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राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद बड़ा एक्शन! ट्रस्ट में होंगे बदलाव, जिम्मेदारियों का होगा नया बंटवारा

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़े बदलाव की तैयारी

Ayodhya Ram Mandir: अयोध्या के राम मंदिर के प्रबंधन में जल्द बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, मंदिर में चढ़ावे की गिनती, संपत्तियों के रखरखाव और श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था को नए सिरे से व्यवस्थित करने की तैयारी की जा रही है। इसके लिए अनुभवी अधिकारियों और संघ से जुड़े लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी जा सकती हैं।

मंदिर में चढ़ावा चोरी की घटना सामने आने के बाद प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा शुरू हुई है। इसी दौरान यह भी पता चला कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित ट्रस्ट में अब तक ट्रस्टियों की जिम्मेदारियां लिखित रूप से निर्धारित नहीं की गई हैं। साथ ही, कामकाज का कोई आधिकारिक बंटवारा भी नहीं किया गया है।

कब-क्या हुआ? पूरे मामले की टाइमलाइन

7 जून (रविवार)
पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने राम मंदिर के चढ़ावे से 5 से 7.5 करोड़ रुपये की चोरी का आरोप लगाया।

8 जून (सोमवार)
अखिलेश यादव ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर उठाया और कोर्ट से मामले का स्वतः संज्ञान लेने की मांग की।

9 जून (मंगलवार)
भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर मामले की CBI और ED से जांच कराने की मांग की।

9 जून (मंगलवार)
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने ट्रस्ट सदस्यों के साथ बैठक की। चढ़ावे की राशि, उसकी गिनती और लेखा-जोखा व्यवस्था पर चर्चा हुई।

10 जून (बुधवार)
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से मामले की रिपोर्ट मांगी। वहीं ट्रस्ट महासचिव चंपत राय ने चोरी के सभी आरोपों को खारिज कर दिया।

11 जून (गुरुवार)
मंदिर के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह का बयान सामने आया। उन्होंने CCTV फुटेज को लेकर सवाल उठाए और आरोप लगाए।

13 जून (शनिवार)
उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन कर जांच के आदेश दिए।

15 जून से 19 जून तक
SIT ने ट्रस्ट के 100 से अधिक कर्मचारियों से पूछताछ की और वर्ष 2021 से अब तक के दस्तावेजों की जांच की।

20 जून (शनिवार)
SIT ने चढ़ावा गिनने वाले सात कर्मचारियों से पूछताछ की और इसके बाद जांच टीम लखनऊ रवाना हो गई।

Ayodhya Ram Mandir:  राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़े बदलाव की तैयारी
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़े बदलाव की तैयारी

जिम्मेदारियों का होगा स्पष्ट निर्धारण

सूत्रों के मुताबिक, मंदिर के संचालन के लिए एक नया प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा। इसके तहत हर अधिकारी और कर्मचारी की जिम्मेदारी लिखित रूप में तय की जाएगी। यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि किस अधिकारी के पास कौन-सा कार्य होगा, कौन किसे रिपोर्ट करेगा और किसकी जवाबदेही किस स्तर पर होगी।

सिर्फ कर्मचारियों की ही नहीं, बल्कि ट्रस्ट के सभी सदस्यों और पदेन सदस्यों की भूमिकाएं भी लिखित रूप से निर्धारित की जाएंगी। चढ़ावे की गिनती और वित्तीय लेन-देन जैसे महत्वपूर्ण कार्य अब किसी एक व्यक्ति के भरोसे नहीं रहेंगे। इन प्रक्रियाओं में कई लोगों की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी ताकि भविष्य में किसी तरह की अनियमितता की संभावना कम हो सके।

Ayodhya Ram Mandir: SIT रिपोर्ट के बाद बनेगी SOP

ट्रस्ट से जुड़े सूत्रों का कहना है कि विशेष जांच दल (SIT) की रिपोर्ट आने के बाद मंदिर प्रबंधन, वित्तीय लेन-देन और संपत्तियों की सुरक्षा के लिए एक स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार की जाएगी।इस SOP में सभी जिम्मेदारियों का स्पष्ट बंटवारा होगा। किसी एक व्यक्ति को सभी अधिकार देने के बजाय विभिन्न स्तरों पर जिम्मेदारियां निर्धारित की जाएंगी। बताया जा रहा है कि SOP तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

1500 लोगों की टीम, लेकिन जवाबदेही तय नहीं

राम मंदिर में लगभग 1500 लोग कार्यरत हैं। इनमें बड़ी संख्या RSS स्वयंसेवकों की भी है। उन्हें मंदिर की ओर से वेतन दिया जाता है, लेकिन उनकी लिखित जवाबदेही अब तक तय नहीं की गई है।मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेंद्र मिश्रा ने भी इस स्थिति को स्वीकार किया है।

SIT ने 6 दिन में किन-किन लोगों से पूछताछ की?

