Ram Mandir Donation Scam:अयोध्या के राम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम की कथित चोरी के मामले में पुलिस जांच लगातार नए मोड़ ले रही है। कोर्ट से विशेष अनुमति मिलने के बाद पुलिस ने जेल में बंद आरोपियों से करीब दो घंटे तक गहन पूछताछ की। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने कथित तौर पर करोड़ों रुपये की चोरी और पूरे घटनाक्रम से जुड़े कई महत्वपूर्ण दावे किए। सूत्रों के मुताबिक, आरोपियों ने यह भी कहा कि दान राशि की गिनती और उससे जुड़ी व्यवस्थाओं में ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा की भूमिका रहती थी। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
गिरफ्तार आरोपियों से पुलिस ने पूछे कई सवाल
इस मामले में पुलिस ने केस दर्ज करने के बाद ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के करीबी बताए जाने वाले टिन्नू यादव, गणना प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव समेत अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष यादव, रमाशंकर मिश्रा, करुणेश और अवनीश शुक्ला को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। मंगलवार को पुलिस टीम ने सभी आरोपियों से अलग-अलग पूछताछ की। सूत्रों के अनुसार, सबसे अधिक नकदी की बरामदगी अवनीश मिश्रा के पास से हुई थी, जिसके चलते उससे सबसे लंबी पूछताछ की गई। पुलिस को इसी पूछताछ में कथित चोरी के नेटवर्क और उसकी कार्यप्रणाली से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं।
Ram Mandir Donation Scam:चाबियों की व्यवस्था और मिलीभगत का दावा
पूछताछ में आरोपियों ने दावा किया कि दान राशि की गिनती वाले कक्ष की एक चाबी टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी चाबी बैंक कर्मचारियों के पास होती थी। आरोपियों के अनुसार, इसी व्यवस्था का फायदा उठाकर कथित तौर पर दान की रकम में हेराफेरी की जाती थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस पूरे खेल में कुछ बैंक कर्मचारियों की भी मिलीभगत थी और कथित तौर पर चोरी की गई रकम का बंटवारा आपस में किया जाता था। फिलहाल पुलिस इन दावों की स्वतंत्र रूप से जांच कर रही है।
Ram Mandir Donation Scam: सीसीटीवी से बचने के लिए अपनाई गई खास तरकीब
पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर यह भी बताया कि उन्होंने सीसीटीवी कैमरों से बचने के लिए विशेष तरीका अपनाया था। जब कोई व्यक्ति नकदी निकालता था तो बाकी लोग उसे चारों ओर से घेर लेते थे, ताकि कैमरों में पूरी गतिविधि स्पष्ट रूप से रिकॉर्ड न हो सके। इसके बाद रकम को कुछ समय के लिए बाथरूम में छिपाया जाता था और मौका मिलने पर उसे परिसर से बाहर निकाल दिया जाता था। आरोपियों का दावा है कि ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों के करीबी होने के कारण उन्हें नियमित जांच का सामना भी नहीं करना पड़ता था।पूछताछ के दौरान आरोपियों ने मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी कई दावे किए। उनके अनुसार, आधुनिक कंट्रोल रूम से कैमरों की निगरानी तो होती थी, लेकिन निगरानी करने वाले कर्मचारी केवल औपचारिकता निभाते थे। इसी कथित लापरवाही का फायदा उठाकर लंबे समय तक चोरी की वारदात को अंजाम दिया जाता रहा। हालांकि, सुरक्षा व्यवस्था में वास्तव में कोई चूक हुई थी या नहीं, इसकी जांच अभी जारी है।
चोरी की रकम से खरीदी जमीन और मकान का दावा
पुलिस पूछताछ में आरोपियों ने कथित तौर पर स्वीकार किया कि चोरी की गई रकम का इस्तेमाल संपत्ति बनाने में किया गया। उन्होंने दावा किया कि इस पैसे से जमीन और मकान खरीदे गए। अब पुलिस इन संपत्तियों का ब्योरा जुटाने और चोरी की रकम की बरामदगी के लिए कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है।
Ram Mandir Donation Scam: अनिल मिश्रा की भूमिका की जांच जारी
पूछताछ के दौरान ट्रस्ट के ट्रस्टी अनिल मिश्रा का नाम भी सामने आने का दावा किया गया है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक पुलिस या जांच एजेंसी की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है और न ही किसी अदालत ने उनके खिलाफ कोई निष्कर्ष दिया है। पुलिस फिलहाल सभी दावों की जांच कर रही है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कह रही है।राम मंदिर चढ़ावा चोरी का यह मामला अब केवल कथित चोरी तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी जांच सुरक्षा व्यवस्था, दान राशि की निगरानी और पूरे सिस्टम की पारदर्शिता तक पहुंच गई है। पुलिस लगातार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और उनके दावों का सत्यापन कर रही है। मामले में कई बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है, लेकिन अंतिम तस्वीर जांच पूरी होने और आधिकारिक रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।








