CWG 2026: भारत के युवा जूडो खिलाड़ी हर्ष सिंह ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में शानदार प्रदर्शन करते हुए इतिहास रच दिया। दिल्ली के 23 वर्षीय हर्ष ने पुरुषों के 60 किलोग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर न केवल देश का गौरव बढ़ाया, बल्कि कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी भी बन गए। फाइनल मुकाबले में उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के जोशुआ काट्ज को 10-0 से हराकर एकतरफा जीत दर्ज की। खास बात यह रही कि यह हर्ष सिंह का कॉमनवेल्थ गेम्स में पहला ही मुकाबला था और उन्होंने अपने डेब्यू को यादगार बना दिया।
60 किलोग्राम वर्ग में शानदार प्रदर्शन
हर्ष सिंह ने पूरे टूर्नामेंट में दमदार खेल दिखाया। उन्होंने शुरुआती दौर से ही अपने विरोधियों पर दबदबा बनाए रखा और किसी भी मुकाबले में उन्हें ज्यादा संघर्ष नहीं करना पड़ा। राउंड ऑफ-16 में उन्होंने चिकोंडी काथेवेरा को 100-0 से हराया। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में वानुअतु के एलन मोंटौएल को मात देकर सेमीफाइनल में प्रवेश किया। सेमीफाइनल में ऑस्ट्रेलिया के पेड्रो कार्लोस अंटुन नेटो को हराकर उन्होंने फाइनल का टिकट हासिल किया। खिताबी मुकाबले में एक बार फिर ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी जोशुआ काट्ज उनके सामने थे, जिन्हें हर्ष ने 10-0 से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम कर लिया।
CWG 2026: घरेलू प्रतियोगिताओं से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
हर्ष सिंह लंबे समय से राष्ट्रीय स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करते आ रहे हैं। इसी प्रदर्शन के दम पर उन्होंने राष्ट्रीय चयन प्रक्रिया के जरिए भारतीय टीम में जगह बनाई। हालांकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनका अनुभव सीमित रहा है। कॉमनवेल्थ गेम्स से पहले हर्ष ने कजाकिस्तान बारीसी ग्रैंड स्लैम 2026 में सातवां स्थान हासिल किया था। इसके अलावा उन्होंने टोक्यो ग्रैंड स्लैम, ताशकंद ग्रैंड स्लैम और एशियन सीनियर चैंपियनशिप जैसी प्रतिष्ठित प्रतियोगिताओं में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।
भारत के लिए ऐतिहासिक रहा जूडो अभियान
हर्ष सिंह की जीत से पहले भारत की अस्मिता डे ने महिला 48 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर देश का खाता खोला था। उन्होंने कनाडा की हेइडी क्वैच को फाइनल में हराकर गोल्ड अपने नाम किया। हर्ष सिंह के स्वर्ण के साथ भारत ने पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स के जूडो मुकाबलों में दो स्वर्ण पदक जीतने का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया। यह उपलब्धि भारतीय जूडो के बढ़ते स्तर और खिलाड़ियों की मेहनत का बड़ा प्रमाण मानी जा रही है। युवा खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन से भविष्य में ओलंपिक और विश्वस्तरीय प्रतियोगिताओं में भी भारत की उम्मीदें और मजबूत हुई हैं।
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