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पश्चिम बंगाल में सोमवार को आएगा UCC बिल: उत्तराखंड, गुजरात और असम के बाद अब बंगाल की बारी

बंगाल में UCC बिल सोमवार को होगा पेश

West Bengal UCC Bill: पश्चिम बंगाल सरकार सोमवार को विधानसभा में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) से जुड़ा बिल पेश कर सकती है। विधानसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी, जिसकी अध्यक्षता स्पीकर रथिंद्र बोस कर रहे हैं, ने UCC बिल का ड्राफ्ट सभी विधायकों को ईमेल के जरिए भेजने और सोमवार को सदन में चर्चा के लिए रखने का फैसला किया है। अगर यह बिल विधानसभा से पास हो जाता है, तो पश्चिम बंगाल भी गुजरात, उत्तराखंड और असम जैसे राज्यों की सूची में शामिल हो जाएगा, जहां सभी समुदायों के लिए एक समान व्यक्तिगत कानून लागू किए गए हैं। बीजेपी ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में वादा किया था कि सत्ता में आने के छह महीने के अंदर पश्चिम बंगाल में UCC लागू किया जाएगा।

विधानसभा बैठक में लिया गया फैसला

पश्चिम बंगाल विधानसभा के एक सदस्य ने बताया कि UCC बिल पेश करने का फैसला गुरुवार शाम विधानसभा परिसर में हुई बैठक में लिया गया। इस बैठक की अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष रथिंद्र बोस ने की थी। बैठक कुछ समय तक चली, जिसमें सोमवार को सदन में पेश किए जाने वाले विधेयकों को लेकर चर्चा हुई। तय किया गया कि सोमवार को विधानसभा में कुल पांच विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनमें UCC बिल सबसे महत्वपूर्ण विधेयकों में से एक होगा।

West Bengal UCC Bill:  बंगाल में UCC बिल सोमवार को होगा पेश
बंगाल में UCC बिल सोमवार को होगा पेश

West Bengal UCC Bill: चर्चा में शामिल होंगे नेता

बैठक में यह भी फैसला लिया गया कि सभी विधेयकों पर चर्चा के लिए कुल एक घंटे का समय दिया जाएगा। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी खुद इस चर्चा में हिस्सा लेंगे। वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के भी चर्चा में शामिल होने की संभावना है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह कदम केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले की गई चुनावी रैलियों में किए गए वादे से जुड़ा हुआ है। अमित शाह ने चुनावी सभाओं में पश्चिम बंगाल में UCC लागू करने की प्रतिबद्धता जताई थी।

दूसरा अहम बिल भी होगा पेश

UCC बिल के साथ-साथ बीजेपी सरकार एक और महत्वपूर्ण विधेयक पेश करेगी, जिसका नाम ‘वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026’ है। इस प्रस्तावित कानून के तहत अपराधियों को 12 महीने तक प्रिवेंटिव डिटेंशन यानी एहतियातन हिरासत में रखा जा सकेगा। इसके अलावा, वरिष्ठ जिला और पुलिस अधिकारियों को कुछ लोगों को राज्य से बाहर भेजने यानी एक्सटर्नमेंट ऑर्डर जारी करने का अधिकार दिया जाएगा। यह बिल काफी हद तक गुजरात प्रिवेंशन ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज एक्ट, 1985 पर आधारित है।

UCC लागू होने पर संभावित बदलाव

अगर पश्चिम बंगाल में UCC लागू होता है, तो राज्य में सभी समुदायों के लिए व्यक्तिगत कानूनों में समानता लाई जा सकती है। गुजरात, उत्तराखंड और असम में लागू UCC के तहत एक से अधिक शादी यानी बहुविवाह पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा, शादी के लिए एक समान कानूनी उम्र तय की गई है और लिव-इन रिलेशनशिप का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया गया है। इसमें विरासत के मामलों में महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार देने का प्रावधान भी शामिल है। हालांकि, अनुसूचित जनजातियों (ST) को UCC के दायरे से बाहर रखा गया है। एक अधिकारी के अनुसार, पश्चिम बंगाल के प्रस्तावित UCC बिल में भी इसी तरह के प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।

एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल में क्या प्रावधान हैं?

प्रस्तावित वेस्ट बंगाल पब्लिक सेफ्टी एंड कंट्रोल ऑफ एंटी-सोशल एक्टिविटीज बिल, 2026 में “गुंडा” की परिभाषा भी तय की गई है। इसके अनुसार, ऐसा व्यक्ति या किसी ग्रुप, गैंग या सिंडिकेट का सदस्य जो लगातार असामाजिक गतिविधियों को अंजाम देता है, उन्हें करने की कोशिश करता है, किसी को उकसाता है, बढ़ावा देता है, आर्थिक सहायता करता है या किसी भी तरह मदद करता है, उसे गुंडा माना जा सकता है।

इसके अलावा, ऐसे लोग भी इस श्रेणी में आ सकते हैं जिनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 111 या 112 के तहत चार्जशीट दाखिल की गई हो। साथ ही, आर्म्स एक्ट, NDPS एक्ट, एक्सप्लोसिव सब्सटेंस एक्ट या इमोरल ट्रैफिक (प्रिवेंशन) एक्ट के तहत आरोपी लोगों को भी इसके दायरे में रखा जा सकता है।

West Bengal UCC Bill: हिरासत से जुड़े नियम

इस बिल के तहत हिरासत से जुड़े प्रावधान पूरे राज्य में लागू किए जा सकते हैं। सरकार को किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के तीन हफ्ते के अंदर उसके मामले को एक एडवाइजरी बोर्ड के सामने रखना होगा। इस बोर्ड के प्रमुख हाई कोर्ट के मौजूदा या रिटायर्ड जज होंगे।

हालांकि, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को बोर्ड के सामने वकील के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अधिकार नहीं होगा। लेकिन कुछ विशेष मामलों में इसकी अनुमति दी जा सकती है। एडवाइजरी बोर्ड को हिरासत के नौ हफ्ते के अंदर राज्य सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी। अगर बोर्ड हिरासत को मंजूरी देता है, तो किसी व्यक्ति को अधिकतम 12 महीने तक हिरासत में रखा जा सकता है। हालांकि, राज्य सरकार कभी भी हिरासत के आदेश को रद्द या उसमें बदलाव कर सकती है।

एक्सटर्नमेंट ऑर्डर का अधिकार

इस बिल में जिला मजिस्ट्रेट, पुलिस कमिश्नर या डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) स्तर या उससे ऊपर के पुलिस अधिकारियों को एक्सटर्नमेंट ऑर्डर जारी करने का अधिकार देने का प्रावधान है। इसके तहत किसी व्यक्ति को, जिसे “गुंडा” घोषित किया गया है, किसी खास इलाके या जिले से एक साल तक की अवधि के लिए बाहर जाने का आदेश दिया जा सकता है।

अगर कोई व्यक्ति इस आदेश से असंतुष्ट है, तो वह 15 दिनों के अंदर राज्य सरकार के पास अपील कर सकता है। हालांकि, एक्सटर्नमेंट ऑर्डर का उल्लंघन करने पर व्यक्ति को तीन साल तक की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है। वहीं, ऐसे व्यक्ति को पनाह देने या छिपाने वाले लोगों पर भी कार्रवाई की जा सकती है, जिसमें दो साल तक की जेल और जुर्माने का प्रावधान है।

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