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पंचायत चुनाव पर इलाहाबाद HC सख्त, प्रधानों को प्रशासक बनाए रखने पर रोक, सरकार से मांगा जवाब

Up Panchayat Election:

Up Panchayat Election: उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के फैसले पर कड़ा रुख अपनाया है। न्यायालय ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक के रूप में बनाए रखने के आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगा दी है। साथ ही सरकार से पंचायत चुनाव कराने की स्पष्ट समय-सीमा और विस्तृत कार्यक्रम प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पंचायतों का कार्यकाल संविधान के अनुसार केवल पांच वर्ष का होता है और इसे किसी प्रशासनिक आदेश के माध्यम से नहीं बढ़ाया जा सकता।

संवैधानिक प्रावधानों का किया उल्लेख

न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की एकल पीठ ने अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई करते हुए 25 और 26 मई 2026 को जारी सरकारी आदेशों पर सवाल उठाए। इन आदेशों के तहत पंचायत चुनाव स्थगित कर ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य जारी रखने की अनुमति दी गई थी। अदालत ने कहा कि जिन कानूनी प्रावधानों के आधार पर यह आदेश जारी किए गए, उन्हें पहले ही असंवैधानिक घोषित किया जा चुका है। न्यायालय ने संविधान के पंचायत संबंधी प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि समय पर चुनाव कराना सरकार की संवैधानिक जिम्मेदारी है।

Up Panchayat Election: सरकार और निर्वाचन आयोग के तर्क

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अन्य पिछड़ा वर्ग आरक्षण से जुड़ी आयोग की रिपोर्ट लंबित होने को चुनाव में देरी का कारण बताया। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बावजूद रिपोर्ट समय पर प्रस्तुत नहीं की गई। वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने बताया कि मतदाता सूची प्रकाशित की जा चुकी है और आयोग चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन आवश्यक प्रशासनिक सहयोग अभी तक उपलब्ध नहीं कराया गया है।

सरकार को अंतिम अवसर, अगली सुनवाई 13 जुलाई को

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का अंतिम अवसर दिया है। इसमें आयोग की प्रगति, चुनाव की प्रस्तावित समय-सीमा और देरी के कारणों का स्पष्ट विवरण देना होगा। अदालत ने चेतावनी दी कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर संबंधित अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होना पड़ सकता है। उल्लेखनीय है कि प्रदेश की 57 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों के प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो चुका है। मामले की अगली सुनवाई तेरह जुलाई को होगी।

 

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