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17 जून का पंचांग: तृतीया से चतुर्थी का बदलाव, पुष्य नक्षत्र और चंद्र गोचर से बनेगा खास संयोग

17 जून का पंचांग

17 June Panchang: धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से 17 जून 2026, बुधवार का दिन विशेष महत्व रखता है। इस दिन ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष में तिथि, नक्षत्र, योग और चंद्रमा की स्थिति में कई महत्वपूर्ण परिवर्तन देखने को मिलेंगे। दिन की शुरुआत तृतीया तिथि से होगी, लेकिन रात में चतुर्थी तिथि का आरंभ हो जाएगा, जिससे दिन के प्रभाव में बदलाव आएगा।

तृतीया के बाद शुरू होगी चतुर्थी तिथि

पंचांग के अनुसार, शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि रात 9 बजकर 38 मिनट तक रहेगी। इसके बाद चतुर्थी तिथि लग जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार तृतीया तिथि पूजा-पाठ, दान-पुण्य और अन्य शुभ कार्यों के लिए अनुकूल मानी जाती है। वहीं चतुर्थी तिथि शुरू होने के बाद नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

इस दिन दोपहर 1 बजकर 36 मिनट तक पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा। इसके बाद पुष्य नक्षत्र का आरंभ होगा। ज्योतिष शास्त्र में पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ नक्षत्रों में गिना जाता है। यह नक्षत्र सुख, समृद्धि, उन्नति और शुभ कार्यों के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है।

17 June Panchang: चंद्रमा करेगा राशि परिवर्तन

ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति के अनुसार चंद्रमा सुबह 8 बजकर 13 मिनट तक मिथुन राशि में रहेगा। इसके बाद वह कर्क राशि में प्रवेश करेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के मुताबिक चंद्रमा का यह गोचर लोगों की मानसिक स्थिति, भावनाओं और दैनिक जीवन पर प्रभाव डाल सकता है।

17 जून को रात 8 बजकर 50 मिनट तक ध्रुव योग रहेगा। यह योग स्थिरता, सफलता और सकारात्मक परिणामों का संकेत माना जाता है। इसके बाद व्याघात योग शुरू होगा। ज्योतिष के अनुसार व्याघात योग के दौरान महत्वपूर्ण फैसले लेने और नए कार्यों की शुरुआत करने से बचना बेहतर माना जाता है।

जानिए राहुकाल और अन्य अशुभ समय

इस दिन राहुकाल दोपहर 12 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस दौरान मांगलिक और नए कार्यों की शुरुआत नहीं की जाती है।

  • यमगण्ड काल: सुबह 7 बजकर 25 मिनट से 9 बजकर 6 मिनट तक
  • कुलिक काल: सुबह 10 बजकर 47 मिनट से दोपहर 12 बजकर 27 मिनट तक
  • दुर्मुहूर्त: दोपहर 12 बजे से 12 बजकर 54 मिनट तक

शुभ कार्यों के लिए ये रहेंगे बेहतर मुहूर्त

इस दिन अमृत काल दो बार रहेगा। पहला अमृत काल सुबह 5 बजकर 40 मिनट से 7 बजकर 8 मिनट तक और दूसरा सुबह 11 बजकर 28 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा।वहीं ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 9 मिनट से 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। यह समय पूजा-पाठ, ध्यान, जप और आध्यात्मिक साधना के लिए सबसे श्रेष्ठ माना जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रमा का समय

  • सूर्योदय: सुबह 5 बजकर 45 मिनट
  • सूर्यास्त: शाम 7 बजकर 10 मिनट
  • चंद्रोदय: सुबह 7 बजकर 47 मिनट
  • चंद्रास्त: रात 9 बजकर 44 मिनट

17 जून, बुधवार को तृतीया से चतुर्थी तिथि का परिवर्तन, पुनर्वसु से पुष्य नक्षत्र में प्रवेश, चंद्रमा का मिथुन से कर्क राशि में गोचर और ध्रुव योग के बाद व्याघात योग का आरंभ होगा। ऐसे में दिनभर ग्रह-नक्षत्रों की बदलती स्थिति धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से इस दिन को खास बनाती है।