क्या है वापपंथी पार्टियों का स्टैंड?
यह फैसला वामपंथी पार्टियों के उस रुख को दिखाता है जिसके तहत वे टीवीके के नेतृत्व वाली सरकार को सिर्फ बाहर से समर्थन दे रही हैं और सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा नहीं हैं।
Chennai: बाहर से सरकार का समर्थन
सीपीआई और सीपीआई (एम) ने टीवीके सरकार के बनने के बाद से ही अहम मुद्दों पर बाहर से उसका समर्थन किया है। उनका कहना है कि यह समर्थन किसी औपचारिक राजनीतिक समझौते के बजाय नीतियों और जनहित पर आधारित है।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम में शामिल न होने के उनके फैसले को सरकार के साथ मतभेद के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके बजाय, दोनों पार्टियों ने दोहराया कि वे मजदूरों, किसानों और समाज के अन्य कमजोर वर्गों से जुड़े मुद्दों पर सरकार का सहयोग करती रहेंगी। उन्होंने यह भी साफ किया कि वे जरूरत पड़ने पर सरकार के सामने जनहित से जुड़े मुद्दे उठाती रहेंगी।
Chennai:अहम मुद्दों पर ज्ञापन सौंपेंगे
भले ही वे दावत से दूर रहें, लेकिन सीपीआई और सीपीआईएम के नेता दिन में बाद में सचिवालय में मुख्यमंत्री विजय से मुलाकात करेंगे। संभावना है कि वे मजदूरों और समाज के अन्य वर्गों से जुड़े कई अहम मुद्दों को उजागर करते हुए एक ज्ञापन सौंपेंगे और सरकार से दखल देने की मांग करेंगे।
इस घटनाक्रम से वामपंथी दलों द्वारा टीवीके सरकार को निरंतर समर्थन देने और अपनी राजनीतिक स्वतंत्रता बनाए रखने की इच्छा के बीच संतुलन स्थापित करने के प्रयास स्पष्ट होते हैं।
गठबंधन सहयोगियों के लिए आयोजित कार्यक्रम से दूर रहकर और मुख्यमंत्री के साथ नीतिगत मुद्दों पर बातचीत जारी रखकर, सीपीआई और सीपीआई (एम) ने यह स्पष्ट करने का प्रयास किया है कि सरकार के साथ उनका संबंध औपचारिक गठबंधन के बजाय बाहरी समर्थन का ही है।
Chennai: कही ंसरकार से असंतुष्ट तो नहीं वामपंथी?
हालांकि सरकार को समर्थन देने को लेकर वामपंथियों का अपना स्टैंड क्लियर है, दावत में शामिल न होने की वजह भी उन्होंने बता दी है, इसके बावजूद इस तरह की चर्चाएं भी उठ रही हैं कि कहीं वामपंथी अपने मुद्दों को लेकर सरकार से असंतुष्ट तो नहीं हैं? कयास लगाए जा रहे हैं कि आखिर मजदूरों और समाज के अन्य वर्गों से जुड़े वे कौन से अहम मुद्दे हैं जिनको लेकर वे सचिवालय में सीएम से मिलकर ज्ञापन सौंपेंगे? कहीं ऐसा तो नहीं कि वामपंथी सरकार से नाराज हों? उनकी यह नाराजगी सरकार के लिए खतरे की घंटी तो नहीं है?
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