Rajasthan News: भारत-पाकिस्तान सीमा से लगे राजस्थान के संवेदनशील इलाकों में स्थित मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों को जारी नोटिसों को लेकर कानूनी बहस तेज हो गई है। राजस्थान हाई कोर्ट ने इन नोटिसों के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज करते हुए गृह मंत्रालय की 11 अक्टूबर 2021 की अधिसूचना और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) अधिनियम, 1968 की धारा 139 का हवाला दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्र में राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी आधार पर प्रशासन को कार्रवाई का अधिकार प्राप्त है। अब इस फैसले के बाद यह जानना महत्वपूर्ण हो गया है कि आखिर वह नियम क्या है, जिसके तहत यह कार्रवाई की जा रही है।
गृह मंत्रालय की 11 अक्टूबर 2021 की अधिसूचना क्या है?
राजस्थान हाई कोर्ट ने अपने फैसले में गृह मंत्रालय की 11 अक्टूबर 2021 की अधिसूचना का विशेष उल्लेख किया। यह अधिसूचना बीएसएफ अधिनियम, 1968 की धारा 139 के तहत जारी की गई थी। इसके माध्यम से भारत-पाकिस्तान सीमा से 50 किलोमीटर तक बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र का विस्तार किया गया। सरकार का उद्देश्य सीमा पर घुसपैठ, तस्करी, अवैध गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े खतरों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना था। अदालत ने इसे सुरक्षा एजेंसियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर लिया गया नीतिगत निर्णय बताया।
Rajasthan News: 50 किलोमीटर का सीमा क्षेत्र क्यों माना जाता है संवेदनशील?
हाई कोर्ट ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय सीमा से 50 किलोमीटर तक का क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील है। इस इलाके में किसी भी प्रकार के अनधिकृत निर्माण या संदिग्ध गतिविधि से सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती पैदा हो सकती है। अदालत के अनुसार प्रशासन को अतिरिक्त अधिकार इसलिए दिए गए हैं ताकि सीमा पार अपराध, तस्करी और घुसपैठ जैसी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि इस तरह की कार्रवाई को सामान्य भूमि विवाद की तरह नहीं देखा जा सकता।

धार्मिक स्थलों को नोटिस क्यों जारी किए गए?
राज्य सरकार ने अदालत में बताया कि सीमा क्षेत्र में स्थित कई मस्जिदों, मदरसों और दरगाहों का निर्माण आवश्यक वैधानिक अनुमति और भूमि उपयोग परिवर्तन की मंजूरी के बिना किया गया है। सरकार के अनुसार इन निर्माणों को कारण बताओ, खाली करने और बेदखली के नोटिस कानून के तहत जारी किए गए। याचिकाकर्ताओं ने इस कार्रवाई को चुनौती दी, लेकिन अदालत ने माना कि अनधिकृत निर्माणों की जांच और कार्रवाई प्रशासन का अधिकार है, विशेषकर तब जब मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हो।
Rajasthan News: कोर्ट ने धार्मिक भेदभाव और बुलडोजर कार्रवाई की दलील क्यों ठुकराई?
याचिकाकर्ताओं ने दावा किया कि कार्रवाई एक विशेष समुदाय को निशाना बनाकर की जा रही है। हालांकि हाई कोर्ट ने रिकॉर्ड का हवाला देते हुए कहा कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला जिससे धार्मिक भेदभाव साबित हो सके। अदालत ने कहा कि जहां भी संवेदनशील क्षेत्र में अनधिकृत निर्माण पाए गए, वहां कानून के अनुसार कार्रवाई की गई है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के बुलडोजर कार्रवाई संबंधी फैसले का हवाला भी कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। अदालत के अनुसार वह फैसला अलग परिस्थितियों से जुड़ा था और उसकी तुलना सीमा सुरक्षा से जुड़े इस मामले से नहीं की जा सकती।

अब आगे क्या होगी प्रक्रिया?
हाई कोर्ट ने याचिकाएं खारिज करने के साथ यह भी निर्देश दिया कि प्रत्येक मामले की अलग-अलग जांच की जाए। इसके लिए संबंधित जिले के जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और बीएसएफ प्रतिनिधि की संयुक्त समिति गठित करने का आदेश दिया गया है। यह समिति प्रत्येक संपत्ति का अलग-अलग परीक्षण करेगी और उपलब्ध रिकॉर्ड तथा कानून के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी। अदालत ने यह भी कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में परिस्थितियों के अनुसार प्रशासनिक प्रक्रिया अपनाई जा सकती है, बशर्ते कार्रवाई के पीछे पर्याप्त आधार और वैधानिक प्रक्रिया मौजूद हो।