पहला दिन: SIT ने चंपत राय, गोपाल राव और 8 से 10 कर्मचारियों से करीब 6 घंटे तक पूछताछ की।
दूसरा दिन: चंपत राय और गोपाल राव से दोबारा लगभग 4-4 घंटे तक सवाल-जवाब किए गए।
तीसरा दिन: बैंक अधिकारियों और चढ़ावा गिनने वाली एजेंसी से पूछताछ की गई। साथ ही रिकॉर्ड और दस्तावेजों की जांच हुई।
चौथा दिन: अनिल मिश्रा और तृप्ति यादव से पूछताछ की गई। दान और नियुक्तियों से जुड़े मामलों की भी जांच की गई।
पांचवां दिन: चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव के साथ SBI अधिकारियों से भी पूछताछ की गई।
छठा दिन:  करीब 150 संदिग्ध एंट्रियों और पहचान से जुड़े मामलों की समीक्षा की गई। बताया गया कि लगभग 25 मामलों में कार्रवाई के संकेत मिले हैं।

पूछताछ में शामिल लोगों को जांच पूरी होने तक बिना अनुमति बाहर न जाने की चेतावनी भी दी गई।

चंपत राय, गोपाल राव और अनिल मिश्रा की भूमिका बदल सकती है

सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा राशि को लेकर उठे सवालों के बाद संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी भी सक्रिय हो गए हैं। संघ फिलहाल SIT की रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। रिपोर्ट आने के बाद संबंधित लोगों की जिम्मेदारी तय की जा सकती है।

ट्रस्ट के प्रमुख चेहरों में शामिल चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को उनके वर्तमान पदों से हटाया जा सकता है या उनकी जिम्मेदारियों में बदलाव किया जा सकता है। उनकी जगह नए लोगों को ट्रस्ट और प्रबंधन व्यवस्था में शामिल किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है।हालांकि संघ के कुछ पदाधिकारियों का मानना है कि गोपाल राव ने लंबे समय तक मंदिर की सेवा की है और उनकी निष्ठा पर कोई सवाल नहीं उठाया जा सकता। इसलिए यह कोशिश रहेगी कि उनके बारे में यह संदेश न जाए कि उन्हें किसी वित्तीय गड़बड़ी या गबन के कारण हटाया गया है।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़े बदलाव की तैयारी
राम मंदिर चढ़ावा विवाद में बड़े बदलाव की तैयारी

नृपेंद्र मिश्रा ने भी जताई चिंता

मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और ट्रस्ट के पदेन सदस्य नृपेंद्र मिश्रा ने भी प्रबंधन व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के सदस्यों की जवाबदेही तय नहीं है और उनके बीच काम का स्पष्ट बंटवारा भी नहीं किया गया है।हालांकि उन्होंने ट्रस्ट महासचिव चंपत राय को क्लीनचिट देते हुए उन्हें ईमानदार, निष्ठावान और मंदिर के प्रति समर्पित बताया।

नृपेंद्र मिश्रा ट्रस्ट के सबसे सक्रिय पदेन सदस्यों में गिने जाते हैं। उनके बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि व्यवस्थाओं में इतनी खामियां थीं तो उन्हें पहले क्यों नहीं सुधारा गया।जब इस संबंध में उनसे सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि SIT की रिपोर्ट आने से पहले वह इस विषय पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

वैष्णो देवी मॉडल पर बन सकता है बोर्ड

सूत्रों के अनुसार, मंदिर प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्था में कमियां सामने आने के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। कई सेवानिवृत्त और वर्तमान अधिकारी चाहते हैं कि मंदिर संचालन के लिए किसी वर्तमान या रिटायर्ड IAS अधिकारी को मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया जाए।

उनकी निगरानी में मंदिर प्रबंधन के लिए एक अलग कार्यालय स्थापित करने का सुझाव भी दिया जा रहा है। इसके लिए वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड का उदाहरण सामने रखा जा रहा है।यदि ऐसा मॉडल लागू होता है, तो मंदिर के प्रशासन और संचालन में सरकार और नौकरशाही की भूमिका पहले से अधिक मजबूत हो सकती है।