लाखों घंटे का रियल वीडियो चाहिए। इसे ईगोसेंट्रिक डेटा कहा जाता है। भारत में कंपनियां फैक्ट्री मजदूरों और घरों में काम करने वाली महिलाओं को सिर पर छोटा कैमरा लगाकर काम करने के लिए 250 रुपये प्रति घंटा दे रही हैं। कपड़ा सिलना, पैकिंग करना, सब्जी काटना, बर्तन धोना हर चीज रिकॉर्ड हो रही है। इसी डेटा से विदेशी रोबॉट सीख रहे हैं कि इंसान काम कैसे करता है। अमेरिका और यूरोप में कानून सख्त हैं और डेटा महंगा है। इसलिए सस्ता डेटा भारत जैसे देशों से लिया जा रहा है।

भारत के लिए दोहरी चोट

एक तरफ अमेरिका अपना एडवांस AI मॉडल हमें देने से इनकार कर रहा है। दूसरी तरफ हमारे लोगों के काम का डेटा लेकर अपने रोबॉट को ट्रेन कर रहा है। कल को जब ये रोबॉट पूरी तरह तैयार हो जाएंगे, तो अमेरिका को भारत की फैक्ट्रियों से सामान बनवाने की जरूरत ही नहीं रहेगी। हम सिर्फ डेटा देने वाले बनकर रह जाएंगे और मुनाफा कोई और कमाएगा।

अब भारत को क्या करना चाहिए

टैरिफ की लड़ाई अब छोटी लगती है। असली जंग AI और डेटा की है। अगर अमेरिका अपने चारों ओर दीवार खड़ी कर रहा है, तो भारत को भी जवाब देना होगा। पहला कदम है अपने डेटा की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाना। दूसरा कदम है अपने AI मॉडल तेजी से तैयार करना। भारत ने काम शुरू कर दिया है, लेकिन अमेरिका और चीन हमसे काफी आगे हैं। अगर हम आज नहीं चेते, तो कल सिर्फ डिजिटल दुनिया के मजदूर बनकर रह जाएंगे।

Written by- Mansi Sharma

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